Wednesday, February 27, 2019

कल भारत की एयर स्ट्राइक, आज युद्ध जैसा माहौल

भारत के कल के एयर स्ट्राइक के बाद जैसा की हर देशवासी को पता था कि माहौल कुछ खराब हो सकता है उसका अंदेशा हम देशवासियों को पहले से था. उसका परिणाम आज सुबह को देखने को मिला जब 10 बजे के बाद पाकिस्तान की एयर फ़ोर्स ने 7 से 8 की संख्या में भारतीय सीमा के अंदर प्रवेश किया और खाली स्थानों पर बम बरसाया। ज्यादा हताहत की तो खबर नहीं है परन्तु एक जो सबसे बुरी खबर देश के लिए आयी वो ये थी कि हमारा एक Mig-21 विमान पाकिस्तान के हवाई हमले में क्रैश हो गया और उसके विंग कमांडर अभिनंदन किसी तरह पाकिस्तानी जमीन पर जा पहुंचे और उन्हें पाकिस्तान ने युद्ध बंदी बना लिया है. इसकी औपचारिक सूचना विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रविश कुमार ने बताया के "हमने दुश्मन के एक F-16 लड़ाकू जहाज को हमारे सुखोई जहाज ने मार गिराया और हमारा एक पायलट मिसिंग है". लेकिन अभी तक पकिस्तान केवल मीडिया के माध्यम से हमारे पायलट को पकड़ने का दावा तो कर रहा है पर औपचारिक तरिके से भारत को कुछ नहीं बताया है. जिनेवा कन्वेंशन के मुताबिक़ अगर युद्ध बंदी की तरह ब्यवहार करते हुए भारत को आधिकारिक तौर से बताना चाहिए और जेनेवा कन्वेंशन के सारे नियमों का पालन पकिस्तान को करना चाहिए.
सरहद पर माहौल अब बहुत तनावपूर्ण हो गया है कुछ वक्त पहले तक हमारे देश में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तराखंड और आस-पास के हवाई अड्डों को जनता की सेवा के लिए रोक दिया था जो अब पुनः शुरू हो चुका है. लेकिन अब माहौल हाथ से बाहर निकलता जा रहा है. हमारे वायु सेना के वीर विंग कमांडर अभिनन्दन दुश्मनों के कब्जे में है, आपके जज्बे को देश सलाम करता हूँ. हर देश वासी आपको अपने देश में वापस सुरक्षित लाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. हमें आप पर गर्व है और इस दुःख की घड़ी में पूरा देश आपके और आपके परिवार के साथ खड़ा है. पाकिस्तान को ये समझ लेना चाहिए कि अगर अब वो दुस्साहस करता है तो उसे अपने तीसरे टुकड़े के लिए तैयार रहना चाहिए.

Tuesday, February 26, 2019

पुलवामा का बदला वायुसेना के नाम

आज सुबह-सुबह रोज की भाँति मैं और मेरे जैसे करोड़ो लोग नहा कर, नाश्ता कर के अपने-अपने दैनिक क्रिया-कलापों में ब्यस्त होने के आखिरी पड़ाव पर थे जभी देश के कानों में एक सुखद खबर टी वी और अन्य सोशल तरिकों से आयी कि हमारे नभ रक्षक रणबांकुरों ने पकिस्तान के 88 किलोमीटर के अंदर घुस कर जैह-ए-मोहम्मद के ठिकानों ठिकानों पर 12 मिराज-2000 विमानों के साथ लगभग 1000 किलोग्राम बम-बारूद पकिस्तान की धरती पर गिराया. यह मिराज लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना के बेड़े में सन 1985 में शामिल हुआ था जो कारगिल युद्ध में भी बहुत शानदार कार्य क्षमता का परिचय दिया था. ये खबर मेरे बहुत हीं अच्छे मित्र और छोटे भाई कमलेश ने ट्विटर पर देख कर बताई उस वक्त मैं नहाने जा रहा था और जैसे हीं मैं नहा कर आया तब तक यह खबर आग की तरह चारों तरफ फ़ैल चुका था. यह खबर देखते हीं मानों ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा. दिल बहुत प्रसन्न था कि अब भेड़ियों को पता चलेगा कि जब कोई शेर शिकार करता है तो उसकी चोट कितनी गहरी होती है. 14 तारीख को हमारे निरीह और निहत्थे जवानों पर इन्हीं पापियों ने जब गोलियां बरसाईं थी तो पूरा देश रो पड़ा था और आज तक रो रहा है. हमारे हिन्दू धर्म के अनुसार मृत्यु के पश्चात 13 वें दिन मृतक आत्मा की शांति के लिए हवन-पूजन किया जाता है और इत्तेफाकन आज हमारे शेरों की तेरहवीं है.

अब इन पापियों को दर्द का अहसास होना चाहिए अगर नहीं होता है तो ये मान लेना चाहिए कि इन्हें विश्व के नक्शे से उजाड़ने में हीं मानव समाज और विश्व समुदाय की भलाई है. आज भारत के पराक्रम की गाथा फिर से सुनने को मिली है इससे पहले जो आज के चीफ ऑफ़ एयर मार्शल श्री धनोवा जी है वो कारगिल युद्ध के दौरान एक पायलट थे और इसी मिराज विमान से अत्यंत दुर्गम पहाड़ियों पर खुद बमबारी की थी. जिन लोगों ने जब नहीं देखा और जाना था वो अब जान ले और देख लें. इस एयर स्ट्राइक में जो कि बालाघाट पकिस्तान में है उसमें भारतीय वायुसेना की इस कार्रवाई में दुर्दांत आतंकी मसूद अजहर के दो आतंकी भाई और मसूद अजहर का एक आतंकी साला भी बलि चढ़ा और इनके साथ-साथ भारतीय शेरों ने कई और आतंकियों को जन्नत की सैर करवा दी है. कहा जाता है कि बालाकोट में हीं आईएसआई और जैश सारी आतंकी गतिविधियों को यहीं से प्रसारित करता है जिसे आज हमारे वायुसेना के जवानों ने नेश्ता-नाबूत कर दिया. इसे कहते हैं वीरता और वीरता पूर्ण कार्य. हे हमारे वीर सैनिकों आज आपके शौर्य के वजह से आज हर भारतीय गौरवान्वित है और आपको चिरंजीवी होने और दीर्घायु होने का आशीर्वाद दे रहा है. मेरे ख्याल से आप इस प्यार के काबिल भी है.

पाकिस्तान यह तो मान रहा है कि तड़के सुबह भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान LOC को पार किये थे पर ये मानने को कत्तई तैयार नहीं है कि हमारे जवानों ने उनके 300 आतंकी जो कि इंसानियत के दुश्मन हैं उन्हें एक हीं झटके में जन्नत की सैर पर भेज दिया है और बेचारा पाकिस्तान माने भी तो कैसे उसे भी तो अपनी अवाम को कुछ सन्देश देना होगा। पाकिस्तान बड़ा बेशर्म देश है वो नहीं समझने वाला है और बार-बार भारत से पीटता रहेगा. 

हे वीरों आपको शत-शत नमन 

Thursday, February 21, 2019

आज के वक्त देश में फर्जी राष्ट्रवाद की लहर उफान पर है

आजकल देश में एक राष्ट्रवाद की लहर बह रही है और वो भी किसी बुलबुले के समान है. जैसे बुलबुला पानी के ऊपर हीं ऊपर तैरता रहता है ठीक उसी प्रकार आज का नव निर्मित राष्ट्रवाद है जो जबान और चीख-पुकार की भाषा में दिख रही है परन्तु उस राष्ट्रवाद को दिल की गहराई में उतारने वाले बिरले लोग हीं बचे हैं. अभी पुलवामा में हमारे जवानों को शहीद हुए एक हफ्ते भी नहीं हुए हैं और देश की सारी राष्ट्रभक्ति टी वी चैनलों से होते हुए सोशल मीडिया तक सिमट कर रह गयी है और उस राष्ट्रभक्ति का स्थान राजनीति ने ले ली है.अब फिर से राजनितिक पार्टियों द्वारा एक-दूसरे के ऊपर कीचड़ उछालने का कार्य शुरू हो गया है.

