Saturday, May 20, 2023

कर्नाटक में कांग्रेस के बहुमत के चौथी सरकार

जैसा कि कुछ समय से देखा जा रहा था हमारे देश में एक प्रश्न शुरू हो गया था और देश की सत्ताधारी पार्टी जिसका नाम भाजपा है. उनके सर्वोच्च नेता एवं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी हमेशा रैलियों में भाषणों में कहते पाए जाते थे कि कांग्रेस मुक्त भारत बनाना है. लेकिन बदलते दौर के साथ-साथ उनकी यह बातें एक तरह से जुमला साबित होने लगी हैं. क्योंकि कांग्रेस धीरे-धीरे ही सही देशवासियों के भरोसे को जीतने लगी है. अभी कुछ माह पूर्व हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने भाजपा को हराकर सत्ता हासिल किया और अब 13 मई को कर्नाटक में भाजपा को कांग्रेस ने बहुत भारी शिकस्त दी है. जहां कांग्रेस 135 सीटों की जबरदस्त बहुमत के साथ सत्ता में आई और आज जब सिद्धारमैया मुख्यमंत्री और डी के शिवकुमार उपमुख्यमंत्री पद का शपथ ले रहें थे. तब वहां पर विपक्ष के तमाम बड़े नेता राहुल गांधी जी, प्रियंका गांधी जी, शरद पवार जी, नीतीश कुमार जी, तेजस्वी यादव जी, सीताराम येचुरी जी, और अनेक विपक्षी नेता मंच पर उपस्थित थे.
अब विश्लेषण किया जाने लगा है कि कांग्रेस को इतनी विशाल जीत किस लिए मिली ? क्या कर्नाटक की जनता भाजपा के भ्रष्टाचार से तंग आ चुकी थी या कुछ और भी कारण हो सकते हैं ? जहां तक इनके पीछे मेरा मानना है इसमें पहला कारण तो यह रहा कि भाजपा सरकार के ऊपर 40% कमीशन का एक टैग लग गया था. जिसको वहां के स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने जनता के बीच जाकर उठाया इसका खामियाजा बीजेपी को उठाना पड़ा और दूसरा महत्वपूर्ण कार्य कह रहा राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा केरल के बाद सबसे ज्यादा कर्नाटक और कर्नाटक में काफी अच्छा सहयोग मिला था. जिस दिन परिणाम आया उस दिन देखा गया तो जिन क्षेत्रों से राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा निकली थी. वहां की कांग्रेस ने 75% सीटें जीत ली.
मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष दलित चेहरा हुए कर्नाटक के ही निवासी थे. उनकी छवि आम लोगों के बीच में काफी अच्छी थी. जिसकी वजह से उनके समाज के लोग और दूसरे समाज के लोगों ने भी कांग्रेस को भरपूर समर्थन दिया. जिससे कांग्रस इतना बड़ा बहुमत हासिल कर पाई. कांग्रेस के इस जीत में कुछ कारक और भी रहे हैं. जिसमें सिद्धारमैया जी. जो पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं. कर्नाटक में सिद्धारमैया की छवि एक जन नेता की रही है. वह धर्मनिरपेक्ष छवि और धर्मनिरपेक्षता के साथ अपने काम को करते हैं. उनका मुख्य वोट आधार दलित, पिछड़ा, अल्पसंख्यक है तथा दूसरा मुख्य कारक ऊर्जावान और कांग्रेस कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष डी के शिवकुमार रहे. जो कांग्रेस के लिए हर जरूरत के वक्त एक संकटमोचक की भूमिका में नजर आए. चाहे अहमद पटेल की राज्य सभा सीट का मामला हो या महाराष्ट्र का मामला हो अथवा राजस्थान हो. सभी जगह डीके शिवकुमार ने कांग्रेस आलाकमान के भरोसे को कायम रखा. उन्हीं की वजह से कांग्रेस कर्नाटक में भाजपा के खिलाफ एक नरेटिव सेट कर पाई. जिसका कांग्रेस को फायदा मिला.
कांग्रेस ने जो वहां 5 वादे किए थे उन्हें कर्नाटक की जनता के सामने पूरा करके दिखाना होगा. क्योंकि इनके पास लोकसभा चुनाव तक के लिए बहुत कम वक्त है. अगर जनता को दिए गए वादे कांग्रेस सरकार पूरी नहीं कर पाती है तो उसका खामियाजा भी ने लोकसभा में उठाना पड़ सकता है. यदि अपने किए हुए वायदों को कांग्रेस लोकसभा चुनाव से पहले अमल पूरा कर देती है तो उसे 2024 के चुनाव में कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। अभी तक कांग्रेस की अपने पूर्ण बहुमत की 4 राज्यों में सरकार है. जिनमें राजस्थान, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक है. इसके अलावा कांग्रेस बिहार, झारखंड और तमिलनाडू में गठबंधन के साथ है।‌ अब धीरे-धीरे कांग्रेस का जनाधार बढ़ रहा है अथवा कहा जाए कि जनता के बीच कांग्रेस और राहुल गांधी की स्वीकार्यता बढ़ती जा रही है. अब यह देखना होगा कि कांग्रेस और राहुल गांधी तथा विपक्ष के नेता साथ मिलकर 2024 में भाजपा संघ के लिए कितनी बड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं ?

