राहुल की कैलाश मानसरोवर
यात्रा का दूसरा चरण शुरू हो गया है जिसमे वो कैलाश पर्वत की पूजा और परिक्रमा अथाह
ऊर्जा के साथ कर रहे है. राहुल जी ने ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी
और पवित्र कैलाश पर्वत की कुछ अद्भुत और मनमोहक दृश्य को शेयर किया परन्तु हमारे यहाँ
जो खुद को सबसे बड़ा हिन्दू मानते है वो इसे फर्जी,फोटोशॉप और न जाने क्या-क्या संज्ञा
दे रहे है भगवान शिव से मेरी यही प्रार्थना है कि ऐसे विवेक विहीन लोगों को क्षमा करें
और उनके जीवन से हर कष्ट को दूर करें ऐसा सोचना और करना ही सच्ची भक्ति और सच्चा हिन्दू
होने का धर्म है जो श्रीमान राहुल गाँधी जी कर रहे है.
इस लेख को लिखने का मेरा
आशय यह है कि जो लोग विराट हिन्दू धर्म को 1925 के बाद अपनी जागीर समझने लगे थे अब
उनका क्या होगा,उनकी ठेकेदारी का क्या होगा। हर सनातन धर्मी हिन्दू जानता है कि उसका
धर्म 5000 साल से भी ज्यादा पुराना है न की 1925 के बाद आया हुआ.जिस हिंदुत्व का जिक्र
आज हो रहा है उसका जन्म 1925 में आरएसएस के सावरकर ने किया था,तो जो इस उग्र हिंदुत्व
को मानते है तो उन्हें यह बताना चाहिए की उससे पहले क्या वो हिन्दू नहीं थे? शायद उनका
जबाव होगा थे,परन्तु विराट हिन्दू थे जिसकी सभ्यता आर्यन से लेकर सिंधु तक अपनी मधुर
सुगंध फैलाये रखी थी.
अतः राहुल जी हमें हमारे
उसी विराट हिंदुत्व का दर्शन करा रहे है जो समूचे विश्व के लिए आदर्श था जिसकी प्रशंसा
पोरस,सिकंदर जैसे लोग करते नहींथकतेथे.जिसकेद्योतक शिव स्वरुप आदि शंकराचार्य जी महाराज,महर्षि
यमदग्नि,महर्षि बाल्मीकि गोस्वामी तुलसीदास,सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र,चक्रवर्ती
सम्राट राजा दशरथ और महान कवि चंदरबरदाई और महान विद्वान और श्रेष्ठ गुरु चाणक्य जी
थे.
आज हमें हमारे उसी उदार
सनातनी हिंदुत्व की जरूरत है न कि कट्टर हिंदुत्व की,कट्टर हिंदुत्व का विचार राजनितिक
है जबकि सनातनी हिंदुत्व का विचार धार्मिक और जीने की एक पद्धति है विराट हिंदुत्व
दुनिया का सबसे पुराना और सबको अपना मानने वाला है,राहुल जी के धर्म और आस्था के ऊपर
ऊँगली उठाने वालों के लिए उनकी कैलाश मानसरोवर की यात्रा एक करारा तमाचा है और राहुल
जी ने ये बता दिया है की आस्था का बाजारीकरण नहीं किया जाना चाहिए.हमारे धर्म से जुड़ें प्रमुख स्थलों का विस्तारनेपाल,भूटान,कम्बोडिया,चीन (कैलाश पर्वत) सहित अन्य देशों में है.
ॐ नमः शिवाय
जय त्रिलोचन महादेव
Om Nam: Shiway
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