परन्तु मै एक खबर पढ़ कर आज बहुत चकित हूँ कि क्या वास्तव में में भी फिल्मों से उलट चरित्र भी होता है, शायद अब मानने का वक्त भी आ गया है कि फिल्मों से उलट एक दूसरा चेहरा और चरित्र भी होता है. खबर ये थी कि जिस दिन हमारे वीर जवान पुलवामा में आतंकियों के हमले में घायल होकर (कुछ मृत को छोड़कर) अपने एक-एक सांस में अपनों से दूर जाने का नजारा देख रहे थे ठीक उसी समय उत्तराखंड के "नेशनल जिम कार्बेट" पार्क में हमारे प्रधानमंत्री महोदय डिस्कवरी (विदेशी चैनल) के लिए प्रचार-प्रसार का वीडियो शूट करवा रहे थे और चाय नाश्ते का भब्यता के साथ लुत्फ़ उठा रहे थे. अगर यह खबर सत्य है तो देश के लिए और हमारे प्रधानमंत्री के लिए शर्म की बात है. 

कांग्रेस के आरोप -

आज देश की एक बड़ी और पुरानी पार्टी  कांग्रेस के द्वारा यह सवाल प्रधानमंत्री जी और सरकार से उठाया कि -
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि यह मैं नहीं आपके पत्रकार साथी कह रहे हैं. जिन्होंने मोदी के दौरे का कार्यक्रम कवर किया है.  कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने दावे के समर्थन में अखबारों की कटिंग और कथित तस्वीरें दिखाईं. कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने जवानों की शहादत पर राष्ट्रीय शोक की घोषणा न होने पर भी मोदी सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शोक की घोषणा नहीं की. ताकि सरकारी खर्च पर होने वालीं राजनीतिक सभाएं रुक न जाएं. जब शहीदों के शव एयरपोर्ट पर थे, तब झांसी के कार्यक्रम से प्रधानमंत्री मोदी एक घंटा देरी से आए. फिर पहले अपने घर गए सीधे एयरपोर्ट नहीं. पीएम  मोदी के मंत्री शहीदों के शव के साथ सेल्फी ले रहे हैं. मोदी जी अब दक्षिण कोरिया पहुंच गए हैं सैर सपाटे के लिए.

कांग्रेस ने किए पांच सवाल -

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पीएम मोदी से पांच सवाल किए. उन्होंने कहा-पीएम अपनी, NSA, और गृह मंत्री की विफलता क्यों स्वीकार नहीं करते?  इतना RDX देश मे आया कहां से?जैश के हमले से 48 घंटे पहले के वीडियो को नज़रअंदाज कैसे कर दिया?मोदी सरकार और गृह मंत्रालय ने CRPF को हवाई मार्ग से जाने के निवेदन को खारिज क्यों किया? मोदी सरकार के 56 महीनों में 488 जवान शहीद हो गए? नोटबंदी से आतंकी हमले बंद क्यों नही हुए? 

जिस वक्त जवानों की शहादत की खबर देश के सभी छोटे-बड़े टी वी चैनलों पर चल रहा था टी वी पर दिखाया जा रहा था और सरकारी प्रवक्ता उसे झूठलाते हुए भाजपा के लोग कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री जी को पता नहीं था जो सरासर गलत हैं. पर दुःख की बात ये है कि जो हमला हमारे वीर जवानों पर हुआ वो हमारी अस्मिता पर भी हमला था पर साहेब को उन जवानों की सुध कहाँ हमारे पीएम साहेब तो उत्तराखंड के रामनगर के गेस्ट हाउस में चाय नाश्ते की चुस्कियां ले रहे थे और फिल्म की शूटिंग में ब्यस्त थे. 

Tuesday, February 19, 2019

पुलवामा में 3 दिन में 45 वीर जवान शहीद

सर्वप्रथम हमारे वीर शहीदों को कोटि-कोटि नमन 
वीर सपूतों को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि 

बीते तीन दिनों में (पुलवामा हमले के बाद और कल के दिन तक) हमारे 45 बाहदुर जवान शहीद हो चुके हैं जिसमें पुलवामा में 40 की एक पहन जैसी संख्या भी शामिल है. कल शाम पुलवामा की घटना में शामिल आतंकियों को मारने की कोशिश में भी हमारे मेजर समेत 5 जवान शहीद हुए, "जिनमें 2 जम्मू-कश्मीर के पुलिस कांस्टेबल भी थे". ये कितना दुखद है देश के एक नागरिक के लिए कि हमारे ही भाई, हमारे हीं पिता की हत्या आतंकी इतनी आसानी से कैसे करने में सफल हो जा रहें हैं ? देश में ये विभत्स तस्वीर देखकर हर तरफ रूदन का माहौल है. देश के लोग वो चाहे किसी भी अंचल के हो सभी गमगीन हैं और गुस्से से भरे पड़े हैं. हर कोई इस कायराना घटना के लिए विशुद्ध रूप से पाकिस्तान को दोषी मानते हुए जी भरकर गरिया रहे हैं. लेकिन कोई अपनी सरकार से सवाल करना मुनासिब क्यों नहीं समझ रहा है कि ऐसी घटना रोकी क्यों नहीं गयी ? 

मुझ साधारण इंसान के जेहन में भी कुछ मौजू प्रश्न उठ रहें हैं -
  • क्या आतंकियों के पास हमारे जवानों से ज्यादा अच्च्छी टेक्नोलॉजी है  ?
  • क्या उनके पास हमारे से ज्यादा अत्याधुनिक हथियार है ?
  • क्या उनका खुफिया तंत्र हमारे खुफिया तंत्र से ज्यादा मजबूत है ? 
  • क्या उनके पास हमारे जवानों की सूचना कोई गद्दार पहुंचाता है ?
मेरा जबाब हैं नहीं.

मिडिया हो या तथाकथित बुद्धजीवी लोग सरकार से कठिन सवाल पूछने से क्यों कतरा रहें है ? क्या मजबूरी है कि सब लोग सरकार के सुर में सुर मिला कर एक हीं राग में गा रहें हैं. अगर इन सब लोगों और सरकार के मुताबिक़ देश की अंदर की साड़ी ब्यवस्थाएँ चाक-चौबंद थी तो ये कायर पापी कहाँ से हमें इतना  नुकसान पहुंचाने में सफल हुए. क्यों नहीं इनको खुफिया विभाग के लोग पहले पकड़ लिए, इनके पास इतने भारी मात्रा में विस्फोटक कहाँ से आया जाहिर सी बात है कि ये पापी सीमा पार से विफोटक लेकर तो आये नहीं होंगें. तो इनको देश के अंदर कश्मीर में ये सब विस्फोटक और हथियार कौन मुहैया करवाया, इसकी भी भनक किसी को क्यों नहीं लग सकी ? जाहिर तौर पर ये सब एक दिन में नहीं हुआ होगा इसके लिए एक लम्बा वक्त लगा होगा.तो इतने दिन तक हमारी एजेंसियां कहा थी और क्या कर रही थी ? उनसे भी तो स्पष्टीकरण आना चाहिए. हमारे जवानों का खून इतना सस्ता न था इसे सस्ता बनाया है दिल्ली की मदमस्त सत्ता ने.