Monday, May 8, 2023

संसद में पंडित नेहरू की श्रद्धांजलि में अटल जी का भाषण

पिछले कुछ दिनों के अंतराल के बाद मैंने आज सोशल मीडिया पर पढ़ना शुरू किया तो. मेरी नजर आज देश के एक विख्यात शख्सियत पर आकर रूक गई. और उस महान ब्यक्तित्व का नाम पंडित जवाहर लाल नेहरू था. आज के दौर में देश की हर बुराई का जड़ विपक्ष के द्वारा नेहरू को बताया जाता है और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर इस विषय पर खुद बहस भी होती है. लेकिन नेहरू ने आजादी से पहले और आजादी के बाद देश के लिए क्या योगदान दिया ? उस पर कोई चर्चा नहीं होती है. वैसे मैं अपने कई लेखों में नेहरू जी के बारे में लिखा हूँ।  इस लिए यहां संक्षेप में लिख रहा हूँ. देश का हर ईमानदार ब्यक्ति जानता है कि नेहरू ने हीं नए भारत की नींव रखी। जिस पर हमारा आज का भारत विश्व जगत के मस्तक पर चढ़कर मुस्कुरा रहा है. सोचिये यदि नेहरू ने शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन के संबंध में विचार न करके गोबर और मूत्र पर अटके होते तो डाक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक कैसे बनते ? जिन संस्थानों ने रिकार्ड समय के अंदर कोरोना की दवाई का आविष्कार कर करोड़ों लोगों की जान बचाई. ये नेहरू के उसी आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार होने जैसा था.    
मैं आज जब अपने आस-पास देखता हूँ तो कि लोग नेहरू के किये कार्यों को जानते भी नहीं हैं फिर भी उनके बारे में भला-बुरा कहते हैं. नेहरू आलोचनाओं से परे नहीं हैं, परन्तु उनकी उपलब्धियों का भी समाज में जिक्र किया जाना चाहिए. आप चीन, पाकिस्तान और कश्मीर के संदर्भ में उनकी आलोचना तो करते हैं, लेकिन इन्हीं देशों के संबंध में उनके किये गए कार्यों की समीक्षा नहीं करके गलत करते हैं. आज मैं एक ऐतिहासिक घटना का जिक्र करूंगा. जब नेहरू जी की मृत्यु 27 मई 1964 को हुई तब उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए तब के जनसंघ के युवा सांसद भाजपा नेता, देश के पूर्व प्रधानमंत्री आदरणीय अटल जी ने नेहरू के चरित्र का वर्णन करते हुए कुछ कहा था. जिस पर मैं आपका ध्यान आकृष्ट कराना चाहता हूँ.

