Thursday, May 30, 2019

कांग्रेस का टीवी मीडिया त्याग और मोदी का शपथ समारोह

लोकसभा चुनाव में विपक्ष की करारी हार के बाद कुछ अभूतपूर्व घटनाएं घटित हो रही हैं. उन घटनाओं में पहले घटना समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव द्वारा अपने प्रवक्ताओं को टीवी पर होने वाली हिन्दू-मुस्लिम समेत सभी तरह के बहसों में जाने से रोकना और आज 30 मई की सुबह जब सबकी आंख खुली तो देखने को मिला कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने भी अपने प्रवक्ताओं को टीवी डिबेट में जाने से रोक दिया और आज के दौर में  भी था क्योंकि "जब पत्रकार संविधान को दरकिनार करके संघ के संविधान /सरकार की भक्ति में लीन हो जाए तो ऐसे पत्रकारों और मीडिया घरानों का बहिष्कार लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत हैं. गोदी मीडिया से दूर रहकर गांव-गिरांव तक जनता के बीच अपनी बात और प्रभावी तरीके से पहुंचाई जा सकती है."

एक तरफ आज संघ/भाजपा इतिहास रचते हुए देश में लगातार दूसरी सरकार बनाने वाली पहली गैर-कांग्रेसी पार्टी बनी तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने अपने प्रवक्ताओं को टीवी चैनलों में न भेजने वाला चौकाने वाला फैसला लिया. कमाल तो ये हो रहा है जहाँ एक तरफ भाजपा अपने विजय को महान बताने और जताने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है वहीं देश की सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष कैकयी की भाँति कोप भवन में विराजमान हैं और अपनी जिद मनवाने पर अड़े हैं. उनको उनके किसी सिपहसलार को जाकर समझाना चाहिए कि आपके इस कदम से पार्टी का बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है. ऐसे वक्त में राहुल गाँधी को निराश नहीं होना चाहिए वरन एक कुशल बहादुर योद्धा की भाँति फिर से दोबारा अपने काम में जुट जाना चाहिए. हार और जीत को प्रतिष्ठा का विषय बनाना हानिकारक होता है और ऐसी स्थिति में मनुष्य अनेक गैर वाजिब कामों को अंजाम दे देता है और जब उसे होश आता है तो वो पीछे मुड़कर देखने का साहस नहीं कर पाता है. इसलिए राहुल गाँधी को दोबारा अपने पद पर आकर अपने संगठन की अपेक्षाओं के अनूरूप अविलम्ब कार्य शुरू कर देना चाहिए। अटल जी और आडवाणी जी ने भी तीन-तीन विकराल हार के बाद इस्तीफा नहीं दिया था और अपनी समस्त ऊर्जा को इकट्ठा कर लड़े और सफलता के झंडे गाड़े। चुनाव और खेल में एक पक्ष हारता है और दूसरा पक्ष जीतता है इसके अलावा कोई और पक्ष नहीं होता तो कांग्रेस अध्यक्ष को चाहिए कि अपने हठ को त्यागकर देश हित और अपनी पार्टी के हित में सोचें और काम करें.      

"पर उपदेश कुशल बहुतेरे"

Monday, May 27, 2019

माटी के लाल नेहरू की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि

आधुनिक भारत राष्ट्र के निर्माता पंडित श्री नेहरू जी की आज 55 वीं पुण्यतिथि है. इस अवसर पर मैं देश के प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू जी को उनकी चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पति करता हूँ. 

