आज दिल्ली हाई कोर्ट ने 1984 के सिख दंगों के आरोप सुनाते हुए कांग्रेस के पूर्व और बड़े नेता रहें सज्जन कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और ये खबर ठीक उस वक्त आयी जब राजस्थान के मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ लेने के लिए लगभग तैयार थे उसी समय ये खबर ब्रेक हुई और माननीय न्यायालय ने सज्जन कुमार को पूर्व की सरकारों पर आरोप से बचने का आरोप भी लगाया. जैसे हीं ये खबर मीडिया में आयी तो कांग्रेसी मुख्यमंत्री के शपथ की चर्चा कम और सज्जन कुमार के चर्चे ज्यादा जोर पकड़ लिए और कांग्रेस का ये ख़ुशी का पल सज्जन कुमार के फैसले के आगे फीका पड़ गया.
2013 में इन्हीं आरोपों में निचली अदालत ने सज्जन कुमार को सभी आरोपों से मुक्त करते हुए बरी कर दिया था और तीन लोगों को सजा सुनाई थी पर अब माननीय हाई कोर्ट ने इन्हे भी आरोपियों के श्रेणी में सूचीबद्ध कर दिया है और 31 दिसम्बर तक अदालत में सरेंडर करने का वक्त भी मुकर्रर कर दिया है. सज्जन कुमार को ऊपरी अदालत में यानि सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का मौका है जो निश्चित तौर पर वो सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। ये फैसला आते हीं राजनीति एक बार फिर उफान पर आ गयी है जो मंत्री कभी राफेल की कीमत पर मीडिया वार्ता करने की हिम्मत नहीं जूता पाते हैं वो आज कांग्रेस से जबाब मांग रहे थे और कांग्रेस एक्सपोज़ हो गयी कुछ ऐसा बयान दे रहे थे और मध्य-प्रदेश में मुख्यमंत्री की के पद और गोपनीयता की तैयारी में लगे कमलनाथ को भी घसीट लिया गया है.
कमलनाथ को आरोपी कहने वाले नेताओं के बारे में जब कांग्रेस के बड़े नेताओं ने मीडिया से कहा कि अगर कमलनाथ दोषी है तो मोदी भी दोषी है अब देखो सज्जन कुमार से शुरू होकर कमलनाथ फिर मोदी तक को ये मुद्दा छूने लगा तो अब आप समझ हीं गए होंगे राजनितिक पार्टियों के विवेक के बारे में वो कैसे बराबरी पर लेकर तौलती है. बहरहाल हम दो कदम और आगे जाकर समझने की कोशिश करते हैं और राजनीति में पड़ने वाले इसके प्रभाव के बारे में समझते है अभी फैसला आने के बाद तात्कालिक असर ये हुआ कि जो आम आदमी पार्टी के सांसद कमलनाथ के आज होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में जाने वाले थे उनकी पार्टी ने रोक दिया और वो अभ भोपाल नहीं जा रहें है, ठीक इसी तरह अकाली दल और सत्ता पक्ष इस मुद्दे पर कड़ा रूख अख्तियार कर के बहुत हीं कटु और वाजिब सवाल उठा रहा है. बहरहाल आज सज्जन कुमार की वो हैसियत नहीं है कि वो कांग्रेस के किसी चुनावी नतीजे प्रभवित कर सकें सिवाय राजनितिक मुद्दे के और कुछ ज्यादा नहीं है इस फैसले में और न हीं राजनितिक तौर पर बहुत बड़ी परेशानी देखने को मिलेगी.
mila jula din rha hai
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