आज कल पुलवामा की घटना के बाद सारी देशभक्ति भाषणों, सोशल मीडिया, टी वी चैनल और राजनैतिक रैलियों में हीं नजर आ रहा है. जस दिन ये घटना घटी उसी दिन शाम 4 बजे कांग्रेस की नवनियुक्त महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी की पहली औपचारिक पत्रकार वार्ता थी जिसे उन्होंने सैनिकों के गम के साथ जोड़ते हुए रद्द कर दिया था दूसरी और अपने आप देश की एकमात्र राष्ट्रवादी पार्टी होने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी / आरएसएस के लोग अपनी देशभक्ति का सुबूत रैलियों के माध्यम से हीं दे रहें हैं. शर्म की बात ये है कि जिस दिन पुलवामा में इतना बड़ा आतंकी हमला हुआ उस दिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह 5 बजे, योगी आदित्य नाथ 6 बजे रैली करके और भाजपा सांसद मनोज तिवारी रात प्रयाग में नाच-गाकर अपने सर्वश्रेष्ठ देशभक्ति का प्रदर्शन कर रहे थे (वैसे 1947 से पहले इनके राजनितिक पूर्वज भी यही किया करते थे). हद तो तब हो गयी जिस दिन शहीदों की जनसख्या 40 तक पहुंचने की खबर अहले सुबह देशवासियों को मिली और पूरा देश वीर शहीदों की याद में गमगीन था उसी समय दिन के लगभग 10 बजे हमारे देश के प्रधानमंत्री जी उर्फ़ चौकीदार साहेब (परिधान मंत्री) झाँसी में "बंदे मातरम ट्रेन" को झंडी दिखाकर उदघाटन करने के मूड में थे और उसी समय झाँसी की रैली में जनता को सम्बोधित करते हुए कहा था कि पकिस्तान को इसकी कड़ी कीमत चुकानी होगी जो साहेब भरपूर रैलियों के माध्यम से चुका भी रहें हैं. ये सिलसिला अगले दिन भी जारी रहा और चौकीदार महोदय ने नागपुर में रैली को सम्बोधित किया और पाकिस्तान को करारा जबाब देने की बात दोहराई.

उन 40 वीरों की चिता की आग अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि कल 18 फरवरी को आतंकी हमारे मेजर समेत 5 को फिर शहीद कर दिया। और अपने आप को राष्ट्र और सेना को सर्वोपरि बताने वाली पार्टी बीजेपी महाराष्ट्र में शिव सेना से गठबंधन का ऐलान कर रही थी. इनको रत्ती भर भी अपने जवानो को लेकर शर्म नहीं आयी. अब आप देशवासी हीं ये तय करे कि सच्चा राष्ट्र भक्त कौन है और झूठा भक्त कौन है. यह वक्त शहीद जवानों के परिवार वालों के साथ खड़े होने का है और ठहर कर सोचने का है कि हम कैसे अपने समाज में इस तरह के विष को फैलने से रोके. इसकी जिम्मेदारी कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हर भारतीय की है.  

हे वीर जवानों एक बार फिर आपको शत-शत नमन


Friday, February 15, 2019

देश के सीने पर आतंकी हमला, 37 जवान शहीद

कल का दिन हमारे देश के लिए और हम देशवासियों के काला दिन साबित हुआ. कल दोपहर 3.27 के आस-पास जम्मू के पुलवामा से एक बहुत ही दुःखद खबर सुनने और टीवी पर देखने पर मिली. CRPF के 54 वीं बटालियन के जवानों पर जम्मू के स्थानीय आतंकी ने आईईडी के माध्यम से हमला करके हमारे 37 वीर सपूतों को शहीद कर दिया और लगभग इतने हीं जवानों के घायल होने की खबर है. ये खबर सुनते हीं मानो कलेजा कट कर बाहर आ गया हो, हमे ऐसा प्रतीत हो रहा था. धमाके का असर इतना था कि हमारे जवानों के शव के चीथड़े उड़ गए , बसों के परखचे उड़ गए. कल ये दृश्य देखकर आँख से खून टपकने लगा. जिस माँ की गोद सुनी हो गयी, जिस औरत का सुहाग उजड़ गया , जिस बहन का भाई कल हमेशा के लिए उससे दूर हो गया. उनका क्या हाल होगा मुझे तो ये सोचने मात्र से हीं घबराहट हो रही है. कल जैसे-जैसे शाम गहराती गयी वैसे-वैसे शहीद जवानों की संख्या में इजाफा होता गया और ये संख्या इतनी बड़ी हो गयी कि शाम ऑफिस से घर पहुंचते-पहुंचते 37 की नजर आने लगी. भारत में इतना बड़ा आतंकी घटना मेरे होश में कभी नहीं हुआ था.
सरकार एक तरफ कहती है कि हमारे देश में 2014 के बाद कोई आतंकी हमला नहीं हुआ है. ये सरासर गलत है इस सरकार के आने के बाद 17 बड़े हमले शामिल हैं जिनमें उरी और कल हुआ पुलवामा आतंकी हमला भी शामिल है. कल जो हमला हुआ है वो तालिबानी शैली में किया गया है. ऐसे सुसाइड बॉम्बर तालिबान में ऐसी बड़ी और घिनौनी घटना को मानव बम की तरह पुलवामा की शैली में करते रहें हैं. हमारे देश में इस तरह की आतंकियों की घटना का शुरुआत होना हमारे देश के सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता की बात है. पर आज हम सारे देश वासी अपनी सेना और अपने सरकार के साथ खड़े हैं.   
फिल्म बनाने और उसका श्रेय लेते-लेते 37 और जवानों की बलि चढ़ा दी गयी. सरकार इतनी सुप्त अवस्था में क्यों चली गयी कि आतंकियों के हौसले इतने बुलंद हो गए कि वो सीधा जवानों के काफिले पर हमला कर देते हैं. अगर सरकार सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय लेती है तो कल की असफलता का भी श्रेय लेना चाहिए न की श्रेय लेने से भागना चाहिए। ऐसी हीं वीभत्स घटना मुझे याद है 2012 के आस-पास सुकमा में उग्रवादियों ने किया था जो कुछ इसी तरह का हमला करके इतना हीं नुकसान हमारी सेना को पहुंचाया था. मेरी नजर में उग्रवाद और आतंकवाद दोनों को एक तरह की हीं सजा मिलनी चाहिए और निश्चित तौर पर वो सजा मौत होनी चाहिए.
आज मैं सुबह से हीं देख रहा हूँ कि देश के समस्त नागरिक और राजनितिक पार्टियां हमारे वीर जवानों के साथ है और सब एक सुर में कायरों के खिलाफ कार्र्यवाही करने की बात को बार-बार दोहरा रहें हैं. इस घटना के बाद देश अपार गुस्से में उबल रहा है. मै सोशल मीडिया से लेकर साधारण लोगों की बातों में भी ऐसे कुकृत्य करने वालों के खिलाफ एक तरह का भयानक गुस्सा देखने और सुनने को मिल रहा है. देश का हर नागरिक इस कायरानी हरकत के लिए पड़ोसी मुल्क को जिम्मेदार मान रहें हैं जो वास्तविक सत्य है. देशवासी अपना गुबार अपने शब्दों के माध्यम से संभावित स्थान पर निकाल रहें हैं.
देश के समस्त नेताओं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जी , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी , पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह , अमित शाह , ममता बनर्जी , मायावती , अखिलेश यादव , कमलनाथ , शिवराज सिंह चौहान , फारूख अब्दुल्ला , उमर अब्दुल्ला , महबूबा मुफ़्ती ........ जैसे समस्त नेताओं ने एक सुर में इस कायराने हमले की निंदा की.
मैं एक नागरिक की हैसियत से अपने वीरों के प्रति अपनी संवेदना जाहिर करते हुए उन्हें नमन करता हूँ और परम् पिता परमेश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वो शहीद परिवारी जन को दुःख के इस बेला में दुःख सहने की असीमित क्षमता प्रदान करें. इस दुःख की घड़ी में पूरा देश आपके साथ है.