नेहरू होने का मतलब - मेरी नजर में नेहरू होने का मतलब त्याग और बलिदान की पराकष्ठा है. ऐसा मैं किसी तर्क के आधार पर नहीं बल्कि आजादी के आंदोलनों में उनके द्वारा किये गए कार्यों और उससे संबंधित तथ्य और सत्य के आधार पर कह रहा हूँ. नेहरू के पिता जी श्री मोतीलाल नेहरू जी एक बहुत हीं रूतबेदार वकील थे. नेहरू जी ने अपनी पूरी पढ़ाई लंदन में किया था. लंदन के या यूं कहें कि कुछ विश्वप्रसिद्ध विश्व विद्यालयों में से एक कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से लॉ की छात्र के रूप में पूरा किया था. नेहरू जी  की कोई कमी नहीं थी. नेहरू जी चाहते तो अपने दम पर ऐशो-आराम की जिंदगी जी सकते थे पर उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योंकि उन्हें अपनी मातृ भूमि से प्यार था. इलाहाबाद की मिट्टी से प्यार था, संगम में बहती  हुई कल-कल करती गंगा, यमुना, सरस्वती के अमृत समान जल से प्यार था. सभी लोग जानते हैं कि पंडित नेहरू जी का जन्म उत्तर-प्रदेश के इलाहबाद में सन 14 नवंबर 1889 को हुआ था. जवाहरलाल नेहरू पंडित मोतीलाल नेहरू और स्वरूप रानी के चार बच्चों में सबसे बड़े पुत्र थे. पंडित नेहरू की छवि को आज जो लोग धूमिल हैं और इनके जो वैचारिक गुरु जो श्री नेहरू जी के समकालीन थे. जब वो अंग्रेजों की यातनाओं से डरकर माफ़ी मांगते फिरते थे और उनकी गुलामी करने का वादा करते नहीं थकते वहीं पंडित नेहरू जी जेलों में उनकी यातनाओं का मुकाबले चट्टान से बुलंद हौसले के साथ करते थे. ऐसे लोगों को उनके पाखण्ड की झलक को सबके नजरों के सामने लाने की सख्त जरूरत है.

आजादी के आंदोलनों में पंडित नेहरू का किरदार - आजादी के आंदोलनों में पंडित नेहरू के किरदार को समझने के लिए थोड़ा हमें उनके पृष्ठभूमि के बारे में जानना बहुत जरूरी है. उसके कुछ लघु अंश ऊपर वाले भाग में अंकित करने की कोशिश  की गई है. नेहरू जी अपनी पढ़ाई पूरी करके लंदन से भारत वापस आ चुके थे और कमला कौल जो की एक कश्मीरी ब्राह्मण थी उनसे 1916 में पंडित नेहरू जी का विवाह सम्पन्न हुआ. उसी दौरान लगभग 1919 में नेहरू जी और गाँधी जी एक साथ आये और आजादी की कल्पना के साथ एक साथ काम करना शुरू किया। चूँकि पंडित नेहरू जी उदार हृदय के ब्यक्ति थे तो गाँधी जी उन्हें ज्यादा पसंद करते थे. दोनों ने मिलकर साथ में असंख्य आजादी के दीवानों को साथ लेकर "स्वाधीनता" के नारे के साथ आगे बढ़े. इस दौरान आंदोलनों को कई बार झटका लगा. कुछ झटका ब्रिटिश हुकूमत से  कुछ अपने देश में बैठे हुए गद्दारों से लगा. जो माफी की गुहार लगाते रहते थे. कई मुकदमों में नेहरू जी इस दौरान कुल 9 बार जेल भी गए थे और ब्रिटिश हुकूमत द्वारा दी हुई सजा को पूर्ण किया था. आज जो लोग नेहरू के आभा मंडल को धूमिल करना चाहते हैं वो ऐसा भी नहीं कर पाएंगे। क्योंकि वो जब आसमान से जमीन तक नजर डालेंगे तो उन्हें वहां-वहां नेहरू हीं दिखाई देंगे। चाहे भाभा अटॉमिक रिसर्च सेंटर, इसरो, डीआरडीओ, एम्स, आईआईटी या आज जहां देश खड़ा हैं वो नेहरू की दूरदर्शी सोच और वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम का परिणाम है.

नेहरू जी को योगदान को नकारकर इस देश की परिकल्पना नहीं की जा सकती। जो लोग ऐसा करते हैं वो देश के असंख्य आंदोलनकारियों का अपमान करते हैं. नेहरू जी आप इस देश के स्मृतियों में हमेशा-हमेशा के लिए रचे बसे हैं इस महान देश का कण-कण आपका कर्जदार हैं. पंडित नेहरू जी न सिर्फ एक अच्छे नेता और वक्ता थे बल्कि वो एक आला दर्जे के लेखक भी थे. उन्होंने अंग्रेजी में 'द डिस्कवरी ऑफ इंडिया', 'ग्लिमप्स ऑफ वर्ल्ड हिस्टरी' और बायोग्राफी 'टुवर्ड फ्रीडम' कई किताबें लिखी हैं. पंडित नेहरू जी के विशाल हृदय का अंदाजा और इस माटी से लगाव का अंदाजा उनके लिखे हुए वसीयत से आईने की तरफ साफ़ हो जाती है जो कुछ इस प्रकार है - मैं चाहता हूं कि मेरी मुट्ठीभर राख प्रयाग के संगम में बहा दी जाए जो हिन्दुस्तान के दामन को चूमते हुए समंदर में जा मिले, लेकिन मेरी राख का ज्यादा हिस्सा हवाई जहाज से ऊपर ले जाकर खेतों में बिखरा दिया जाए, वो खेत जहां हजारों मेहनतकश इंसान काम में लगे हैं, ताकि मेरे वजूद का हर जर्रा वतन की खाक में मिलकर एक हो जाए...     


