आजकल धर्म की ब्याख्या बड़े हीं अलौकिक तरिके से की जाने लगी है जब किसी सरकार को बचाना हो तो धर्म की ओट में बैठ जाओ आस्था को आगे कर दो और खुद को उसके पीछे छुपा कर कायरों की भांति बैठ जाओ वही हो रहा है हमारे देश में अभी एक पखवाड़े पहले अयोध्या में एक धर्मसभा का आयोजन किया गया था उसका कोई ठोस परिणाम तो निकला नहीं और आज दूसरे धर्म संसद का आयोजन भी दिल्ली के रामलीलाा मैदान गया और यह आयोजन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के नाम से आहूति किया गया है परन्तु इसके पीछे बहुत बड़ा खेल है जो हम देशवासियों को समझने की जरूरत है कि कैसे आस्था और धर्म का नाम लेकर इनके पीछे छुपकर संगठन सरकार की कमियों को छुपाने का काम कर रहे है और जनता की जबाबदेही से सत्ता को बचाने का प्रयास कर रहे है और वो इसे बड़ी चालाकी से अंजाम दे रहे है कि किसान सरकार से सवाल न पूछे कि सरकार ने जो वादा किया था किसानों का अच्छे दिन लाने का उसका क्या हुआ,युवा सवाल न पूछ सके कि दो करोड़ रोजगार देने का जो आपका वादा था उसका क्या हुआ,जवान ये न पूछ सके कि उसके ORPOP का क्या हुआ, 1 सिर के बदले 10 लाने के वादे क्या हुआ, मंगाई कम करने की वादे का क्या हुआ,भ्रष्टाचार कम करने के दावे का क्या हुआ.
इन सब मौजू बातों से ध्यान हटाने का तरीका इन लोगों ने सरकार को जनता के सवालों से बचने के लिए चुना है जिसे धर्मसभा का नाम देकर आस्था को आगे कर रहे है. मेरा एक रामभक्त और देश का नागरिक होने के नाते इन संगठनों से एक बहुत हीं सीधा और सरल सवाल कि जब मर्यादा पुरुषोत्तम सियाराम सरकार के अनुषांगिक सगठनों के लिए इतने महत्व रखते थे तो सरकार बनते हीं इन्होने इस तरह के आयोजन क्यों नहीं किये सरकार की जबाबदेही इस मामले में सुनिश्चित क्यों नहीं की साढ़े चार साल तो चुप रहे अब जब बमुश्किल चंद महीनों में देश आप वाला है तो आप को रमंदिर की याद आई अगर किसी विद्वान के पास इस सवाल का जबाब हो तो जरूर देने का कष्ट करियेगा.
एक सरकार को बचाने के लिए कुछ तथाकथित हिन्दुओं के ठेकेदार संगठन आज मंदिर के नाम पर छाती पिट-पीटकर विधवा-विलाप कर रहे है उन्हें शर्म नहीं आती कि किस मुंह से ये लोग ऐसी बात करते है अरे पहले की सरकारों को तो आप दोष देते थे वो एक तरह से जायज ठहरा सकते है पर अब तो तुम्हारी अपनी सरकार है संघ का एक स्वयं सेवक प्रधानमंत्री है एक राष्ट्रपति है एक उप-राष्ट्रपति है फिर भी आप कुछ नहीं कर पा रहे हो तो अपने संगठन का भाजपा में विलय कर दो कम से कम देश के संविधान में आस्था रखना तो सिख लेंगे देश की जनता आरएसएस को गैर-राजनितिक संगठन नहीं मानती आरएसएस को हीं बीजेपी मानती है.
अब से छः महीने तक राम मंदिर का निर्माण धर्मसभा से शुरू होकर मीडिया डिबेट तक होगा और अगर गलती से भगवा सरकार सत्ता में आ जाती है तो फिर मंदिर निर्माण का मुद्दा बंद हो जायेगा और धर्मसभा का आयोजन फिर अगले आम चुनाव के साथ आयोजित किया जाने लगेगा,तो मित्रो इनकी चालाकियों को समझो ये मंदिर के लिए धर्म-संसद का आयोजन नहीं कर रहे बल्कि सत्ता को बचाने के लिए ऐसा कर रहे है, और आप लोग ज्यादा से ज्यादा सरकार से सवाल पूछने की कोशिश करे और इनकी जनता के प्रति जबाबदेही तय करने की हिम्मत दिखाए, भगवान् जब चहेंगे जब मंदिर बन जायेगा हम मनुष्यों के हाथ में कुछ नहीं है जो परमात्मा को दे सके जो पूरे विश्व को पल रहा है सब कुछ दे रहा है उसे हम क्या दे सकते है.
जा पर कृपा राम की होई ता पर कृपा करे सब कोई
frji hai ye sb
ReplyDeleteSB farji kaam chunaw ke liye ho rha hai nhi to sadhe char saal se kyon mudda nhi bna
ReplyDeletesb faltu kee baat ho rhi hai phle roti chahiye or bad me kuchh
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