संसद में पंडित नेहरू की श्रद्धांजलि में अटल जी का भाषण -

महोदय,
एक सपना था जो अधूरा रह गया, एक गीत था जो गूँगा हो गया, एक लौ थी जो अनन्त में विलीन हो गई। सपना था एक ऐसे संसार का जो भय और भूख से रहित होगा, गीत था एक ऐसे महाकाव्य का जिसमें गीता की गूँज और गुलाब की गंध थी। लौ थी एक ऐसे दीपक की जो रात भर जलता रहा, हर अँधेरे से लड़ता रहा और हमें रास्ता दिखाकर, एक प्रभात में निर्वाण को प्राप्त हो गया.
मृत्यु ध्रुव है, शरीर नश्वर है. कल कंचन की जिस काया को हम चंदन की चिता पर चढ़ा कर आए, उसका नाश निश्चित था. लेकिन क्या यह ज़रूरी था कि मौत इतनी चोरी छिपे आती? जब संगी-साथी सोए पड़े थे, जब पहरेदार बेखबर थे, हमारे जीवन की एक अमूल्य निधि लुट गई. भारत माता आज शोकमग्ना है – उसका सबसे लाड़ला राजकुमार खो गया. मानवता आज खिन्नमना है – उसका पुजारी सो गया. शांति आज अशांत है – उसका रक्षक चला गया. दलितों का सहारा छूट गया. जन जन की आँख का तारा टूट गया. यवनिका पात हो गया. विश्व के रंगमंच का प्रमुख अभिनेता अपना अंतिम अभिनय दिखाकर अन्तर्ध्यान हो गया.
महर्षि वाल्मीकि ने रामायण में भगवान राम के सम्बंध में कहा है कि वे असंभवों के समन्वय थे. पंडितजी के जीवन में महाकवि के उसी कथन की एक झलक दिखाई देती है. वह शांति के पुजारी, किन्तु क्रान्ति के अग्रदूत थे; वे अहिंसा के उपासक थे, किन्तु स्वाधीनता और सम्मान की रक्षा के लिए हर हथियार से लड़ने के हिमायती थे.
वे व्यक्तिगत स्वाधीनता के समर्थक थे किन्तु आर्थिक समानता लाने के लिए प्रतिबद्ध थे. उन्होंने समझौता करने में किसी से भय नहीं खाया, किन्तु किसी से भयभीत होकर समझौता नहीं किया. पाकिस्तान और चीन के प्रति उनकी नीति इसी अद्भुत सम्मिश्रण की प्रतीक थी. उसमें उदारता भी थी, दृढ़ता भी थी. यह दुर्भाग्य है कि इस उदारता को दुर्बलता समझा गया, जबकि कुछ लोगों ने उनकी दृढ़ता को हठवादिता समझा.
मुझे याद है, चीनी आक्रमण के दिनों में जब हमारे पश्चिमी मित्र इस बात का प्रयत्न कर रहे थे कि हम कश्मीर के प्रश्न पर पाकिस्तान से कोई समझौता कर लें तब एक दिन मैंने उन्हें बड़ा क्रुद्ध पाया। जब उनसे कहा गया कि कश्मीर के प्रश्न पर समझौता नहीं होगा तो हमें दो मोर्चों पर लड़ना पड़ेगा तो बिगड़ गए और कहने लगे कि अगर आवश्यकता पड़ेगी तो हम दोनों मोर्चों पर लड़ेंगे. किसी दबाव में आकर वे बातचीत करने के खिलाफ थे.
महोदय, जिस स्वतंत्रता के वे सेनानी और संरक्षक थे, आज वह स्वतंत्रता संकटापन्न है. सम्पूर्ण शक्ति के साथ हमें उसकी रक्षा करनी होगी. जिस राष्ट्रीय एकता और अखंडता के वे उन्नायक थे, आज वह भी विपदग्रस्त है. हर मूल्य चुका कर हमें उसे कायम रखना होगा. जिस भारतीय लोकतंत्र की उन्होंने स्थापना की, उसे सफल बनाया, आज उसके भविष्य के प्रति भी आशंकाएं प्रकट की जा रही हैं. हमें अपनी एकता से, अनुशासन से, आत्म-विश्वास से इस लोकतंत्र को सफल करके दिखाना है. नेता चला गया, अनुयायी रह गए. सूर्य अस्त हो गया, तारों की छाया में हमें अपना मार्ग ढूँढना है. यह एक महान परीक्षा का काल है। यदि हम सब अपने को समर्पित कर सकें एक ऐसे महान उद्देश्य के लिए जिसके अन्तर्गत भारत सशक्त हो, समर्थ और समृद्ध हो और स्वाभिमान के साथ विश्व शांति की चिरस्थापना में अपना योग दे सके तो हम उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करने में सफल होंगे.
संसद में उनका अभाव कभी नहीं भरेगा. शायद तीन मूर्ति को उन जैसा व्यक्ति कभी भी अपने अस्तित्व से सार्थक नहीं करेगा. वह व्यक्तित्व, वह ज़िंदादिली, विरोधी को भी साथ ले कर चलने की वह भावना, वह सज्जनता, वह महानता शायद निकट भविष्य में देखने को नहीं मिलेगी. मतभेद होते हुए भी उनके महान आदर्शों के प्रति, उनकी प्रामाणिकता के प्रति, उनकी देशभक्ति के प्रति, और उनके अटूट साहस के प्रति हमारे हृदय में आदर के अतिरिक्त और कुछ नहीं है.
इन्हीं शब्दों के साथ मैं उस महान आत्मा के प्रति अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ.

