आजादी के सत्तर साल बाद आज हमारे मुल्क में एक ऐसा विचार पैदा किया जा रहा है जिसकी बुनियाद ये है कि जो हमारे विचारों के साथ नहीं जुड़ेगा वो पाकिस्तानी होगा और उसे पकिस्तान चले जाना चाहिए और ऐसी भाषा का प्रदर्शन करने वाले एक ख़ास विचार से सम्बन्ध रखते है और उस पर अपना प्रभाव मनाते है. पकिस्तान भेजने वाले कोई छुटभय्ये नेता नहीं हैं बल्कि सत्ता पक्ष के बहुत बड़े-बड़े नेता है और मंत्री महोदय है. दो मंत्री जो बिहार से आते है गिरिराज सिंह और अश्विनी चौबे जी माने ये लोग तो हमेशा पकिस्तान भेजते रहते हैं बात-बात में पकिस्तान भेज देते हैं. इनका इतना पकिस्तान प्रेम देखकर मन में कभी-कभी संदेह होने लगता है कि कहीं पकिस्तान में इन्होने टूर-ट्रेवल्स की कम्पनी तो नहीं खोल रखी है, ये तो नंबर बनाते हैं परन्तु इनके राष्ट्रिय अध्यक्ष तो इनसे भी आगे जाकर पकिस्तान का नाम जपते हैं.
एक तुच्छ वाकया 2015 के बिहार विधान सभा में देखने को मिला था जब बीजेपी के पुराने सहयोगी और नए-नए महागठबंधन में शामिल हए नितिश कुमार की पार्टी,कांग्रेस और राजद मिलकर चुनाव लड़ रहे थे और बीजेपी की तरफ से लोजपा, रालोसपा, और भाजपा चुनाव में थी तो बीजेपी के राष्ट्रिय अध्यक्ष जी ने मंच पर खड़े होकर हजारों की भीड़ में ऐलान किया था कि अगर महागठबंधन की जीत होगी तो पटाखे पाकिस्तान में फूटेंगे और बीजेपी ये चुनाव बहुत बुरी तरिके से हार गयी पर पटाखे पाकिस्तान में नहीं पटना में फूटे थे फिर वक्त का पहिया घुमा और नितीश जी फिर से बीजेपी की गोद में आ गिरे और चार घंटे के अंदर सरकार बना ली फिर जब अमित शाह से पत्रकार बंधुओं ने यही सवाल किया तो जबाब देते नहीं बना और बगले झाँकने लगे. इससे एक बात स्पष्ट होती है कि ज्यादा बोलने वाला (बड़बोला) कभी-कभी गटर में भी झाँकने को मजबूर हो जाता है.
हम इस स्तिथि को यही छोड़ते हुए थोड़ा सा पुरानी यादों में चलते है पिछली सरकार के मुखिया श्री मनमोहन सिंह जी अपने 10 साल के प्रधानमंत्री के कार्य काल में देश के सैनिकों के खातिर कभी भी पकिस्तान का रूख नहीं किया परन्तु सबको पकिस्तान भेजने वाली और अपने आप को फर्जी राष्ट्रवादी पार्टी बताने वाली भाजपा के मुखिया पाक के प्रधानमंत्री को अपने शपथ ग्रहण समारोह में दिल्ली बुला लेते हैं और हग तो तब हो गयी जब विदेशी दौरे से लौटते वक्त बिना किसी बुलावे के नवाज के नातिन की शादी में जाने के लिए पकिस्तान में कुछ घंटों के लिए रूक जाते हैं और पार्टी मना कर आते हैं तब यही जो लोगो को पकिस्तान भेजने वाली मंडली है मानो चूहे के बिल में छुप जाती है और इनकी आवाज ठीक उसी तरह नहीं निकलती जिस तरह बिल्ली को देखकर चूहा की.
तो असल बात ये है कि इस महान देश को ये जबरदस्ती सिखलाया जा रहा है कि आप किसी खास समुदाय के नहीं होंगे तो आपके साथ इसी तरह का अपमान जनक ब्यवहार किया जायेगा, आप किसी खास विचार,संगठन को नहीं मानोगे तो आपको भीड़ के द्वारा मार दिया जायेगा, आप की जान हमारे लिए अहमियत नहीं रखती गाय की रखती है, आप क्या खाओगे ये मैं तय करूंगा, आप क्या पहनोगे इसका भी निर्धारण मैं हीं करूंगा पर वे भूल जाते है हमारा देश सवा सौ करोड़ लोगों के भावनाओं से जुड़कर बनता हैं, हर सुबह-शाम किसी खिले हुए बाग़ की तरह खूशबू बिखेरता है जिसकी महक इतनी मदहोश करने वाली होती है कि हे जाति-धर्म के लोगों को एक सतह पर एक साथ लाकर खड़ी कर देती है और अनवरत सुगंध बिखेरती है और इस बगिया रुपी देश की सुगंध में हम भारतवासी एक दुसरे के सुख-दुःख के साथी बन जाते हैं और एक दूसरे से जुड़ें रहते हैं.
जय हिन्द।
जय भारत।।
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