जय जवान  
     
हे माँ भारती के लाल 
तुम्हें कोटि-कोटि प्रणाम  
वीरो मैं आज निःशब्द हूँ 
खुद में विरक्त हूँ 
आप तो खुद हीं देव हो 
मैं किसकी करूँ वंदना 
नापाक कायर गद्दार है वो 
गीदड़ की औलाद है वो 
अब महाकाल प्रलय होगा 
शत्रु रक्त से भोजन होगा 

"गिरि"

Thursday, February 14, 2019

पुलवामा में अर्धसैनिक बलों के 37 जवान शहीद, प्रियंका गाँधी की पत्रकार वार्ता रद्द

जब से प्रियंका जी महासचिव बनी है और उन्हें ने उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल का प्रभार भी उन्हें दे दिया गया है. उसके बाद से हीं प्रियंका गांधी का कार्यकर्ताओं के साथ मैराथन बैठकों दौर जारी है जो आज लगातार तीसरे दिन भी जारी है. कल की बैठकों की अगर बात की जाए तो इलाहाबाद, राय बरेली, अमेठी, फूलपुर, इत्यादि लोकसभा क्षेत्र के लोगों से पूरी रात और सुबह लगभग 5 बजे तक चर्चा करती रही. चर्चा करकर जब नेता बाहर आ रहे थे तो प्रियंका गाँधी को अनेकों उपमाओं की संज्ञा दे रहे थे और चित्त प्रसन्न मन से उनकी तारी कर रहे थे. मिलकर आने वाले कार्यकर्ताओं ने कहा कि दीदी संगठन के बारे में एक-एक ब्यक्ति से पूछ रही है कि आपकी ब्लॉक कमेटी कैसी है, गाँव की कमेटियां कैसी है, जिला एवं शहर की कमेटी कैसी है. कार्यकर्ता इतने खुश है कि प्रियंका को इंदिरा का अवतार और देवी तक की उपमा देने तक से परहेज नहीं रख रहें है.           
आज प्रियंका गांधी का महासचिव बनने के बाद पहली पत्रकारवार्ता है. जिसको लेकर पत्रकारों के मन में बहुत हीं प्रफुल्लित है. क्योंकि अमेठी, रायबरेली के बाहर पहली बार प्रियंका जी का राजनितिक चेहरा जनता को दिखेगा और पूरे देश को उनके आधिकारिक रूप से सम्बोधन का इन्तजार है. जाहिर तौर पर प्रियंका को लेकर देश के लोगों में एक एक ख़ास तरह का असर है. जनता से जुड़ने का कौशल उनका ऐसा है कि लोग बरबस हीं प्रियंका की बात करते-करते इंदिरा जी की यादों में खो जाता है. जाहिर तौर इस पत्रकारवार्ता में प्रियंका गाँधी से बहुत से सवाल होंगे, उन सवालों का जबाब वो कैसे देती हैं ये देखने वाली बात है. 
प्रियंका से होने वाले कुछ संभावित सवाल -
  • राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार चुनाव से पहले घोषित होंगे 
  • उनके चुनाव लड़ने पर भी सवाल होंगे  
  • रावर्ट वाड्रा के कथित आरोपों पर सवाल होगा 
  • कांग्रेस का रोड मैप क्या होगा इस पर सवाल होगा 
  • कांग्रेस किस पार्टी से गठबंधन करेगी या नहीं करेगी 
यह लेख लिखते समय एक बहुत हीं हृदय विदारक घटना कश्मीर से सामने आयी है जहां आतंकियों के IED हमले में हमारे 18 जवान (CRPF) शहीद हो गए है और 35 जवानों के घायल होने की खबर आ रही है (PTI). सम्भवतः उरी हमले के बाद पहला इतना बड़ा आतंकी घटना हुआ. जवानों के शव क्षत-विक्षत हो गए. टीवी पर देखा भी नहीं जा रहे. शहीद जवान 54 वीं बटालियन के थे. इस मूवमेंट में 3 बटालियन थी जिसमे लगभग 2400 जवान थे. 

स्रोत : आज तक  
समय : 3.37 PM

अब आगे लिखने के लिए दिल गवाही नहीं दे रहा है और मैं अब अपनी लेखनी को अपने शहीदों को समर्पित करते हुए रोक रहा हूँ. हृदय बहुत दुखी है काश ! ये आतंकी निर्दोषों को ऐसे न मारते.

जय जवान 
जय हिन्द    

Tuesday, February 12, 2019

तीन दशक बाद कांग्रेस का ऐतिहासिक रोड शो

कल प्रियंका गांधी की रैली में जुटी भीड़ को देखकर कांग्रेसी समर्थक बहुत खुश हुए होंगे। क्योंकि कल जो भीड़ उमड़ी थी वो कांग्रेस की सोच से कहीं ज्यादा थी. हर तरफ बस प्रियंका के हीं चर्चे थे. सारा शहर प्रियंका के फोटो और पोस्टरों से सना पड़ा था. हर तरफ उत्साह और उल्लास का माहौल था. मेरे ख्याल से कांग्रेस के लिए यह ऐतिहासिक लम्हा था, मैं ऐतिहासिक इस लिए कह रहा हूँ कि तीन दशक तक कांग्रेस ने कभी ऐसा दर्शन लखनऊ की सड़कों पर नहीं कराया। जाहिर तौर पर विपक्षी पार्टिया इस रैली को देखकर मन हीं मन अपनी पार्टी के लिए दूसरी रणनिति बनाने के काम में निश्चित रूप से लग गयी होंगी। यह भब्य रोड शो अमौसी एयरपोर्ट से शुरू होकर लखनऊ कांग्रेस मुख्यालय नेहरू भवन तक थी. जिसमें जनता का अपार हुजूम उमड़ा पड़ा था.  

प्रियंका जी का ऐसा अद्भुत राजनितिक रूप निखर कर सामने आया कि लखनऊ की सड़कों पर सुबह से ही जनता उनके के लिए लम्बी-लम्बी कतारों में कतारबद्ध हो कर घंटों का इन्तजार किया। इसमें बहुत से नवजवान युवक-युवतियां थी जिन पर प्रियंका की दीवानगी हावी थी और वो अपना स्कूल, घर का कार्य छोड़कर प्रियंका जी इन्तजार करती दिखी। प्रियंका जी की पूरी रैली को मैं टेलीविजन के माध्यम से देखा तो उनका ब्यक्तित्व बहुत हीं आकर्षण समेटे हुए था. वो अपनी रैली के दौरान कार्यकर्ताओं की आँखों में आँखें डालकर सांकेतिक रूप से उनसे जुड़ने की गवाही दे रही थी. कार्यकर्ता भी उन्हें निराश न करते हुए ढोल की थाप पर नाचते-गाते, पुष्पों की वर्षा करते हुए प्रियंका जी स्वागत एवं अभिनंदन कर रहे थे. आस-पास के घरों और दुकानों की छतों पर लोग खड़े होकर प्रियंका जी को निहारने के लिए लालायित थे. 

लखनऊ से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबारों की झलकियां -




क्या अंग्रेजी क्या हिंदी देश के सभी बड़े और प्रमुख अखबारों में पूरे-पूरे पृष्ठ पर बस राहुल और प्रियंका की रैली के ही चर्चे थे. ऐसे वाकई प्रियंका गांधी का कांग्रेस पार्टी में सक्रीय रूप से काम करने के बाद उनकी पार्टी को बहुत ज्यादा फायदा होने वाला है. मैं देश के बड़े राजनितिक समीक्षकों को इस रैली की समीक्षा और आगामी लोकसभा चुनाव में इसके होने वाले असर के कारकों को पूरे दिन चर्चा करते हुए देखा और लगभग सभी एक बात पर सहमत थे कि प्रियंका गांधी का लोकसभा चुनाव पर ब्यापक असर पड़ेगा. प्रियंका गांधी के आधिकारिक तौर पर प्रवेश के बाद भाजपा के नेताओं ने अपनी भाषा की सारी मर्यादा तोड़ते हुए अनेकों बार अभद्र टिप्पणी की. उन नेताओं में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक के नेताओं का नाम शुमार है. मेरे ख्याल से शब्द हीं काफी है किसी के संस्कार का वास्तविक चित्रण करने के लिए. प्रियंका गांधी के नाम मात्र से हीं भक्त ऐसे हैरान परेशान हो रहें हैं जैसे सांड़ को लाल कपड़ा दिखा दिया गया हो. भक्त अपने शब्दों के माध्यम से अपने संघी संस्कार का परिचय दे रहें हैं. क्योंकि संघ हीं देश का एकमात्र संगठन है जो औरत को विलासिता की वस्तु मानता है. भक्त ये बखूबी जान लें ये वो खून हैं जो गोरों से भी नहीं डरा था तो सावरकर के चोरों से कैसे डरेगा.