- श्री अटल बिहारी वाजपेयी

(29 मई, 1964 को संसद में दिया गया भाषण)

Friday, March 24, 2023

राहुल का संसद से निलंबन और लोकतंत्र

लोकतंत्र का काला दिन आज पूर्ण हुआ. 1975 में इंदिरा सरकार द्वारा घोषित रूप से आपातकाल लागू किया था. तब के तत्कालीन विपक्ष जिसमें स्व. अटल जी , स्व. देसाई जी, जय प्रकाश नारायण जी, लोहिया जी, जैसे लोग सरकारी दमन का नाम देते थे. जिसमें वे लोग "मीसा" क़ानून के तहत जेल गए थे. उसे वो लोग और आज के सत्ताधारी दल के लोग लोकतंत्र को "काला अध्याय" मानते हैं. लेकिन आज जो हो रहा है. वह अघोषित रूप से आपातकाल है. 2019 में कर्नाटक में राहुल गांधी ने एक बयान दिया था. जिसके संदर्भ में कल गुजरात के मजिस्ट्रेट ने दो साल की सजा का फरमान सुनाया और आज आनन-फानन में राहुल गांधी की वायनाड से लोकसभा की सदस्यता रद्द कर दी गयी है. शायद ये बीजेपी की घबराहट है. 

जिन्होंने ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा किया उन्हें भी जानना जरूरी है कि वो कौन हैं ? कहां से आए हैं ? कोई स्वयंसेवी संस्था चलाते हैं अथवा किसी राजनैतिक दल से संबंध रखते हैं ? जी हां, तो ज़बाब ये है कि शिकायत कर्ता महोदय का नाम पुर्णेश मोदी है. जो वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं. ये महाशय उसी प्रदेश के निवासी हैं, जिस प्रदेश से माननीय प्रधानमंत्री जी और गृहमंत्री जी. अब तो आप समझ हीं गए होंगे कि बात गुजरात प्रदेश की हो रही है.

सौजन्य : @brajeshabpnews

जब से राहुल गांधी ने "भारत जोड़ो यात्रा" शुरू की और राहुल को जनता का अपार समर्थन मिला. उससे संघ/सरकार अंदर से डर गयी है. राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता खत्म कर देना कांग्रेस के लिए बहुत सुनहरा अवसर होगा. अब राहुल गांधी बिना रुके बोल सकेंगे. राहुल गांधी के पास अब एक साल का पूरा समय है कि जनता के सामने निर्भीक होकर जनसरोकार का मुद्दा उठाएं. शायद जनता अब राहुल गांधी के प्रति एक हमदर्दी रखेगी. क्योंकि राहुल गांधी ने वही कहा है जो हर मानस के अंदर तैर रही है. 

राहुल गांधी के निलंबन के बाद या तो कांग्रेस एकजुट हो जायेगी या बिलकुल बिखर जायेगी. यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस पार्टी का आगे की दिशा क्या होती है ? मेरा ब्यक्तिगत मानना है कि अब राजस्थान में पायलट और गहलोत दोनों एक हो जाएंगे. ऐसे वक्त में राजस्थान में बीजेपी के लिए बहुत मुश्किल होने वाली है. इसका असर राजस्थान हीं नहीं छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, कर्नाटक में होने वाले चुनाव में गहरा असर डालेगा। कांग्रेस इसे अब अडानी घोटाले पर संसद में राहुल के सवाल के बारे में 2024 के चुनाव तक ज़िंदा रखेगी। जिसमें सम्भवतः विपक्ष की पार्टिया भी मामले की गंभीरता को देखते हुए एकजुट होंगी। अगर एकजुट नहीं होंगी तो क्षेत्रीय पार्टियों का अस्तित्व 2024 के बाद नहीं बचेगा। शिव सेना और लोक जनशक्ति पार्टी इसका वर्तमान उदाहरण है.

