शुरुआत में ही मैं यह साफ़ करना चाहता हूँ कि यह लेख कल शाम को अपने साथ हुए अनुभव के आधार पर लिख रहा हूँ और इस लेख का कथानक सौ फीसदी सत्य है और चरित्र का नाम बदला हुआ है.
बात यहां से शुरू होती है मेरे एक रिश्तेदार महोदय दुर्घटना का शिकार हो गए थे भगवान उन्हें जल्द से जल्द स्वस्थ्य करें मेरी मेरे त्रिलोचन बाबा से यही कामना है. इस दुर्घटना में उनका कंधे में फ्रैक्चर हो गया था तो मुझे भी दोपहर में खबर मिली मै बात किया तो पता चला अब हो हस्पताल से घर आ चुके हैं तो मैं उन्हें देखने उनके घर पर गया प्रणाम, आशीष हुआ हाल-चाल जानने के बाद बैठक थोड़ी लम्बी हो गयी तो जिन्हें देखने के लिए मैं गया था उनके बड़े भाई भी दुर्घटना की खबर सुनकर बनारस (मोदी वाला क्योटो) से आनन-फानन में आये थे और वो महाशय संघ समर्थित मजदूर संघ बी एम एस (भारतीय मजदूर संघ) के पदाधिकारी थे वो पूज्य चचा जी बताने लगे की संगठन के काम से पिछले हफ्ते नागपुर गया था वह सब बढ़िया माहौल में बात-चीत हुई इतने में बीच में हीं मैं उन्हें छेड़ते हुए बोला कि चचा जी 'मंदिरवा कब बनी' इतना सुनते हीं सकपका से गए फिर खुद को संभालते हुए बोले 'मंदिरवा त संघ के एजेंडा में रहब ना कयल उ त सरकार बनाई' तब मैं बोल पड़ा कि चाचा जी मैं तो यही सुना था कि संघ, विहिप, हिन्दू महासभा, बजरंग दल इन सबका उद्देश्य तो मंदिर था और अब कैसे बदल गए इसका जबाब उनके पास नहीं था तो उनमें से एक चच्चा जिनको दुर्घटना में चोट लगी थी और तीन लोग संघ, भाजपा समर्थित थे उनकी और मेरी आगे की बात-चीत का ब्यौरा अब शुरू होता है-
छेदी - ऐसा है कि बिपिन का दिमाग किसी कांग्रेसी ने साफ़ कर दिया है और अपनी बात इनके दिमाग में ठूंस-ठूंस कर भर दिया है.
मैं - नहीं चचा आप गलत बोल रहें है किसी कांग्रेसी ने मेरे दिमाग में कुछ नहीं भरा है मैं खुद से गलत सही को कोशिश करता हूँ.
छेदी - नहीं बेटा तुम्हारा दिमाग तो किसी ने भर रखा है और मेरा मानना है कि कांग्रेस ने तुम्हे आतंकवादी बनाया है, उनको टोकते हुए....
मैं - नहीं चचा कांग्रेस आतंकवादी नहीं पैदा करती और नहीं सनातन हिंदुत्व आतंकवादी पैदा करता है हां देश में कुछ कट्टर संगठन दोनों धर्मों में है वही ऐसे हानिकारक तत्व पैदा करते हैं. अब दुसरे का प्रवेश होता है
रवि - क्यों कांग्रेस ने हीं तो कर्नल पुरोहित, साध्वी प्राची, संत असीमानंद को आतंवादी बता कर फंसाई थी अब सब बरी हो गए हैं.
मैं - हाँ कोर्ट ने बरी किया है तो उसका सम्मान होना चाहिए और समझौता एक्सप्रेस में जो ब्लास्ट हुआ था वो अपने से हो गया था, मक्का मस्जिद का ब्लास्ट अपने से हो गया था इतना सुनते हीं चुप हो गए, फिर
छेदी - बात पलटते हुए नेहरू जी, गाँधी जी, इंदिरा जी और सोनिया जी के बारे में अपशब्दों की बौछार करने लगें.
मैं - छेदी चचा को टोकते हुए आपके के पास कोई सुबूत है कि ये लोग फला काम में लिप्त थे है तो बताओ, वैसे किसी के चरित्र हनन करने का कार्य आपके संगठन द्वारा बहुत सफाई से किया जाता है, थोड़ा वक्त निकाल कर अटल जी के बारे में पढ़ लेना.
छेदी - बात पलटते हुए आखिर ये बताओ हम हिन्दू तो मंदिर का मुकदमा लड़ने के लिए आरएसएस और विहिप के माध्यम से चंदा देते हैं तो उस मुल्ले को कहां से मिलता है तुम्ही बताओ कांग्रेस मुल्लों को पैसे नहीं देती।
मै - हे चचा जैसे आप अपने संगठन के माध्यम से मंदिर के लिए चंदा देते है वैसे हीं उनका भी कोई संगठन होगा.
