कल विश्व पटल और गोदी मीडिया के लिए रात एक न्य जश्न लेकर आयी थी जो अमरीका में टेक्सस राज्य के ह्यूस्टन शहर में आयोजित की गयी थी. उस जश्न वाली जगह का नाम 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम रखा गया था जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक साथ साझा रैली को सम्बोधित किया. जिसमें लगभग 50 (मीडिया रिपोर्टों के अनुसार) अमेरिकी और भारतीय लोग इकट्ठा हुए थे. जाहिर सी बात है आयोजन बड़ा था तो खर्च भी बड़ा हुआ होगा. वैसे मोदी जी की अपनी एक अलग हीं शैली है. जिसके दम पर औरों को बौना साबित करने की कोशिश करते हैं. साझा भीड़ को दोनों नेताओं ने सम्बोधित किया और भारत की तर्ज पर 'अबकी बार ट्रम्प सरकार' का नारा हमारे प्रधानमंत्री ने ह्यूस्टन की धरती से उद्घोष किया. यह सोचने का सवाल है कि क्या हमारे प्रधानमंत्री अब अमेरिका में भी चुनाव लड़ेंगे या ट्रम्प के समर्थन में रैली करेंगे ? अगर ट्रम्प फिर भी हार जाते हैं तो क्या वहां का अगला राष्ट्रपति भारत के सामान्य रिश्ता रखेगा ? क्या अब हर उस जगह हमारे प्रधानमंत्री जी प्रचार करने जाएंगे जहां चुनाव होगा। वो भले हीं विश्व के किसी भी देश में हो. क्या अमेरिका की जनता ट्रम्प को देशद्रोही का तमगा नहीं देगी ? क्या ट्रम्प से वहां का जनमानस ये नहीं सवाल करेगा कि हमारे चुनाव को बाहरी आदमी कैसे मैनेज कर सकता है ? शायद ! पूछेगी और तब ट्रम्प के पास उसका जबाब नहीं होगा। क्योंकि ट्रम्प भी दक्षिणपंथी विचारों के प्रवर्तक हैं और हमारे प्रधानमंत्री जी भी.
संघ, साहब, गोदी मीडिया के लिए कल उसी शो में शर्मिंदगी का सामना उस वक्त करना पड़ा. जब अमेरिका के निचले सदन में बहुमत के नेता हॉउस आफ रिप्रेज़ेंटेटिव और डेमोक्रेट सांसद स्टेनी होयर ने कहा, ''अमरीका की तरह भारत भी अपनी परंपराओं पर गर्व करता है. जिससे वह अपने भविष्य को गांधी की शिक्षा और नेहरू की उस सोच जिसमें भारत को धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र बनाने की बात है, उसका बचाव कर सके, जहां प्रत्येक व्यक्ति और उसके मानवाधिकारों का सम्मान किया जाएगा.'' जब यह वाकया हुआ उस वक्त मोदी जी वहीं खड़े थे और उन्हीं के स्वागत का कार्यक्रम चल रहा था. जब मंच से नेहरू और गांधी के नाम का जिक्र हुआ तो उस समय मोदी जी के चेहरा देखने लायक था. वो बिलकुल अधीर थे क्योंकि हत्यारे गोडसे , माफीवीर सावरकर और उपाध्याय का कहीं कोई जिक्र नहीं आया.
नेहरू की प्रसंशा सुनने के बाद भक्तों में अजीब तरह की बेचैनी छा गयी. हो भी क्यों न जब करोड़ों रूपये लगाकर मंच सजाया गया हो और उस मंच से उस आदमी का सम्मान किया जाए जिसे हमारे देश में गाली दिया जाता है और गाली देने वाला और कोई नहीं प्रधानमंत्री जी खुद सामने हों और नेहरू, गांधी का जिक्र हो जाय तो शर्म से मरने वाली बात हो जाती है. हमारे देश में हर समस्या का जड़ मोदी जी और उनकी पार्टी नेहरू जी को मानती है. दर्द तो तब और होता है जब नेहरू जी पीछा अमेरिका तक नहीं छोड़ते हैं. भक्त और संघ के लोग हलकान हैं कि ये नेहरू अपनी मृत्यु के बाद भी हमें शर्मिंदा करने से नहीं चूक रहा है.