राहुल गांधी ने इस सरकार को सबसे मुखर होकर घेरा है. अगर 2014 से विपक्ष की तरफ से कोई सबसे मुखर आवाज निकली है तो वो राहुल गांधी की थी. राहुल गांधी की बात को लोगों ने व्हाट्सएप्प विश्वविद्यालय के माध्यम से सुना, पढ़ा और उसके अनुसार राहुल के बारे में लोगों ने अपनी राय बनाई या झूठ का शिकार हुए. भारत जोड़ो यात्रा के बाद राहुल गांधी के पक्ष में लोगों ने एक सकारात्मक विचार बनाया था. कांग्रेस की तरफ से अध्यक्ष खरगे, दिग्विजय सिंह, जयराम रमेश, के. सी. वेणुगोपाल  प्रियंका गांधी, अशोक गहलोत, भूपेश बघेल समेत सभी नेताओं ने सरकार के खिलाफ राहुल के समर्थन में एकजुटता प्रदर्शित करना शुरू कर दिया है. यही गांधी परिवार की कमाई है. राहुल गांधी का संसद से निलंबन इंदिरा गांधी की संसद सदस्यता रद्द होने की याद दिला दी.

अब तो माननीय कोर्ट और सरकार को भाषण में शब्दों का एक लिस्ट निकाल देनी चाहिए.अन्यथा विपक्ष को हमेशा के लिए नेश्ता-नाबूत कर दिया जाएगा. एक तरफ सत्ता पक्ष के तमाम नेता किसी समुदाय या किसी ब्यक्ति के खिलाफ बहुत हीं घटिया शब्दों का प्रयोग करते हैं. उन्हें कोई सजा नहीं मिलती. हाल के हीं दिनों में कुछ लोगों को तो (आदर के साथ ) माननीय हाई कोर्ट ने बाईज्जत बरी भी किया. विपक्ष को भी अब सचेत होने की जरूरत है.लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि विपक्ष की आवाज को भी महत्व दिया जाता है. जिसे आज की सरकार ने लगभग खत्म कर दिया है.


Monday, January 9, 2023

जोशीमठ

हमारे प्राचीन धरोहरों को सहेज कर रखने वाली और श्री शंकराचार्य स्वामी जी के आदर्शों को जिंदा रखने वाला जोशीमठ आज तबाह हो रहा है। जोशीमठ की तबाही का कारण सरकारों का घमंड है। अनेकों बार साधु-संतों ने विभिन्न सरकारों को चेताया कि प्रकृति से खिलवाड़ मत करो, जब प्रकृति कोप करेगी तो उसका परिणाम अत्यंत भयंकर होगा। वो आज देखने को मिल रहा है। जहां खुशहाल जोशीमठ में घरों-मकानों में दरारें पड़नी शुरू हो गई हैं। सैंकड़ों परिवारों को अपने मकानों से निकलकर कैंपों में रहने को मजबूर होना पड़ा है। जगह-जगह जल की धाराएं अपने आप फूट कर बह रही हैं और आने वाले किसी भयंकर अनहोनी की आशंका को बलवती कर रही है।
इन सब के बीच एक पौराणिक, सांस्कृतिक नगरी लगभग उजड़ने की कगार पर है। हमारे सनातन हिंदू धर्म के ध्वजवाहक श्री शंकराचार्य जी की कर्मभूमि आज अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए सरकार से लड़ाई लड़ रही है। मैं गर्व से कहता हूं कि जिस गिरि "जाति" को मैं अपने सम्मान के साथ जोड़ता हूं। वह हमारे पूज्यनीय शंकराचार्य जी द्वारा जन्माए गये दशनामी अखाड़े में से एक है। लेकिन हम कितने लाचार और विवश हैं जो अपने भगवान के कर्मस्थली की रक्षा करने में असमर्थ हैं।