ऐसा लगता है कि संघ को इस बात का अहसास हो गया है कि उसकीविचारधारा तोड़ने वाली रही है न कि देश के लोगों को आपस में जोड़ने वालीक्योंकि उसका जिन्दा सुबूत कल दिल्ली में आरएसएस के तीन दिवसीयकार्यक्रम के समापन पर संघ प्रमुख मोहन भागवत का बयान है जिसमें संघप्रमुख साफ कहते सुने जा रहें है कि"अगर मुस्लिम समाज हमारे समाज में नहींरहेगा तो हिंदुत्व की कल्पना ही नहीं की जा सकती है"इससे पहले संघ की सोचहमेशा से मुस्लिम विरोध की रही है तो संघ प्रमुख द्वारा ऐसा कहना चकित करनेवाला है,जिस संघ की स्थापना डॉ.हेडगेवार ने की थी वो पूरी तरह से मुस्लिमविरोध की थी और उस विचार को आज के संघ प्रमुख अपने नए बयानों केमाध्यम से लगभग तिलांजलि देते हुए दिखाई दे रहें है.
संघ के प्रखर वक्ता और लेखक गोलवरकर जी की लिखी हुई किताब "बंचऑफ़ थॉट्स"जिसे संघ से जुड़ें हुए लोग कल तक अपनी गीता मानते थे उसे दिल्ली मेंतत्कालीन संघ प्रमुख ने पूरी तरह से नकार दिया,क्योंकि उस किताब में गोलवरकरजी ने हिंदुत्व की बात की थी वो भी कट्टर हिंदुत्व की,दो देश,दो धर्म की बातउसी किताब में उल्लेखित है उस किताब में समाज के बारे में भी बहुत हीतकियानुसी सोच का दर्शन कराया गया है,जिसे कुछ विद्वान "मनुवाद" का अंशभी मानते है. ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य और शूद्र की श्रेणी को भी परिभाषित किया हैऔर शूद्रों को "अपृश्य" माना गया है. आज के संघ प्रमुख से जब उस किताब सेजुड़ें तथ्यों के बारे में पूछा गया तो उन्होने गोलवरकर जी द्वारा लिखी हुई बात कोनकारते हुए कहते है कि वो सारी बात परिस्थिति-वश लिखी गयी थी जिसकाआज के समाज में कोई औचित्य नहीं है इससे बड़ा परिवर्तन और कुछ नहीं होसकता संघ के विचार में जो परिवर्तन आया है वह स्वागत योग्य है परन्तु इनबातों पर यकीन करना ठीक वैसा होगा जैसे गिरगिट का रंग बदलना.
वरिष्ठ पत्रकार श्री शेष नारायण जी के अनुसार-"भागवत जी समझ गए है हिंदुत्वसे वो बहुत कुछ पा चुके है आज देश के कुछ राज्यों को छोड़कर बाकि पूरे देशपर उनका प्रभाव है तो अब सर्व समाज की बात की जाय क्योंकि जब ये हिंदुत्वकी बात करते है तो मुस्लिम उसमें फिट नहीं बैठते है इसलिए अपने आप कोसमावेशी बनाने के लिए एक महीन लकीर खींचना चाहते है."मेरा भी मानना यहीकी संघ अब अपनी स्वीकारोक्ति को बढ़ाने की कोशिश करता हुआ दिखाई दे रहाहै,इसका असर कितना होगा,ये तो आने वाला वक्त बताएगा। जो संघ प्रमुख कुछहफ्तों पहले तक अमेरिका में"विश्व हिन्दू सम्मलेन" में हिन्दूओं को कुत्ता औरशेरकी श्रेणी में बाँट रहे थे वही अब मुस्लिम पक्ष की पैरोकारी करने में सबसे आगेनिकल गए है,परन्तु लाख टके सवाल ये है कि जिन अल्पसंख्यकों पर हमले हुएऔर उनको अनेक तरिके से प्रताड़ित किया गया उस पर माफी कब मागेंगे?,और दूसरा सवाल अपने कट्टर संगठनों जैसे विहिप,बजरंग दल,श्री राम सेनाको कैसे बताएंगे की लव जिहाद,धर्मांतरण में कुछ गलत नहीं है क्योंकि तुम्हाराहिंदुत्व मुस्लिम समाज के बिना अधूरा है।
संघ में इतना बड़ा परिवर्तन आया कैसे तो उसके लिए अध्धयन करने की जरूरत हैक्योंकि कांग्रेस और लेफ्ट सहित देश की तमाम मुख्यधारा की पार्टियां संघ कोविभाजनकारी मानते हुए सामाजिक तौर पर दूर रहती थी पर 1998 में जब अटल जीजब प्रधानमंत्री बने तो उनके साथ कई ऐसी पार्टियां जुड़ीं जो मुस्लिम की राजनीतिकरती थी उदहारण के तौर पर कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियां जैसे पीडीपी, नेशनलकॉन्फ्रेंस,बिहार से जदयू "नीतिश" मुख्य थे. लेकिन जब से 2014 लोकसभा केचुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गाँधी ने लगभग अपने हर राजनितिक भाषणमें संघ पर प्रहार किये हैं उससे संघ को काफी चोट पहुंची और संघ ने अपनेआप को बदलने की कोशिश करना शुरू कर दिया जो अब तक जारी है. राहुलने संघ को दूसरा झटका संसद में "अविश्वाश प्रस्ताव"पर चर्चा के बाद प्रधानमंत्रीको गले लगाने से दिया तथा तीसरा और अब तक का सबसे बड़ा झटका"कैलाश मानसरोवर यात्रा"करके दिया जिससे संघ अंदर से हिल गया और यहबात मैं उदहारण के साथ कह रहा हूँ की जो दिल्ली का तीन दिवसीय सम्मलेनहुआ वो इस तरह का संघ के इतिहास का पहला सम्मेलन था जो अब से पहलेसंघ के 93 साल (1925 से अब) तक कभी नहीं हुआ और यह सम्मेलन राहुलगाँधी के "कैलाश यात्रा" के बाद हुआ और मुस्लिम समाज के सम्बन्ध में संघप्रमुख का हतप्रभ कर देने वाला विचार का जन्म भी राहुल गाँधी के कैलाश यात्राके बाद हुआ।
ॐ नमः शिवाय
जय हो त्रिलोचन महादेव
ye hathi ki trh rhte hai dikhane ke dat or khane ke or
ReplyDeleteRSS never change his thought
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