प्रियंका के आने से कांग्रेस की फण्ड की समस्या भी काफी हद तक कम हो जायेगी। इसी संदर्भ में अमेरिका की एक प्रतिष्ठित ‘फॉरेन पॉलिसी' नामक  पत्रिका ने अपने लेख में लिखा है कि 'कांग्रेस पार्टी की नई प्रचारक भले ही वास्तव में चुनाव नहीं लड़ें, लेकिन वह ऐसे देश में पार्टी के वित्तपोषण संबंधी अंतर को कम कर सकती हैं जहां चुनाव जीतने के लिए बहुत धन की आवश्यकता होती है'. तो आज प्रियंका गांधी की खबर विश्व जगत में भी बन रही है जो कांग्रेस के लिए कही ज्यादा लाभप्रद है बनस्पति प्रियंका के. प्रियंका गाँधी के आने का एक सबसे बड़ा असर ये हुआ है कि उन्होंने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को घर से निकालकर जमीन पर ला दिया है. आने वाले दिनों में इसका क्या असर होता है वो समीक्षा के लिए खुला हुआ है और समीक्षा होनी भी चाहिए। 

Saturday, February 9, 2019

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर शिमला समझौते को लेकर मोदी का झूठ

राष्ट्रपति के अभिभाषण प्रस्ताव पर प्रधान मंत्री मोदी जी भाषण देते हुए शिमला समझौते का खामखा जिक्र कर बैठे और यह समझौता बेनजीर भुट्टो और श्रीमती इंदिरा गाँधी के साथ कराने की ऐतिहासिक भूल या कहें तो झूठ बोल बैठे। चलो शुक्र हैं कि हमारे विद्वान् प्रधानमंत्री ने शिमला समझौता इंदिरा और बेनजीर भुट्टो के बीच हीं कराया वरना उन्हें याद होता तो शिमला समझौता स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू और बेनजीर भुट्टो के बीच भी करा देते। लेकिन इस बात की तरफ भक्त मीडिया और भगवान शाह का ध्यान नहीं पहुंच पाया था. अगर ऐसे हीं जबान गलती से राहुल गाँधी की फिसल जाती तो देश में अब तक एक राष्ट्रीय समस्या खड़ी हो जाती। सारी गोदी मीडिया अब तक अनगिनत शो कर चुकी होती। बहरहाल वो तो मोदी है हीं झूठ बोलने के मास्टर। जब उनके झूठ से एना नहीं बच सके तो भुट्टो कहाँ से बचेंगी ?

बहरहाल प्रधानमंत्री के झूठ भरी बातों पर मिट्टी डालते हुए हम असली वाले शिमला समझौते की बात करते है उसके नफे, नुकसान, काल-चक्र की बात करते हैं. शिमला समझौते की शुरुआत 1971 में बांग्लादेश के उदय के बाद हुआ था. और यह समझौता पकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो और भारत की एक मात्र महिला प्रधानमंत्री इंदिरा जी के साथ हुआ था. जब शिमला में ये समझौता हुआ उस समय बेनजीर भुट्टो धीरे-धीरे युवा हो रही थी और उनकी उम्र तकरीबन 20 बरस रही होगी (तो आज के भारत के प्रधानमंत्री ने यहां झूठ बोला था, है किसी मीडिया में दम जो मोदी जी को झूठा बोले). शिमला समझौते की नीव 1971 में पड़ चुकी थी जब भारत ने पश्चिमी पाकिस्तान को मुक्त कराते हुए विश्व को बांग्लादेश नामक एक नए देश के रूप में परिचित करवाया. बांग्लादेश का गठन किया जाना इंसान के किये हुए फैसलों में एक अतुलिनीय फैसला है, जिसे अपने दृढ निश्चय से इंदिरा गाँधी ने उठाया था और उसमें सफलता भी पायी थी. इसी युद्ध के दौरान भारत ने पकिस्तान के लगभग 93 हजार सैनिको को युद्ध बंदी बना लिया था या ये कहें पाकिस्तानी सैनिको ने भारत के पूर्वी कमान के आगे घुटने तक दिए थे, सरेंडर कर दिए थे. उधर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में जुल्फिकार अली भुट्टो को मुंह दिखाना भारी पड़ रहा था. उनकी हर तरफ आलोचना होने लगी थी जिसकी वजह से उन्हने सत्ता जानें का डर सताने लगा था. इधर जो पाकिस्तानी सैनिक भारतीय जेलों में बंद थे उनके हवाले से आल इण्डिया पर " हम खैरियत से हैं " नाम से एक प्रोग्राम चलाया जाता था जिसे पूरे पकिस्तान के लोग सुनते थे और उनके परिवार जनों को भी ये अहसास होता था कि उनके बच्चे पड़ोसी देश में सही से रहा रहे है और वो ये भी सोचते थे कि अगर पकिस्तान में होते जब भी साल में एक बार हीं देखने को मिलता था.

इधर जुल्फिकार अली अपने आप को शर्मिंदगी से बचाने के लिए भारत की तरफ देखना शुरू किया और नई दिल्ली को खबर भिजवाई कि वो मिलना चाहते हैं. प्रक्रिया आगे बढ़ी और इसके लिए 2 जुलाई की एक तिथि निर्धारित की गई. 2-3 जुलाई 1972 की आधी रात को यह समझौता हुआ। भारतीय प्रधानमंत्री श्रीमति  इंदिरा गांधी और पाकिस्तानी राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच 2 जुलाई की रात 10.30 बजे के करीब बातचीत शुरू हुई और देर रात 12 बजकर 40 मिनट तक चलती रही. इसी समय भारत-पाकिस्तान के बीच एक समझौते के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए गए. जिसे "शिमला समझौता नाम दिया गया."

इस समझौते के मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार हैं -

1. दोनों देशों के बीच भविष्य में जब भी बातचीत होगी कोई मध्यस्थ या तीसरा पक्ष नहीं होगा.

2. 1971 के युद्ध में भारत द्वारा कब्जा की गई पाकिस्तान की जमीन भी वापस कर दिया जाएगा.

3. शिमला समझौता के बाद भारत ने 93 हजार पाकिस्तानी युद्धबंदियो को रिहा कर दिया.

4. आवागमन की सुविधाएं स्थापित की जाएंगी ताकि दोनों देशों के लोग आसानी से आ जा सकें.

5. दोनों ही देश इस रेखा को बदलने या उसका उल्लंघन करने की कोशिश नहीं करेंगे.

6. दोनों देशों ने तय किया कि 17 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के बाद दोनों देशों की सेनाएं जिस स्थिति में थी उस रेखा को वास्तविक नियंत्रण रेखा माना जाएगा.

ये अलग बात है कि जुल्फिकार भुट्टो इस समझौते के 15 दिन बाद पाकिस्तानी संसद में कश्मीर में पाकिस्तान के समर्थन की घोषणा करके इस समझौते की अवहेलना की. दरअसल पाकिस्तान बांग्लादेश के मुद्दे पर मिली हार से खीझ चुका था जो आज तक कायम है. इसीलिए वो आज भी कश्मीर का राग अलापता रहता है.

इसलिए मोदी जी को गौर करना चाहिए कि जो नेहरू, इंदिरा को हर वक्त पानी पी-पी के कोसते रहते है वो आप गलत करते हैं. नेहरू और इंदिरा ने देश और दुनिया को बहुत कुछ दिया है. जैसे आपकी मातृ संगठन आरएसएस ने अंग्रेजी हुकूमत को दिया था. वैसे नेहरू परिवार ने इस देश को दिया है. नेहरू परिवार ने बलिदान भी पीढ़ियों और वंश में दिया है. पंडित मोतीलाल नेहरू आजादी के आंदोलनों में गाँधी जी के आने से पहले हमेशा आगे रहे, नेहरू ने एक दशक से ज्यादा जेल की सजा काटा, पूज्य माता कमला नेहरू जी का देहांत यातनाओं को सहते हुए हो गयी और उनको मुखाग्नि देने के लिए भी ब्रिटिश हुकूमत ने नेहरू जी को दो दिन की छुट्टी नहीं दी. आजादी के बाद श्रीमती इंदिरा गाँधी जी को छलनी कर दिया जाता है, 1991 में श्री राजीव गांधी के शरीर को बम से उड़ा दिया जाता है. तो क्या ये वंशवाद नहीं था ? क्या बलिदान में आपको वंशवाद नहीं दिखता ? केवल राजनीति में वंशवाद दिखता है. छोटी सोच को उतार कर फेक दो और हृदय से पूर्व प्रधानमंत्रियों के कार्य की सराहना करो वरना कल आप भी गाली पाओगे। ये एक गलत परम्परा हमारे समाज में अपना जगह बना लेगी.

