#MeToo नाम का जो वायरस आजकल सोशल मीडिया पर चला रहा है वो तो हमारे देश में बहुतों के इज्जत की टोपी सरे बाजार उछाल रहा है,मुझे लगता है कि इस तरह का मान-सम्मान मर्दन करने का हक किसी को नहीं है,हो सकता है कि इनकी बातें सत्य हो फिर भी जब एक लम्बा वक्त बीत गया है तो उसकी जांच सत्यता के साथ कैसे परिपूर्ण होगी। नारी का सम्मान करते हुए मै अपने विचार को रखना चाहता हूँ कि जिस किसी के साथ कोई घटना 20 साल 25 साल पहले घटित हुई तो वो इतना लम्बा समय शिकायत करने में कैसे लगा सकती हैं और अगर आज शिकायत करती हैं तो ये क्यों नहीं समझा जा सकता कि उस समय उन्हें उन पुरुषों के साथ काम करने की आवश्यकता थी तो किया परन्तु आज जब ढेर सारा पैसा कमा ली है तो उन महिलाओं में उन पुरुषों में सिर्फ बुराई नजर आ रही है.
मै इस अभियान से सहमत नहीं हूँ इस अभियान की तुलना मै भारत पकिस्तान के बटवारे से करना मुनासीब समझता हूँ जैसे कि जब देश का बटवारा हुआ तो उस वक्त फर्जी वीर,मुखर्जी,उपाध्याय,पटेल जी जैसे करोङो लोग सम्मिलित थे,परन्तु तब के गद्दार और आज के नए-नए देशभक्त आरएसएस,हिन्दू महासभा उस फैसले की समीक्षा करते हुए 60 साल बाद से देश के बटवारे के लिए नेहरू और महात्मा गाँधी जी को जिम्मेदार मानने लगे और जनता के बीच भ्र्म फ़ैलाने में आगे रहे और आज भी कर रहें है तो ये सोशल मीडिया का अभियान ऐसे है प्रतीत होता है,इससे अलग नहीं.
समाज के लोगों को ये जरूर सोचना चाहिए कि जो अनुचित और असत्य हो उसका साथ कभी नहीं देना चाहिए परन्तु जो सत्य है उनके साथ हमेशा कदम से कदम मिलाकर चलना चाहिए यह #MeToo का सोशल मीडिया अभियान अभी कितनों की टोपी उछालेगा बस देखते रहो,इस अभियान के लपेटे में हमारे स्वप्न नगरी मुंबई के कई बॉलीवुड कलाकार इस अभियान के तपिश में झुलस चुके है और कितनों को अभी डर शता रहा है कि कब न उनके मान-सम्मान की अर्थी इस अभियान के माध्यम से निकाल सड़कों में निकल दी जाय.
इस लपेटे में तो अब वर्तमान सरकार में केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री और 1996 में एशियन ऐज के संपादक एम जे अकबर भी लपेटे में आ गए है जिनके इस्तीफे तक की मांग उठने लगे है,परन्तु मेरे समझ में नए नहीं आ रहा है कि जिन देवियों ने इन महानुभाव के खिलाफ यौन प्रताड़ना की गंभीर शिकायत कर रही है जब वो इतने बुरे थे तो इनके साथ तीन साल,चार साल तक काम क्यों करती रही हमें इस तरफ भी थोड़ा सोचना चाहिए और ये महिलाएं तो बहुत हीं संभ्रांत और पढ़े-लिखे परिवार से थी तो जब उनके साथ यौन दुर्ब्यवहार हुआ तब वो चुप क्यों रही,फिर उनकी चुप्पी पर क्यों नहीं उठाया जा रहा है.
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