Wednesday, December 5, 2018

दरोगा और दंगाई भीड़

जीवन की आप धापी में  थोड़ा वक्त का अभाव सा रहने लगा है, यहां तक कि कुछ लिखने तक का समय नहीं मिल पा रहा है परन्तु आज किसी प्रकार थोड़ा समय निकला हूँ और आप सबने देखा-पढ़ा, सुना तो जरूर होगा कि बुलंदशहर में दंगाइयों ने क्या किया।  

बात ये है कल से मिशेल क्रिश्चियन की चर्चा ज्यादा चल रही है चाहे वो हमारी बेजुबान मीडिया हो या हमारे सर्वाधिक बोलने वाले और सर्वाधिक आसमान में उड़ने वाले प्रचारमंत्री महोदय हों, इन दोनों के मुंह में मिशेल ऐसे निकल रहा है जैसे की इनका रिश्तेदार लगता हो आज राजस्थान के चुनाव प्रचार में हमारे ज्यादा बोलने वाले और कम काम करने वाले प्रचारमंत्री ने कहा कि जब मिशेल बोलेगा तो बात दूर तक जाएगी और कांग्रेसी फसेंगे, अब इस महान बुद्धि मान को कौन बताये कि जिस बात मतलब लन्दन की कोर्ट को लेकर तुम आरोप लगा रहे हो वो तो खुद लन्दन की कोर्ट की कोर्ट ने कुछ दिन पहले हीं निरस्त कर चूका है और न्य कुछ आपके पास है नहीं शिवाय हिन्दू-मुस्लिम करने-कराने और अराजक संगठनों के द्वारा बुलंदशहर दोहराने के.

  तीन दिन पहले समस्त देशवासियों ने देखा हीं होगा कि कैसे एक थानेदार सुबोध सिंह जी को पागल, आततायी भीड़  अपने काबू में ले लेती है और उस बहादुर थानेदार की जान ले लेती है उसकी हत्या कर देती है और उस घटना में जिन वहशी आरोपियों का नाम आ रहा है वो क्रमशः विहिप,बजरंद दल, भाजपा जनता युवा मोर्चा के गुंडे शामिल पाए जाते हैं ये संगठन औपचारिक और अनौपचारिक तौर पर वर्तमान प्रदेश और देश की सरकार समर्थित संगठन है, हमें एक सभ्य समाज होने की वजह से ये जरूर सोचना चाहिए कि हम किस तरह के भारत का नव-निर्माण कर रहे है जिसमें कोई कानून कोई ब्यवस्था न हो क्या ऐसा समाज आप बनाना चाहते और और अपने आने वाली पीढ़ी को क्या देना चाहता हैं.

हमें अपने आस-पास उस भीड़ को रोकना चाहिए जो दंगाई के भेष में आती है  और अमन-चैन की फिजाओं में जहर घोल जाती है, ये किसी एक कि बात नहीं है भीड़ अनियंत्रित होती है आज ये मेरे साथ हो रहा है इसकी क्या जिम्मेदारी है कि कल आप के साथ न हो, आप सब से मेरी यही प्रार्थना है कि आप अपने बच्चे को उस दंगाई भीड़ का हिस्सा बनने से रोकिये उसे उसके भविष्य और जिम्मेवारियों के बारे में बताइये कि किसी सेना में और दंगाई दल में भर्ती होने से या गले में पट्टा लटका कर घूमने से भविष्य उज्जवल नहीं होगा अगर वाकई सेना में भर्ती होने का मन है तो जाओ भारतीय सेना में देश की सेवा करो पर दंगाई सेना में नहीं।

मेरा मानना है कि ज्यादातर दंगे राजनीति प्रायोजित होते है जभी तो एक अंदेशा होने के बाद सारे नेता बरसाती मेढक की तरह बिल से निकल कर टर्र-टर्र करने लगते है जिससे उनकी फोटो टीवी और मीडिया में आती है और वो अपना धंधा चलाने लगते है अपने विषधर भाषा  के वजह से ये नेता के रूप में अपने आप को स्थापित करने में सफल हो जाते है और फिर दंगाइयों की मौज आ जाती है और कुछ मंत्री (भारत सरकार) उन्हें माला पहनाकर प्रोत्साहित करते है.

जय हिन्द   

   

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