Friday, February 8, 2019

राफेल सौदे पर पीएमओ के सीधे दखल से रक्षा अधिकारी नाराज

राफेल के मामले पर भले हीं सरकार को माननीय सुप्रीम कोर्ट से कुछ शर्तों के साथ पाक-साफ होने का सूबूत मिल गया हो पर विपक्षी पार्टी कांग्रेस के अध्यक्ष इस मुद्दे को छोड़ने के मूड में नहीं है. आज सुबह "द हिंदू में छपी एक खबर के मुताबिक रक्षा मंत्रालय तो सौदे को लेकर बातचीत कर ही रहा था, उसी दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय भी अपनी ओर से फ्रांसीसी पक्ष से 'समांतर बातचीत' में लगा था. अखबार के मुताबिक 24 नवंबर 2015 को रक्षा मंत्रालय के एक नोट में कहा गया कि पीएमओ के दखल के चलते बातचीत कर रहे भारतीय दल और रक्षा मंत्रालय की पोज़िशन कमज़ोर हुई." इस बात को लेकर मोल-भाव समिति के लोगों में शामिल अधिकारियों ने तत्कालीन रक्षामंत्री श्री मनोहर पारिकर के सामने प्रधान मंत्री कार्यालय के अधिकारियों की तरफ से बेजा द्वाव पर अपनी सख्त आपत्ति दर्ज कराई थी. इस पर रक्षा मंत्री को इन अधिकारियों के द्वारा एक नोट भी लिखा गया था और पीएमओ के हस्तक्षेप को ये कहते हुए दखल देने से रोकने की अपील कर रहे थे कि उक्त अधिकारी मोल-भाव समिति में शामिल हीं नहीं है तो निगोशिएट कैसे कर सकते हैं.

इस नोट की प्रतिलिपि मीडिया में कांग्रेस द्वारा आधिकारिक तौर पर बाँट दिया गया है. जो निचे मै भी लगा रहा हूँ -

इससे एक बात तो साफ़ हो रही है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष पिछले छः महीने से जो बात राफेल को लेकर बोल रहे थे और जिसके लिए उनका मजाक उड़ाया जाता था. वो अब धीरे-धीरे हीं सही लेकिन स्थापित होती जा रही है. अब तो सरकार को तथ्यों के साथ जबाब देने के लिए फिर जनता के सामने आना होगा। और दूसरी बात ये भी साबित हो गयी कि इस राफेल डील में रक्षा मंत्रालय की भूमिका को सिमित करके प्रधानमंत्री द्वारा एकतरफा फैसला लिया गया था. इस लिहाज से आरोप तो सीधा-सीधा प्रधानमंत्री पर हीं बनता है न कि उनके मंत्रिमंडल सहयोगी पर.राफेल अब विपक्ष की तरफ से आगामी लोकसभा चुनाव में एक बड़े मुद्दे की तरह प्रयोग में लाया जाएगा। अब देशवासियों को भी लगने लगेगा कि राफेल में कुछ तो है जो आये दिन कुछ नहीं बात निकल कर सामने आ रही है. 

रक्षा सौदे में सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप से एक बात प्रतीत होती है कि शायद प्रधानमंत्री जी को नेगोशिएशन कमेटी में शामिल लोगों की क्षमता और निष्ठा पर शक था. इसीलिए तो इस सौदे को लेकर सीधा पीएमओ से दखल देने की चेष्टा होती रही. मेरे ख्याल से यह उन सेना के जवानों का अपमान था जो इस कमेटी का हिस्सा थे.

Wednesday, February 6, 2019

आखिर बीजेपी और संघ पश्चिम बंगाल को लेकर इतने इतने आक्रामक क्यों हैं

बीजेपी और संघ आज जितना आक्रामक पश्चिम बंगाल को लेकर है शायद उतना कभी नहीं रही है. आप सोच रहे होंगे कि दो महीने बाद लोकसभा चुनाव होने वाले हैं और बीजेपी उत्तर भारत में होने वाले संभावित नुकसान को भांपते हुए अपना सारा जोर पश्चिम बंगाल पर लगा रही है क्योंकि इस बहाने उसे बीजेपी बंगाल में अपने जनाधार को भी बढ़ा सकती है और हो न हो तो सरकार भी बना सकती है. जो आजादी के बाद से हीं वहां सरकार बनाने से मरहूम रही है. तो आप मेरे अनुमान से गलत सोच रहें हैं क्योंकि आजादी के बाद यानी सन १९४७ से पहले बंगाल में पहले हिन्दू महासभा के सदस्य बाद में जनसंघ (बीजेपी) के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी १९४२ में अंग्रेजों की सरकार में वित्त मंत्री (उप-प्रधानमंत्री) थे और फजलुल हक उनके प्रधानमंत्री थे. तो आप खा गए न गच्चा, बीजेपी और संघ अपनी अग्रेजों के समय वाली सत्ता वापस पाना चाहते हैं. यह मेरी तरफ से कोई मनगढ़ंत आरोप नहीं लगाए जा रहें हैं बल्कि साक्ष्यों और प्रमाण के साथ अपनी बात को आप विद्वान् जनता के समक्ष रख रहा हूँ.

जोया चटर्जी नामक एक इतिहासकार ने  (Bengal Divided: Hindu communalism and Partition १९३२-१९४७) इस पुस्तक में इन घटनाक्रमों का उल्लेख किया है. जिस किसी को सत्यापन की जरूरत हो वो इस किताब को पढ़ सकता है.

इसी वक्त में जब देश आंदोलनों के माध्यम से अपना एक बेहतर भविष्य देख रहा था उसी समय बंगाल में शयामा प्रसाद मुखर्जी जी हिन्दू-मुस्लिम के बीच विवाद बढ़ाकर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे थे और पूर्वी बंगाल को हिन्दुओं के लिए अलग देश बनाने की मांग रहे थे और १९५२ के चुनाव में जनसंघ ने चुनाव भी लड़ा था पर उसका आधार वोट घटकर ४ % तक आ गया था. 

A 1947 newspaper cutting from the exhibit.

एक तरफ जहाँ पूरा देश महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ "भारत छोड़ो आंदोलन" की मुहीम में जुटा था ठीक उसी समय फजूल हक (पश्चिम बंगाल के प्रधानमंत्री, अंग्रेजी हुकूमत) के नेतृत्व में श्यामा प्रसाद मुखर्जी वित्तमंत्री (दुसरे सबसे वरिष्ठ मंत्री) के रूप में अंग्रेज नीत सरकार की सेवा कर रहे थे. जब भारत छोड़ो आंदोलन अपने चरम पर था उसी समय २६ जनवरी सन १९४२ को हिन्दू महासभा के (अब बीजेपी संस्थापक) श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बंगाल के ब्रिटिश गवर्नर जॉन हर्बर्ट को सम्बोधित करते हुए एक चिट्ठी लिखी थी जो अंग्रेजी में थी जो इस प्रकार थी -

 laying out a plan to combat the Congress. “Anybody who, during the war, plans to stir up mass feelings, resulting in internal disturbances or insecurity, must be resisted by any government that may function for the time being,” promised Mookerjee. “As one of your Ministers, I am willing to offer you my whole-hearted cooperation and serve my province and country at this hour of crisis”. 

