कल अमेरिका की धरती से 1925 में पैदा हुए कट्टर हिन्दू संगठन के प्रमुख श्री मोहनभागवत जी ने अपने एक सम्बोधन में कहा कि "अब हिन्दूओं को संगठित हो जानाचाहिए क्योंकि शेर का शिकार कुत्ते भी घेरकर कर लेते है". मै अब तक ये समझ नहींपा रहा हूँ कि भगवत जी ने कुत्ता किसको कहा कयोंकि आरएसएस से जुड़ें लोगों कोकुत्ते ही क्यों याद आते है.अभी तो भागवत जी बोल रहे है और मै आप पाठकों कोस्मरण चाहता हूँ कि 2014 आम चुनाव के समय आज के हमारे प्रिय प्रधानमंत्री औरउन दिनों गुजरात के मुख्यमंत्री जी ने भी कुत्ते को याद किया था और उनके मंत्रिमंडलमें बहुत सारे वरिष्ठ और कनिष्ठ मंत्रियों की जीभ पर नाली का कीड़ा साप-छछूंदरइत्यादि रहता है अर्थात इसका आशय यह है कि आरएसएस की शाखा में इन्हीजानवरों और जीव-जंतुओं के बारे में पढ़ाया जाता है जो इनके स्मरण में हमेशा रहताहै.
भागवत जी ने ये भी कहा की हजारों साल से हिन्दू उपेक्षित है तो ये हमारे पूर्वजों काऔर राजाओं की क्षमता और कार्य-प्रणाली का मजाक उड़ा रहे है क्योंकि 5000 सालसे पुराने और वृहत इतिहास में केवल 800 साल का एक ऐसा दौर आया जहाँ परमुगलों और अंग्रेजों का शासन रहा उससे पहले तो हमारा इतिहास बहुत सुनहरा थाउन्ही हिन्दू राजाओं ने बर्मा,चीन,नेपाल,अफगान,पाकिस्तान तक अपना वर्चस्व कायमकिया था भागवत जी अगर वाकई हिन्दू उपेक्षित था तो यह कैसे संभव हुआ अतःभागवत जी आप सरासर झूठ बोल रहे हैं और गलतबयानी कर रहें है. हाँ आपकी दर्दको समझा जा सकता है कि आपके 1925 के बाद वाले हिंदुत्व को जरूर उपेक्षा काशिकार होना पड़ा है और आप आगे भी उपेक्षित होते रहेंगे,क्योंकि देश के बहुसंख्यकलोग सनातन धर्मी हिंदुत्व को मानने वाले है न कि फर्जी हिंदुत्व को सनातन धर्म कीपहचान और सोच में आपके हिंदुत्व की सोच का दूर-दूर तक कोई मेल नहीं है.
सनातन धर्म में "वसुधैव कुटुम्बकम"को विचार माना गया है और आपके 1925 वाले मेंमुस्लिम और ईसाई को छोड़कर बचे हुए लोगो को अपना कुटुंब माना गया है,हमाराविराट हिंदुत्व हर तरह की हिंसा का विरोध करता है परन्तु आपका हिंदुत्व कुछचयनित हिंसा का विरोध करता है. हमारा सनातन हिन्दू किसी भी जीव-जंतु की हत्याको घृणित नजरिये से देखता है और आपका हिंदुत्व केवल गौ के ऊपर हुई हिंसा कोघृणित मानता है.
"अहिंसा परमो धर्मः"के मूल-मंत्र को हम सनातन हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग अपनेजीवन मेंआत्म- सात करते है और आने वाले हजारों सालों तक हम इसी विचार केसाथ जीने का प्रयत्न करेंगे, भागवत जी आप जब कुछ बोलते है तो जो भी बुद्धिजीवीलोग होते है उन्हें पहले ही अंदाजा होता है कि आप आज क्या बोलने वाले है क्योंकिआप के पास बोलने के लिए कुछ नया नहीं होता,आप 1925 के बाद वाले हिन्दुओं कोइकट्ठा करो और हम सनातन धर्म के हिन्दुओं को अपने गौरवशाली इतिहास की याददिलाएंगे,जिसमें मीरा,राधा-कृष्ण,भक्त बर्बरीक,भक्त प्रह्लाद,निषाद राज,अगस्तमुनि,भरत,लक्ष्मण,सुदामा,रसखान,तुलसी,सूर,कबीर जी जैसे भगवान और भक्तशिरोमणि थे जो आज भी हमारे आराध्य है और उनके विचार आज भी हमारे आत्मा मेंसमाहित है,अतः भागवत जी आप याद रखना जीत हमेशा सत्य की हुई है.
आधुनिक युग में अगर हमें किसी से हिन्दू होने के मतलब सीखना है है
तो उसके सबसे बड़े प्रवर्तक स्वामी विवेकानंद जी थे जिन्होंने 1893 में अमेरिका के शिकागो शहर में विश्व धर्म
सम्मलेन में दिया गया भाषण सनातन हिन्दू होने का मतलब था और उस ओजस्वी भाषण को
सुनकर पूरी दुनिया हतप्रभ हो गयी थी और विवेकानंद जी के सामने शिरोधार्य हो गयी
थी.
ॐ नमः शिवाय
जय त्रिलोचन महादेव
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