आज बात होगी एक ऐसे एक्ट की जो समाज को दो हिस्सों में बाटने के कगार पर पहुंचादिया है और उसका नाम SC/ST एक्ट है वैसे तो यह एक्ट दशकों से सरकारों द्वारा कार्य मेंलाया जा रहा था इसमें कानून में अनुसन्धान करते वक्त कुछ विसंगतियां भी निकल करसामने आयी थी जिसका बहुत से मामलों में पीड़ित पक्ष (प्राथमिकी में दर्ज नाम) कोसामाजिक और आर्थिक तौर पर बहुत ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है जिसकी भरपाईकरने के लिए उसकी पूरी जिंदगी भी कम पड़ जाती है,तथाकथित आरोपी जब किसीमामलों में निर्दोष पाया जाता है तो उसके सम्मान को जो ठेस पहुँचती है तो उससे उसकीअलौकिक तौर पर मृत्यु हो जाती है.आज इसी मुद्दे पर देश के 80% लोगों की तरफ सेभारत बंद बुलाया गया है जिसका देश के अनेक हिस्सों में बहुत ज्यादा असर देखने को भीमिल रहा.
जो आज इनता बड़ा हंगामा बरपा है उसमें घी डालने का काम सरकार और राजनैतिकपार्टियों ने किया,जब देश की सर्वोच्च अदालत ने अपना एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनायाकि SC/ST एक्ट में प्राथमिकी दर्ज होने के साथ गिरफ्तारी का अधिकार नहीं होगा बल्किकोर्ट के आदेश में मात्र इतना बदलाव किया गया कि जिस किसी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गयी है उसकी पूरी तरह से जांच-
पड़ताल कर आरोप को सही पाए जाने कि स्तिथिमें शोषण कर्ता की गिरफ्तारी होगी और पुराने कानून के तहत उसको दण्डित कियाजायेगा,परन्तु सरकार ने कुछ दलित संगठनों और राजनैतिक पार्टियों के दबाव में सर्वोच्चन्यायलय के इस फैसले को बदलते हुए पुराने कानून को बहाल किया जिससे समाज केबहुतायत लोगों में एक तरह से असुरक्षा की भावना पैदा कर दिया है.
पड़ताल कर आरोप को सही पाए जाने कि स्तिथिमें शोषण कर्ता की गिरफ्तारी होगी और पुराने कानून के तहत उसको दण्डित कियाजायेगा,परन्तु सरकार ने कुछ दलित संगठनों और राजनैतिक पार्टियों के दबाव में सर्वोच्चन्यायलय के इस फैसले को बदलते हुए पुराने कानून को बहाल किया जिससे समाज केबहुतायत लोगों में एक तरह से असुरक्षा की भावना पैदा कर दिया है.
पुराने कानून के मुताबिक SC/ST वर्ग का कोई ब्यक्ति किसी के खिलाफ दुर्भावना सेप्रेरित होकर कोई प्राथमिकी दर्ज करता है चाहे वो झूठी ही क्यों न हो तो बिना किसीअनुसन्धान के जिसके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गयी है उसकी अविलम्ब गिरफ़्तारीहोगी और बाद में अनुसन्धान करते समय ये बात सामने आती है कि बहुत से ज्यादामामलों में गलत या झूठे आरोप लगाए गए थे.झूठे आरोपों से दोषमुक्त हुआ ब्यक्ति अपनाआर्थिक और सामजिक नुकसान गिरफ्तारी के साथ ही कर चुका होता है.
देश के
कोने-कोने में जो देखने को मिल रहा है वो सरकार के बहुतायत लोगों के खिलाफ लाये गए
कानून या कहें तो सुप्रीम कोर्ट के कानून को रद्द करने का परिणाम है,यही हमारा देश
है जहां वोट के लिए देश कि सर्वोच्च अदालत के फैसलों को भी रद्द कर दिया जाता हैजो
की कोर्ट का निर्णय हर वर्ग के लिए न्याय संगत था.
जय हिन्द
जय त्रिलोचन महादेव
Ye to glt baat hai
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