अब आप को ऐसे लोगों को पहचानने की जरूरत है जो आज देश के हर किसी तबके को देशभक्ति का प्रमाणपत्र बाटते फिरते है और अपना इतिहास भूल कर दूसरे को देशद्रोही बोलते हैं. जिस समय हिन्दू महासभा के नेतृत्व में ये बंगाल सरकार में मंत्री रहते हुए ब्रिटिश गवर्नर को चिट्ठी लिखी थी वो अपने नागरिकों के साथ इतिहास की सबसे बड़ी गद्दारी थी. पर इनको शर्म कहाँ आती है. ऐसे लोगों की सेवा में चूर आज संवैधानिक पदों पर बैठे कुछ लोग हैं. मंगलवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल विद्यासागर राव ने एक बयान में कहा कि RSS सबसे ज्यादा धर्मनिरपेक्ष और समावेशी संगठनों में से एक है, क्योंकि इस संगठन ने लोगों के अपने विश्वास का पालन करने के व्यक्तिगत अधिकार का सम्मान किया है. इस पर महबूबा ने चुटकी लेते हुआ कहा कि फिर तो मैं ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ हूँ.

तो आप समझ गए न कि क्यों भाजपा और संघ बंगाल पर इतना आक्रामक है, अपनी आजादी के वक्त में गद्दारी करने वाली रियासत को फिर से पाना चाहते हैं.

जय हिन्द  

Monday, February 4, 2019

ममता की पुलिस और मोदी के तोते (सीबीआई) की भिड़ंत

कल पश्चिम बंगाल में एक बहुत हीं बड़ी घटना देखने को मिली जब देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई को बंगाल पुलिस के कमिश्नर राजीव कुमार की जांच करने से रोका गया और तो और सीबीआई के पांच अधिकारियों को हिरासत में लेने के करीब एक घंटे बाद छोड़ दिया गया. ये देश की केंद्रीय जांच एजेंसी के लिए बड़े हीं शर्म की बात है. इस एक घटना से राज्य सरकार और केंद्र केंद्र सरकार के संबंधों पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह सा लगने लगा है (हाल हीं में पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ (कांग्रेस) के सरकारों ने अपने राज्य में बिना इजाजत के सीबीआई के घुसने पर रोक लगा दी है). इस घटना के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री श्रीमति ममता बनर्जी जी का सीबीआई   के खिलाफ मेट्रो चैनल कोलकाता मे धरना शुरू हो गया था. 

इस अभूतपूर्व स्थिति को देखकर निश्चित तौर केंद्र और राज्य के सरकारों को जरूर सोचना चाहिए कि ऐसे हालात क्यों बनें और आगे उन हालातों से बचने के लिए क्या किया जाना चाहिए। मेरा तो मानना ये है कि केंद्र की सरकार को देश की सभी पार्टियों को बुलाकर इस घटना और एजेंसी की कार्य प्रणाली पर एक गहन चर्चा करनी चाहिए और एक प्रस्ताव पारित करना चाहिए जिससे केंद्रीय जांच एजेंसी का सम्मान बहाल हो और राज्य सरकार तथा केंद्र सरकार के बीच संबंध भी मधुर बने रहे.

सीबीआई और राज्य सरकार के खराब संबंधों का इतिहास -
सीबीआई और राज्य सरकार के बिच टकराहट का इतहास में शायद एक बार हीं जिक्र मिलता है और वो दौर था 1996-1997 का जब श्री लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री हुआ करते थे और उन पर चारा घोटाले का आरोप था. चारे घोटाले के आरोप में सीबीआई उनको गिरफ्तार करने जब बिहार गयी तो एक तरह से सीबीआई अधिकारियों को भीड़ ने घेर लिया या कहें तो बंधक बना लिया और किसी तरह जान बचा कर सीबीआई की टीम बिहार से उलटे पांव वापस लौट आयी थी और लालू को गिरफ्तार करने के लिए कोर्ट के आदेश के बाद अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गयी थी फिर जाकर लालू जी को गिरफ्तार किया जा सका था.  

राजीव कुमार पर आरोप -
राजीव कुमार पर सीबीआई की तरफ से ये आरोप था कि चीट फंड घोटाले में तत्कालीन पुलिस कमिश्नर ने सुबूतों को गायब किया है और हमें आदेश यही कि वो इस पर सरकार को बचा रहे हैं. राजीव कुमार ही वह ऑफिसर थे जिनके देख-रेख में कलकत्ता हाई कोर्ट ने सीट का गठन किया था और ये इस केस के इंवेस्टिगेटिंग ऑफिसर रहे थे तो जाहिर सी बात है कि सुबूत और बयान इन्ही के कार्यालय में दर्ज हुए होंगे। बंगाल पुलिस के अनुसार जब सीबीआई उनके घर पर पूछताछ करने के लिए गयी तो सीबीआई के पास पूरे कानूनी कागजात नहीं थे. जिसकी वजह से कोलकता पुलिस ने सीबीआई के उन अधिकारियों को हिरासत में लिया था. इस मुद्दे को लेकर आज सीबीआई सुप्रीम कोर्ट गयी थी जहाँ पर सरकार की तरफ से मुकुल रोहतगी कलकत्ता पुलिस कमिश्नर पर सुबूत मिटाने का आरोप बार-बार दोहरा रहे थे तब माननीय सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश श्री रंजन गोगोई ने तल्ख टिप्पणी करते रोहतगी से हुए कहा कि " अगर आपके पास राजीव कुमार के खिलाफ सुबूत नष्ट करने का सुबूत है तो आप ले कर आइये और हम राजीव कुमार के खिलाफ ऐसी कार्यवाई करेंगे की वो पूरी जिंदगी भर पछतायेंगे". इसकी बाद कल यानी (05.02.19) सुनवाई की अगली तारीख मुकर्रर कर दी.  

कल रात से हीं जो देश के तमाम जानकार और मीडिया रिपोर्ट्स निकलकर जनता के बीच में आ रही हैं उनकी अलग-अलग राय है. इसकी गूँज आज संसद के दोनों सदनों में सुनाई दी है. टीएमसी के सांसद सौगात रॉय ने आज संसद में सीधे-सीधे मोदी-शाह का के आरोप लगाते हुए कहा कि १३ फरवरी तक कलकत्ता पुलिस कमिश्नर को हिरासत में नहीं लेने का आदेश कलकत्ता हाई कोर्ट ने पहले हीं दे रखा था तो सीबीआई किस लिए उनके घर गयी थी और क्या करने गयी थी. दोनों सदनों को पश्चिम बंगाल में सीबीआई प्रकरण के कारण विपक्ष के भारी हंगामें के बाद २ बजे तक रद्द किया गया. अगर छापे की ही बात है तो कोई बताये ब्यापम में कितनी बार शिवराज पर छापा पड़ा ? स्वामी प्रसाद मौर्या पर कितनी बार छापा पड़ा ? सृजन घोटाले में नितीश और मोदी के खिलाफ कितनी बार छापा पड़ा ? विजय बहुगुणा के खिलाफ कितने छापे पड़े ? इस लिए इस कार्रवाई पर राजनितिक दुर्भावना बस कार्रवाई के आरोप लगाए जा रहें हैं जो सत्य भी है. "कोई भी लोकतंत्र में जनता से ऊपर नहीं है.'' मैं हीं सबकुछ हूँ ऐसा घमंड किसी भी सरकार को नहीं होना चाहिए. यह सोचनीय विषय है कि अगर ये भी सत्ता से बेदखल होंगे तो उनका अंजाम क्या होगा अगर इसी तरह प्रतिशोध की भावना से एजेंसियों का दुरूपयोग होने लगे तो.

