Monday, April 19, 2021

कोरोना योद्धा श्रीनिवास बी वी

कोविड के इस महामारी के दौर में आप सुरक्षित रहिये. आपसे हमारी यही अपेक्षा है. हर जिम्मेदार नागरिक बस यही प्रार्थना कर रहा है. लेकिन जिन निति नियंताओं के हाथों में हमने जीवन की बागडोर थमाई थी. वो लाशों के ढेर पर खड़े होकर चुनावी रैलियां कर रहें हैं. हमने जिनको अपने सपनों को सजाने का जिम्मा दिया था. वो दूर कहीं प्रचार में नजर आते हैं और रात में आठ बजे हमारी सुरक्षा को लेकर मीटींग करने का ढोंग करते है और सुबह होते हीं लाशों की ढेर पर खड़े होकर चुनावी सभाओं के शोर में विभोर हो जाते है.

इन सबके बीच सोशल मीडिया पर मदद करने वालों की सूची में दो-तीन नाम बहुत तेजी से निकल कर आ रहैं हैं. जिनका नाम क्रमशः श्रीनिवास बी वी, दिलीप पांडेय और शलभमणि त्रिपाठी है. ये तीनों ब्यक्ति राजनैतिक पृष्ठभूमि वाले है. जहां श्रीनिवास भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के  राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, दिलीप पांडेय दिल्ली से आप पार्टी के विधायक हैं और सशलभमणि त्रिपाठी जी पत्रकार से बीजेपी के कार्यकर्ता बनें हुए हैं. आज इस महामारी के दौर में ये तीनों ब्यक्ति किसी भी पीङित की सहायता करने में सबसे आगे हैं. सोशल मीडिया पर मात्र एक संदेश से ये सेवा के लिए दौड़ पड़ते हैं.

इन सबमें श्रीनिवास बहुत आगे हैं. लिहाजा वो एक संगठन के प्रमुख है. तो उनकी टीम पूरे देश में है. पिछले लाकडाउन से लेकर अब तक अनवरत रूप से श्रीनिवास की टीम कोरोना मरीजों और मजबूर मजदूरों की मदद कर रहें हैं. ट्विटर तमाम ऐसे संदेशों से भरा पड़ा है. जिनके लिए भारतीय युवा कांग्रेस की टीम ने आपातकालीन स्थिति में उपयोग होने वाली जीवनरक्षक दवाइयों से लेकर आक्सीजन, प्लाज्मा डोनर और खाने-पीने का बेहतर प्रबंध किया. श्रीनिवास जी के इस भाव को देकर आज हर परेशान आदमी की पहली आशा बी वी की टीम होती है. इन्हीं सब कामों के बदौलत आज श्रीनिवास जी दक्षिण के राज्य कर्नाटक से होते हुए भी पूरे देश में अपनी पहचान बना चुके हैं और देश की राजनीति का एक जाना पहचाना नाम बन चुके है. आज का समाज उनके किये गए कार्यों का ऋणी रहेगा.

जो काम सरकार में बैठे लोगों को करना था. वो काम मात्र कुछ लोग विपक्ष एवं एकाध सत्ता पक्ष के लोग कर रहें हैं. इस संकट की घड़ी मन प्रधानमंत्री प्रचारमंत्री बने हुए हैं और गृहमंत्री उनके रणनीतिकार बनकर बंगाल में कोरोना को दावत दे रहें हैं. जब पार्टी के नेता बन प्रधानमंत्री प्रचार करने में ब्यस्त हैं तो ऐसे में मंत्रालय उनके कनिष्ठ सहयोगी भला  कैसे पीछे रहने वाले थे ? वे लोग भी कोरोना पर विजय हासिल के करने के बजाय ममता बनर्जी पर विजय हासिल करने के लिए चुनाव में दिन-रात एक किये हुए हैं. लेकिन श्रीनिवास बी वी आपको आपकी मदद के लिए हमेशा याद किया जाएगा और आपको इतिहास हमेशा एक योद्धा के रूप में याद करेगा. 

Monday, April 5, 2021

सरकार बताये क्या चुनावी राज्यों से कोरोना ने छुट्टी ले रखी है

एक साल बीत जाने के बाद मार्च महीने के अंतिम सप्ताह से कोरोना का कहर विगत वर्ष से भी तेजी से बढ़ रहा है. उसके रोकथाम के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के पास कोई ठोस रणनीति अब बची नहीं है. दिसंबर महीने के बाद जिस तरिके से कोरोना के मामलों में कमी देखी गयी और दो देश में विकसित दवाइयां बाजार में आई. उससे जनता में सन्देश में गया कि कोरोना अब ख़त्म होने के कगार पर पहुँच चुका है. जिसके बाद कोरोना संबंधी नियमों को लेकर केंद्र तथा राज्य स्तर पर ढिलाई देखी गयी. पब, माल, रेस्त्रा, सिनेमाघर, पार्क को खोल दिया गया. इन्हें खोलने से अर्थब्यवस्था सुधरी जरूर लेकिन कोरोना ने एक बार फिर बहुत प्रभावी तरिके से वापस लौट आया है. 

जनवरी के बाद जब कोरोना लगभग निष्प्रभावी रूप में जी रहा था. उस वक्त बड़बोले नेताओं ने और स्वयं मोदी जी, शाह जी, नड्डा जी सार्वजनिक रैलियों में मोदी जी की सफल निर्णय से जोड़ते नहीं थकते थे. लेकिन जब कोरोना आज फिर से भयंकर रूप धारण कर लिया है तो ये सब नेता दृश्य से गायब हो चुके हैं. अब भी तो इनको आगे आकर जिम्मेदारी लेनी चाहिए। जब हम मानेंगे कि वाकई इन्हीं लोगों के नेतृत्व का करिश्मा था. जबकि मैं शुरू से कहता आया हूँ कि वो सफलता देश के समस्त नागरिकों, राज्य सरकारों समेत केंद्र सरकार की थी और आज की विफलता भी इन्हीं सबकी है. क्योंकि हम सब शिथिल पड़ गए और अपनी जिम्मेदारियों से भागने लगे.

एक बात मेरे समझ में आज तक नहीं आई कि बंगाल, केरल, पुड्डुचेरी, असम और तमिलनाडू जैसे राज्यों में कोरोना क्यों नहीं बढ़ रहा है ? क्या चुनावी राज्यों से कोरोना ने छुट्टी ले रखी है ? सभी पार्टियां बहुत बड़ी-बड़ी जनसभाएं कर रहीं हैं. न वहां सामाजिक दूरी का पालन हो रहा है. न वहाँ मास्क का ख्याल रखा जा रहा है. मतलब समझ नहीं आता कि देश में चल क्या रहा है ? इसके लिए देश की सभी पार्टिया दोषी हैं. जिस कोरोना की वजह से 542 सांसदों के बैठने वाला संसद भवन अल्पावधि में समाप्त कर दिया जाता हो. कई राज्य की विधान सभाओं की बैठक को स्थगित कर दिया जाता है. वहाँ चुनाव में हजारों, लाखों लोगों की भीड़ के साथ रोड शोज और जनता रैली की जा रही हैं. यह हास्यास्पद है. यही लापरवाही की सबसे बड़ी मिसाल है. क्या ये नेता हम नागरिकों को बेवकूफ समझते हैं या हम नागरिक इन नेताओं को अपना सबसे बड़ा रहनुमा ? कोरोना को निष्प्रभावी करने का एक मात्र उपाय ज्यादा से ज्यादा लोगों तक मेडिकल सेवाएं जा सके.