रवि - अब तो भगवान को भी अपना जन्म पत्री दिखाना पद रहा है, और वो कांग्रेस हीं थी जिसने राम को काल्पनिक कहा था.
में - ये कहा था तो कांग्रेस की गलती थी पर सुप्रीम कोर्ट वाला हलफनामा आप ने कभी पढ़ा है.
रवि - नहीं
मैं - फिर एक बार वक्त निकाल कर जरूर पढ़े.
रवि - तुम बताओ राम-मंदिर बनना चाहिए कि नहीं.
मैं - बिल्कुल बनना चाहिए पर बिना खून-खराबे के
रवि - फिर कांग्रेसी बनने क्यों नहीं दे रहें है ?
मैं - आपको किसने कहा की कांग्रेसी रोक रहे है.
रवि - सब कहते है, इतने में छेदी चचा की फिर से एंट्री होती है
छेदी - आरएसएस 10 रूपये का चंदा काट रहा था मंदिर के लिए और मैं चार जगह 100 रूपये का अलग-अलग चंदा कटवाया
मैं - क्यों ?
छेदी - अपने हिंदुत्व की रक्षा के लिए और क्यों न करूं मैं हिन्दू हूँ, तैश में आते हुए.
मैं - अच्छा अब आपकी सरकार में भी हिंदुत्व खतरे में आ गयी वाकई चचा जी ये निकम्मी सरकार है, मुझे टोकते हुए
छेदी - नहीं हम खुद से देते हैं सरकार बहुत बढ़िया है, उनको रोकते हुए
मैं - चच्चा जी सनातन हिंदुत्व खतरे में नहीं है ये 1925 के बाद वाला संघी हिंदुत्व खतरे में है
छेदी - मतलब हिन्दू तो हिन्दू
मैं - हाँ चचा हिन्दू तो हिन्दू होता है मेरा वाला सनातन हिन्दू 7000 साल से भी पुराना है और आप जिस हिंदुत्व की बात कर रहे हैं उसकी पैदाइश 1925 में आरएसएस के प्रथम संस्थापक हेडगेवार ने की थी उनकी एक पुस्तक "द बंच ऑफ़ थॉट्स" पढ़िए.
छेदी - चुप और उनके साथ रवि और जो दो लोग बैठे थे वो भी शांत हो गए पर एक महीन से आवाज मंदिर को लेकर फिर आयी, उस महाशय को मैं नहीं जानता था.
मैं - आप जिस मंदिर की बात कर रहे हैं उसे बनाने का तरीका सुलझा लिया गया था और तरीका ये था कि विदेशी तकनीकि के माध्यम से मस्जिद को थोड़ा दूर खिसका दिया जायेगा और उस स्थान पर मंदिर का निर्माण कर दिया जायेगा और ये बात चचा मैं नहीं कह रहा ये शीतला सिंह नामका पूर्वांचल में एक मशहूर पत्रकार ने अपनी किताब में जिक्र किया है जिसे आज तक संघ और बीजेपी के तरफ से कोई चुनौती नहीं मिली है. श्री सिंह अपनी किताब में लिखते है कि-
देवरस और सिंघल के इस कटु वार्तालाप की पुष्टि का दावा मैं नहीं कर रहा अपितु यह वरिष्ठ पत्रकार और अयोध्या में निर्मित विवाद को सुलझाने के लिए बने अयोध्या विकास ट्रस्ट के संयोजक शीतला सिंह जी ने किया है. शीतला सिघ जी फ़ैजाबाद से निकलने वाले अखबार जन मोर्चा के संपादक है. शीतला सिंह जी का फ़ैजाबाद, अयोध्या समेत पूर्वांचल के लोगों में बहुत सम्मान है उन्होंने यह उल्लेख ‘अयोध्या - रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद का सच’ नामक अपनी किताब में दर्ज की है.
रवि - अरे छोड़ो यार.
मैं - चाचा जी इसीलिए कहते है कि सुनी-सुनाई बात पर अगर यकीन करोगे तो मुंह की भी कहानी पड़ सकती है.
रवि - ऐसा नहीं है.
मैं - तो आप जबाब दिजिये कि कांग्रेस ने कब रोका.
रवि - भाई मैं नहीं जानता मैं तो सुन के बता रहा था.
मैं - तो चचा अब से पढ़के बात करना चुटकी लेते हुए बोला.
फिर सब हंसने लगे और मुझे भी मेरे घर जाने का वक्त हो चला था इसलिए मैं बोलै कि हर किसी से उम्मीद करता हूँ चाहे वो किसी भी विचार का हो बिना जानकारी के किसी पर कोई आक्षेप न लगाएं अन्यथा कभी-कभी समस्या खड़ी हो सकती है.
अब वर्क का अंत हो चूका है पैर छूकर मैं भी अपने घर को चल दिया.
No comments:
Post a Comment