 चिटफंड के अन्य आरोपी -
चिटफंड है क्या ? यह एक तरह की पोंजी स्कीम थी इसमें ३२ गुना तक के मुनाफे का वायदा करते हुए लोगों से धन जुटाया था और फिर रातों-रात ये कंपनियां गायब हो गयी थी. इस चिटफंड में टीएमसी के कई नेता, सांसद जेल भी गए थे और कई नेता जमानत पर बाहर है.शारदा घोटाले में सीबीआई ने रजत मजूमदार और तत्कालीन परिवहन मंत्री मदन मित्रा को भी गिरफ्तार किया. भाजपा के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय जो कि तब तृणमूल कांग्रेस के महासचिव थे, उनसे भी सीबीआई ने 2015 में इस भ्रष्टाचार के मामले में पूछताछ की. हेमन्त विश्वा (Congress) अब बीजेपी। चिट फंड घोटाले में मुख्य आरोपी है और ये दोनों अब बीजेपी पार्टी से जुड़ चुके हैं तो भगवा वाशिंग मशीन में धुलकर आप पाक-साफ़ हो चुके हैं. जब तक ये विरोधी पार्टियों में थे तब तक इनके खिलाफ सीबीआई की जांच चल रही थी जिसमें मुकुल रॉय और हेमंत विश्वा दोनों को  बीजेपी की सरकार मुख्य आरोपी मानती थी पर अब वो गंगा के तरह पवित्र हैं. ये है बीजेपी/संघ का दोगलापन.

 यह मामला पूरी तरह से राजनितिक हो गया है क्योंकि आने वाले एक-डेढ़ महीने में चुनाव आयोग चुनावी तिथि की घोषणा कर देगा। इस वजह से सभी पार्टियां अपना नंबर स्कोर करना चाहती है. पर राज्य और केंद्र के बीच जो चल रहा है ये देश के लिए कत्तई उचित नहीं हैं.   

Saturday, February 2, 2019

मोदी सरकार का छठा बजट जुमला और हकीकत का आंकलन

कल सरकार ने कहने को तो अंतरिम बजट पारित किया परन्तु ये है पूर्ण बजट. जो संवैधानिक रूप से ठीक नहीं है वैसे भी इन्हें नेहरू जी और कांग्रेस के द्वारा शुरू किये गए कार्यक्रमों से नफरत है. इसी कड़ी में इन्होने बजट को मार्च की तुलना में फरवरी महीने में हीं करना शुरू किया। खैर इस पर किसी को कोई आपत्ति होनी भी नहीं चाहिए। अब हम आते हैं बजट पर तो यह बजट देखने, सुनने में बहुत आकर्षक लग है पर इसमें हकीकत क्या है ये तो दिनों में साफ़ हो जायेगा। मेरा मानना है कि यह बजट पूर्णतया चुनावी बजट है हकीकत से कोसों दूर.

अंतरिम बजट की कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं -
इस आखिरी साल के अंतरिम बजट में कई तरह के बहुत ही लोक लुभावन बातें कही गयी हैं. उनमें से कुछ को रेखांकित करने की कोशिश कर रहा हूँ.

आयकर की सीमा में छूट -
सबसे बड़े एवं महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक भाग आयकर का रहा. जो पहले २.५० लाख की कमाई पर आय देते थे उनके लिए इस बजट में ५ लाख तक आयकर देय से बाहर कर दिया गया है. पहली नजर में ये छूट तो बहुत लोक-लुभावन सी लग रही है पर तकनीकी आधार पर तर्क और कुतर्क की गुंजाईश बाकी है.
नए कर प्रणाली के अनुसार फायदा -
  • ३,५०,००० रुपये तक की आयकर आमदनी वालों को नए बदलाव के अनुसार २६०० रुपये का फायदा होगा.
  • ४,००,००० रुपये तक की आयकर आमदनी वालों को नए प्रारूप के अनुसार ७८००  का फायदा मिलेगा.
  • ५,००,००० रुपये तक की आयकर आमदनी वालों को १३ हजार रुपये का फायदा होगा.
  • १०,००,००० रुपये की आयकर आमदनी वाले जितना कर पहले था देते थे उतना नए बदलाव के बाद अर्थात अब भी १,१२,५०० रुपये का कर देना पड़ेगा.
किसानों के खाते में सीधा पैसा -
इस सरकार ने अपने पाँच साल के कार्यकाल के अंतिम अंतरिम में किसानों के लिए एक नई बात की शुरुआत की है और इसे "प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना " नाम दिया है. इसके अंतर्गत ५ अकड़ जोत वाले किसानों के खाते में सीधे ६ हजार रुपया वार्षिक तौर पर भेजना। सरकार के अनुमान से इस "प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना " से लगभग १२ करोड़ किसान प्रभावित होंगे। परन्तु इस पर राजनीति जोरों पर है. विपक्षी पार्टियां इसे किसान के साथ जुमला का संज्ञा देते हुए सरकार की मंशा  सवाल उठा रहीं है. मेरा भी मानना है कि ५०० रुपया महीना और १७ प्रतिदिन देने से किसान के स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है. अगर सच में किसानों के प्रति कोई संवेदनशीलता दिखानी है तो किसान की इन मुख्य माँगों को सरकार को पूरा करना चाहिए।

किसानों की मुख्य मांगें -

स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू हो
हर अनाज का MSP तय हो  
किसानों की पूर्ण कर्ज माफी हो 
खाद्यान भंडारण की समुचित ब्यवस्था हो      
डीजल पर किसानों को सब्सिडी (छूट) मिले                         
बकाया गन्ना राशि जो कि लगभग १० हजार करोड़ है, उसका भुगतान अविलम्ब हो      
सिचाई का उचित प्रबंध हो 
खाद-बीज की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित हो 
अनाज की कालाबाजारी और मंडियों में दलाली बंद हो 

बजट में निराश करने वाली बातें -
तीन बातें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की दृष्टि से अगर देखा जाये तो यह यह बजट अत्यंत निराश करने वाला रहा है.

रोजगार और युवा का भाषण में जिक्र तक नहीं -
इस बजट में रोजगार और युवा के लिए किसी तरह की कोई मदद नहीं है. वो हो भी कैसे सकता है. जब हमारे प्रधानमंत्री महोदय का ड्रीम रोजगार "पकौड़ा रोजगार " है, अगर युवाओं के लिए रोजगार की बात इस बजट में की  जाती तो हमारे प्रधानमंत्री के पकौड़े वाले रोजगार का सपना टूट जाता। जिससे देश पर पकिस्तान हावी भी हो सकता था. इसलिए भारत माता की  रक्षा के लिए कामचलाऊ वित्तमंत्री ने एक देशभक्ति से प्रेरित बजट पेश किया.
   
बजट में शिक्षा हुआ छुआ-छूत का शिकार - 
वर्तमान अंतरिम बजट में  वित्तमंत्री महोदय (पियूष गोयल) जी ने शिक्षा का नाम लेना भी मुनासिब नहीं समझा तो शिक्षा के लिए पैसा का प्रश्न हीं नहीं उठता। इस बजट में सरकार का शिक्षा से उदासीनता बजट के आँकलन के बाद साफ-साफ़ देखा जा सकता है. तरह से सही भी है.

जब पढ़ेंगे नहीं युवा 
तभी पकौड़ा बेचेंगे युवा   

कामकाजी लोगों के लिए बीमा -

बड़े कमाल की एक योजना कल-कारखानों, कंपनियों में काम करने वालों के लिए बजट में सामने आयी. ५५ रूपये का बीमा कर्मचारी करवाएगा और ५५ रुपया उपरोक्त कार्यरत संस्था देगी फिर उस कर्मचारी की उम्र ६० साल पार करने के बाद सरकार ३०००  पेंशन देगी। सरकार की चालाकी देखो हम पैसा कटवाएंगे आज  महंगाई के दर पर और हमें पेंशन जो औसतन ३० साल बाद मिलेगी वो भी आज की महंगाई दर पर मिलेगी.

कर्मचारियों के लिए एक और खबर है जिसका फंड कटता है पहले उसे मरने के बाद २,५०,००० रूपये सरकार देती थी परन्तु अब मरने के बाद ६,००,००० रूपये देगी.

आज की योजना आपकी जिंदगी के लिए नहीं है आज आप भूख से मरो और मरने के बाद आपको काजू और बादाम खिलाया जाएगा। तो आप सोच सकते हैं कि सरकार की सारी योजनाएं और उससे मिलने वाली सुविधाएँ मरने के बाद के लिए हैं अर्थात जीने का मोह त्याग कर मृत्यु को गले लगाए और सरकार के देशभक्ति बजट की सुविधाओं का लाभ उठायें.