Tuesday, December 25, 2018

राम मंदिर का आंदोलन झूठ और राजनितिक मंशा से चढ़ा परवान : सच की पड़ताल

आज देश में राम मंदिर निर्माण के लिए देश के कुछ कट्टर हिन्दू संगठनों जैसे शिव सेना, विहिप, आरएसएस, श्री राम सेना, हिन्दू युवा वाहिनी खूब जोर-शोर से उठा रहे है कि राजाराम के मंदिर का निर्माण में एक पंथ आड़े आ रहा है और ये लोग उस धर्म को मानने वालों के प्रति बहुसंख्यक लोगों के मन में जहर भरने का काम कर रहें है आइये हम कुछ ऐतिहासिक सन्दर्भों से इस बात को समझते है और लोगों को समझने के लिए उन विवेक पर छोड़ देते है.

आरएसएस का मकसद मंदिर निर्माण नहीं दिल्ली के सत्ता थी-

जो लोग आज नारा लगा रहें है कि श्री राम मंदिर निर्माण में देरी होने से हिन्दुओं के सब्र का पैमान भर गया अगर ये पैमान छलक जायेगा तो देश के लिए अच्छा नहीं होगा इस लिए जल्द से जल्द राम मंदिर का निर्माण शुरू किया जाये और अब आपको ये जानकर हैरानी होगी कि आज से लगभग ३१ साल पहले जब विहिप के अशोक सिंघल तब के आरएसएस प्रमुख  बालासाहेब देवरस के सामने गए तो तो देवरस उन पर बहुत बुरी तरह भड़क गए और डाँटते हुए सिंघल से बोले की अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए राजी कैसे हो गए तुम तो संघ के पुराने स्वयंसेवक रहे हो और तुम्हें पता है हमारा मकसद राम मंदिर का निर्माण नहीं बल्कि दिल्ली की साबित पर काबिज होने का है. उस वक्त एक फार्मूला बना था कि विदेशी तकनीक के माध्यम से मस्जिद को खिसका कर दूसरी जगह कर दिया जायेगा और राम चबूतरा को आजाद कर दिया जायेगा और उस पर मंदिर निर्माण का कार्य किया जाएगा। इस तरह किसी भी भवन को एक जगह से दुसरी सफलतापूर्वक स्थापित करने का फार्मूला दुबई में सफल भी हो चूका था जब एक अस्पताल को बनाने के लिए मस्जिद को इस विधि द्वारा हटाया गया था. 

बालासाहब देवरस - वैसे भी देश में 800 राम मंदिर है एक और बन जायेगा तो 801 वां राम मंदिर होगा हमारा आंदोलन जन-भावनाओं के साथ जुड़कर बड़ी सफलता से आगे बढ़ रहा था और हमारा लक्ष्य दिल्ली की सत्ता है न कि मंदिर तुमने आंदोलन के पीठ में छूरा घोपा है.
दिसंबर1987 का वो महीना था जब बालासाहब देवरस ने जो कहा उसे सुन खुद अशोक सिंघल चकित हो गए थे. 
देवरस और सिंघल के इस कटु वार्तालाप की पुष्टि का दावा मैं नहीं कर रहा अपितु यह वरिष्ठ पत्रकार और अयोध्या में निर्मित विवाद को सुलझाने के लिए बने अयोध्या विकास ट्रस्ट के संयोजक शीतला सिंह जी ने किया है. शीतला सिघ जी फ़ैजाबाद से निकलने वाले अखबार जन मोर्चा के संपादक है. शीतला सिंह जी का फ़ैजाबाद, अयोध्या समेत पूर्वांचल के लोगों में बहुत सम्मान है उन्होंने यह उल्लेख ‘अयोध्या - रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद का सच’ नामक अपनी किताब में दर्ज की है।  
शीतला सिंह जी ने अपनी किताब के पृष्ठ संख्या 110 में इस घटना का ज़िक्र करते हुए लिखे हैं। उनकी इस जानकारी का मुख्य स्रोत के. एम. शुगर मिल्स के मालिक और प्रबंध संचालक लक्ष्मीकांत झुनझुनवाला हैं। झुनझुनवाला जी  उस वक्त केविश्व हिन्दू परिषद् के वरिष्ठ नेता विष्णुहरि डालमिया के कहने पर उनके लिए कुछ काग़ज़ात लेने शीतला सिंह के पास आए थे और काग़ज़ लेकर दिल्ली लौट गए। अगले दिन जब वे वापस फ़ैज़ाबाद आए तो उन्होंने ऊपर लिखी हुई पूरी बातचीत को एक दुसरे को सुनाई.



देवरस उन पर बहुत बुरी तरह भड़क गए और डाँटते हुए सिंघल से बोले की अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए राजी कैसे हो गए तुम तो संघ के पुराने स्वयंसेवक रहे हो और तुम्हें पता है हमारा मकसद राम मंदिर का निर्माण नहीं बल्कि दिल्ली की साबित पर काबिज होने का है.

मुस्लिमों का समूह भी उपरोक्त फॉर्मूले के तहत निर्माण कार्य के लिए तैयार था पर संघ की राजनितिक महत्वाकांक्षाओं की वजह से ये मुद्दा आज भी विवादों की जड़ बना हुआ है.



मंदिर निर्माण के लिए स्थानीय ट्रस्ट के इस फ़ैसलाकुन हस्तक्षेप के सबसे बड़े समर्थक बने महंत अवैद्यनाथ जो इस ट्रस्ट के सदस्य तो नहीं थे लेकिन विश्व हिंदू परिषद के सबसे बड़े नेता थे। दरअसल, महंत परमंहस, नृत्यगोपाल दास, जस्टिस देवकीनंदन अग्रवाल, नारायणाचारी आदि विहिप नेता आरएसएस से अलग अवैद्यनाथ के गुट के थे.



अयोध्या - राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद का सच’ नामक पुस्तक का पिछले पृष्ठ 

स्रोत : अयोध्या - राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद का सच’ नामक पुस्तक

नोट : ये किताब को पढ़कर निकला हुआ भाव है और तथ्य है जो शब्दशः अनुवादित या उल्लेखित नहीं हो सकते.  


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