हे ! मन मैं कैसे मान लूँ 
अब सब एक रंग होगा 
हे ! मन मैं कैसे मान लूँ 
अब एक बाग़ होगा 
ना कोई गाँधी ना कोई नेहरू 
अब इनका नामों निशां नहीं होगा 
एक तरह के फूल होंगे 
बाग़ भी एक हीं होगा 
मैं कैसे मान लूँ 
की ऐसा हीं अब होगा 
यहां तो अनेक बाग़ हैं 
उनके फूल विविध है 
अब कैसे मान लूँ सब एक साथ है 
नफरत का जहर घुल रहा है 
हमारी बागों में 
इस जहर को फ़ैलाने में 
किसका दोष दूँ 
हे ! मन मैं कैसे मान लूँ 
सब एक संग होंगे।

"गिरि"   

Saturday, May 25, 2019

इस चुनाव में गांधी हारे गोडसे जीता

सर्वप्रथम बीजेपी/संघ को २०१९ का लोकसभा चुनाव इतने विशाल अंतर से जितने के लिए बधाई। इस आम चुनाव ने देश के तमाम मिथक को तोड़ कर रख दिया है. ऐसा प्रतीत होता है कि देश की आवाम ने जहां से २०१४ चुनाव को छोड़ा था वहीं से फिर से दुबारा शुरुआत किया है. जात-पात, धर्म-सम्प्रदाय से ऊपर उठकर जनता ने बीजेपी पर भरपूर वोटों की बारिश की है. जनता ने वोट क्यों दिया अगर आप उनसे पूछोगे तो बस दो-तीन तरह के उत्तर मिलते हैं पहला जबाब जबाब होता है मोदी है, दूसरा जबाब होता है कि बीजेपी हिन्दूओं की पार्टी है और तीसरा पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक मोदी ने किया है. इससे पहले की तो कांग्रेस सरकार निकम्मी थी. कांग्रेस माँ-बेटे की पार्टी है. राजाओं की पार्टी है जबकि मोदी तो गरीब माँ का बेटा है. मोदी के बही की कोई कम्पनी नहीं हैं. मोदी की अपनी कोई औलाद नहीं है तो वह किसके लिए भ्र्ष्टाचार करेगा जबकि कांग्रेस में सब भ्र्ष्ट हैं और राहुल गाँधी तो पप्पू है. कांग्रेस का तब तक कुछ नहीं हो सकता जब तक उसके पास पप्पू है पर जैसे हीं उनसे पूछो कि मोदी ने आपके भविष्य के लिए क्या किया, आपके वर्तमान में क्या बदलाव आया तब वो चुप हो जाते हैं मानो की अब उनके पास कोई जबाब नहीं बचा है. आज के परिणाम में गांधी परिवार का अमेठी जैसा किला ढह गया ठीक वैसे हीं जैसे ९ महीने पहले हुए उपचुनाव में बीजेपी का गोरखपुर ढह गया था.

इस चुनाव से दो-तीन बातें बहुत साफ़ हो गयी है कि अब इस देश का मानस में बहुत बदलाव आ चुका है. उसका दो-तीन प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से मैं प्रकाश डालने की कोशिश कर रहा हूँ -

