आज लोक सभा चुनाव के चौथे चरण का मतदान हो रहा है अब तक करीब 15 फीसदी के आस-पास मतदान हो चुका है. परन्तु पश्चिम बंगाल के आसनसोल से सुबह-सुबह हिंसा की खबर आयी जो एक मजबूत लोकतंत्र की सेहत के लिए कत्तई सही नहीं कहा जा सकता। आसनसोल सीट से अभी केंद्र सरकार में मंत्री और मशहूर पार्श्व गायक श्री बाबुल सुप्रियो भाजपा की तरफ से उम्मीदवार हैं और दूसरी तरफ मुनमुन सेन जो की बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी अदाकारा है और तृण मूल कांग्रेस की तरफ से उम्मीदवार हैं का मुकाबला आपस में हो रहा है. परन्तु सुबह किसी बात को लेकर दोनों पार्टियों के समर्थकों में झड़प हो गयी और पुलिस को लाठीचार्ज करके भीड़ को भगाना पड़ा और इसी बीच वहाँ पहुंचे बीजेपी उम्मीदवार बाबुल सुप्रियो के साथ भी हाथापाई की कोशिश की गयी. लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि दोनों पार्टी के शीर्ष नेताओं ने इन हिंसाओं के बीच अपने-ापने समर्थकों से संयम बरतने की अपील तक नहीं की. इससे एक बात समझ में आती है कि कहीं न कहीं पार्टियों के शीर्ष नेता इस उग्र भीड़ को बढ़ावा दे रहें है.
चौथे चरण का मतदान हो रहा है परन्तु इस चरण तक आते-आते आम इंसान से जुड़े मुद्दे जैसे- रोजी, रोटी, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी ये सब गायब हो गए और पुराने मुद्दों का भी कोई जिक्र नहीं हो रहा है. अब जिस बात का जिक्र हो रहा है उसमें जाति हम हो गयी है. हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी गुजरात में अगड़ी जाति (बनिया) से शुरू होते हुए 2019 आते-आते पिछड़ा बने और तो कन्नौज पहुंचते-पहुंचते महाशय अति-पिछड़ा बन गए हैं. जितनी गिरावट साहेब के जाति में हुई है उतनी गिरावट तो उनके उम्र में भी नहीं हुई है. राष्ट्रवाद और बालाकोट का समर्थन उनके उन्हीं समर्थकों में हैं जिन्होंने पिछली बार उनको वोट दिया था पर साहेब के प्रति विश्वास में उनके दिल में भी कमीं आयी है. क्योंकि जब भक्त भक्ति पर उतरते हैं तो निचे लिखा हुआ 2014 वाला कुछ वादा याद दिलाने मात्र से हीं खिसियाने लगते हैं.
एह बार भाजपा के वोटवा काहें दें -
15 लाख देना जुमला
काला धन वापसी जुमला
राम मंदिर जुमला
रुपया की मजबूती जुमला
स्मार्ट सिटी जुमला
आदर्श गाँव जुमला
पाक को जवाब जुमला
किसानों की आय जुमला
2 करोड़ रोज़गार जुमला
कुछौ ना मिलल शिवाय विवेक विहीन भक्तन के.
भक्तों के बीच में जब भ्रष्टाचार पर जब सवाल किया जाता है तो वो उखड़ जाते हैं और भारत माता की जय के नारे का ऊँची आवाज में जयकारा लगाते हैं और देशभक्त बन जाते हैं और मानते हैं कि जनता को छलने पाप एकमात्र नारे से सारे पाप धूल जाते हैं. जो पिपक्ष में नेता होता था उसे भाजपाई खूब गरियाते थे और सबसे बड़का भ्र्ष्ट बताते थे और जैसे हीं वो इनकी पार्टी में आये तो शाह रूप वाशिंग पाउडर और मोदी रुपी मशीन में धुलकर पक्का ईमानदार बन जाता है. उनमें से कुछ नाम मैं यहां वर्णित करना चाहता हूँ जैसे विजय बहुगुणा, राय (नारदा-शारदा घोटाले के आरोपी), स्वामी प्रसाद मौर्या, रीता बहुगुणा जोशी, हरक सिंह रावत, पंडित सुखराम शर्मा, अनिल शर्मा (बाप-बेटे हिमांचल) जैसे मणि आज बीजेपी में जाते हीं माँ गंगा की तरह पवित्र हो चुके हैं जो दूसरी पार्टी में रहते हुए महाभ्रष्ट हुआ करते थे. इन सब मामलों का जिक्र करने के बाद भक्तो के पास उरी और बालाकोट की स्ट्राइक बचता है और सेखी बघारने के लिए मोदी-मोदी करते हैं फिर वहीं जब पलट कर ये पूछ लिया जाता है कि अगर इन स्ट्राइक का श्रेय मोदी जी को जाता है तो उरी में 21 जवान शहीद हुए और पुलवामा में 42 जवानों की निर्मम रूप से हत्या कर दी गयी तो उसकी भी जिम्मेदारी मोदी की क्यों नहीं होनी चाहिए. इतना सुनते हीं उनका मुंह फिर लटक जाता है और फिर देशद्रोही का शब्द बौखलाते हुए अपने मुंह से नकालते हैं और उनकी हताशा, निराशा का अंदाजा उस समय साफ़-साफ़ पढ़ा जा सकता है.