१) साध्वी प्रज्ञा का भोपाल से जीतना - इस चुनाव में साध्वी प्रज्ञा भजपा/संघ की तरफ से उग्र हिंदुत्व के एक पोस्टर ब्यॉय के तौर पर उभरी हैं. जो प्रयोग बीजेपी ने मध्य प्रदेश के भोपाल से आतंक के आरोपी प्रज्ञा ठाकुर को लोक सभा का चुंबाव लड़ाकर किया और मोदी-शाह की जोड़ी समेत बीजेपी के सभी पदाधिकारियों ने उसका समर्थन किया उससे लगता है कि संघ/भाजपा अपने मंसूबों में पूरी तरह सफल रही क्योंकि ये लोग धीरे-धीरे देश को इसी विमर्श की तरफ ले जाने की कोशिश काफी लम्बे समय से कर रहे थे. क्योंकि इनकी प्रथमिकता ये है कि देश को एक रंग में रंग दिया जाए, देश में एक हीं सोच हो जिसे हर किसी के ऊपर थोप दिया जाए, देश में केवल एक विचार का बोलबाला हो और कमाल की बात ये है कि अब जनता भी बीजेपी/संघ के इस कृत्य का साथ दे रही है. जिस भाषा को संघ/बीजेपी वाले पर्दे के पीछे बोलते थे अब उसे साध्वी प्रज्ञा और साक्षी जैसे उदण्ड नेता खुलेआम बोलते हैं. ये लोग राष्ट्रपिता बापू जी को देशद्रोही और हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताते हैं. ये सब कुछ एक दिन में नहीं हुआ या जुबान फिसलने से नहीं हुआ. इस स्तर के घटिया नेताओं को आगे करके ये काफी पहले से किया जा रहा है. जनता भी इसमें बराबर की भागिदार हो रही है. संघ कभी नहीं चाहा कि गाँधी जी और नेहरू जी का नाम इस देश में हो. नेहरू जी को तो संघ वाले खुलेआम गाली देते हीं थे अब वे गाँधी जी बारे में भी सार्वजनिक तौर पर अपमानजनक बातें करने से गुरेज नहीं कर रहें हैं. संघ/भाजपा के लोग गांधी जी और नेहरू जी के बारे में जो बातें अपनी शाखा के अंदर बोलते थे वो अब इनकी जुबान से बाहर भी आने लगे हैं.

२) जनता का मुद्दों को भूल जाना - जनता इस आम चुनाव में तमाम सारे ज्वलंत मुद्दों को भूलकर बस एक चेहरे पर आकर्षित हो गयी जिसका नाम नरेंद्र मोदी था. जनता ने महंगाई के मुद्दे को भूला दिया, युवाओं ने रोजगार के मुद्दे को भूला दिया, किसानों ने अपनी बदहाली और बढ़ती आत्महत्या को भूला दिया। ये सब एक परिवर्तन हीं तो है और इसे आश्चर्यजनक परिवर्तन कहा जा सकता है. बताओ जिस उज्ज्वला योजना के तहत ६ करोड़ से ज्यादा गैस सिलंडर बांटे गए और सरकारी आंकड़ें बताते हैं कि ८० प्रतिशत सिलंडर दुबारा भरवाए नहीं गए क्योंकि गैस के दाम बहुत ज्यादा थे. गृहणियां इस ब्यथा को भी भूल गयी तो इसे हम मोदी मोह हीं कहेंगे।           

Monday, May 20, 2019

एक्जिट पोल में बीजेपी की बम्पर जीत

कल के चुनाव के साथ हीं एक लम्बे और उबाऊं लोकसभा की सभी सीटों का चुनाव सम्पन्न हो गया. सब मिलाजुलाकर वोटिंग ठीक-ठाक रही. औसत में न तो बहुत काम हुई न तो बहुत ज्यादा। अलबत्ता कुछ पूर्वी राज्यों को छोड़ दिया जाय तो देश के अन्य हिस्सों में वोटिंग सामान्य हीं रही. अब वोटिंग खत्म होने के बाद टीवी पर एक मनोरंजन चल रहा है जिसका नाम एक्जिट पोल है। अलग-अलग चैनलों ने अपना अलग एक्जिट पोल किया है और तकरीबन सभी चैनलों में एकाध को छोड़कर बीजेपी और उसके गठबंधन को बहुत बड़ी जीत दिखा रहें हैं और सीटों की संख्या 365 तक बता रहें है. एक्जिट पोल देखकर सताधारी पक्ष के लोग खुश हो रहें हैं तो विपक्ष के लोग मायूसी के साथ लड़ाई में बने की रहने की बात कह रहें हैं और कुछ पुराने पोल का हवाला देते हुए अपने दिल के बोझ को हल्का करने की कोशिश कर रहें हैं.

अगर हम एक्जिट पोल को आधार मानकर अगर इस परिणाम की कल्पना करें तो ये कह सकते हैं कि अबकी बार मोदी नाम की सुनामी चल रही है और फिर वो संख्या बहुत ऊपर जायेगी। लेकिन इनमें सबसे हतप्रभ करने वाला पोल उत्तर-प्रदेश से आ रहा है जहाँ सपा, बसपा और रालोद गठबंधन बीजेपी के आगे कही भी नहीं टिक पा रहा है और एक तरह से महागठबंधन धुल फांकता हुआ नजर आ रहा है पर अनुमान से जमीनी स्थिति भिन्न है.  ज्यादा धूप होने की वजह से हो सकता है कि जमीन की सच्चाई गोदी मीडिया के रडार से गायब हो गयी हो और हकीकत जान न पाए हों. मेरी आगे की चिंता ये है कि अगर यूपी में सपा, बसपा का गठबंधन फ़ैल होता है तो उसके कई सियासी मायने निकलेंगे। पहला सियासी मायना ये होगा कि इन दोनों क्षेत्रीय पार्टियों के भविष्य पर अस्तित्व का संकट गहराने लगेगा और दूसरा ये कि फिर से कांग्रेस के उदय का रास्ता साफ़ होंगा और ये दोनों राष्ट्रीय पार्टियाँ हीं यहां पर एक-दूसरे के आमने-सामने होंगी। फिर भी मैं कहूंगा कि फैसले का दिन 23 मई निर्धारित है उसी दिन इन बातों पर बात करने से कुछ सार्थक निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है. आज किसी परिणाम पर पहुंचने का मतलब होगा अति-उत्साह में होश खो देना।

एग्जिट पोल का परिणाम 2004 से लोगों के बीच में प्रचलित हुआ और कुछ एग्जिट पोल के कुछ आंकड़ें यहां प्रदर्शित हो रहा है और 2019 का परिणाम का दिन 23 होगा -

2004 एग्जिट पोल 

• NDA : 230 to 275
• UPA : 176 to 199

परिणाम 

• NDA : 187 (BJP : 138)
• UPA : 219 (Congress : 145)

2009 एग्जिट पोल 

• NDA : 165 to 195
• UPA : 185 to 205

परिणाम 

• NDA : 159
•UPA : 262

2014 एग्जिट पोल 

• NDA : 183 to 289
• UPA : 92 to 120

परिणाम 

• NDA : 336 (BJP : 282)
• UPA : 60 (Congress : 44) 

Saturday, May 18, 2019

राष्ट्रपिता पर साध्वी के विवादास्पद बयान से बीजेपी मुसीबत में और कांग्रेस ने बनाया मुद्दा

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा, मध्य प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता अनिल सौमित्र के दिए हुए बयानों से लगता है बीजेपी के सामने बहुत बड़ी चुनौती खड़ी हो गयी है. बीजेपी को आखिरी चरण के चुनाव में नुकसान होता दिखाई दे रहा है तभी आनन-फानन में बीजेपी शीर्ष नेतृत्व ने अपने आप को उन विवादास्पद बयानों से अलग कर लिया और इन नेताओं को जनता से माफी मांगने के लिए कहा तथा भौमिक को पार्टी से निलंबित कर दिया। हालांकि इन लोगों ने माफी भी मांग ली पर लगता है कि कांग्रेस ने अब इन मुद्दों पर आगे बढ़ने का मन बना लिया है. पूरा देश जानता हैं नाथूराम गोडसे ने बापू जी की हत्या 30 जनवरी 1948 प्रार्थना सभा में जाते समय गोली मारकर की थी और अदालत ने बाद में गोडसे को फांसी की सजा दी थी. गांधी जी ने अपने जीवन के 12 हजार 75 दिन स्वतन्त्रता संग्राम को समर्पित किया था. देखते हीं देखते कांग्रेस ने गांधी जी की फोटो अपने सभी अकाउंट वाल पर लगा लिया है और सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो शेयर करके इस मुद्दे को लेकर बीजेपी/संघ पर जोरदार हमला बोला है. बीजेपी साक्षी महाराज, हेगड़े, प्रज्ञा ठाकुर जैसे बड़बोले नेताओं की वजह से बार-बार बगलें झाँकने को मजबूर हुई है पर कांग्रेस के कार्यकर्ता इस बार इस मुद्दे को भुनाने की पूरी कोशिश में लगे हुए हैं। नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाले साध्वी प्रज्ञा के बयान पर प्रधानमंत्री जी ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए एक न्यूज़ चैनल बात करते हुए कहा, 'ये बयान बेहद खराब बयान है और आलोचना के लायक है। सभ्य समाज के अंदर इस तरह की भाषा नहीं चलती। ऐसा कहने वालों को आगे से 100 बार सोचना होगा। हर प्रकार से घृणा के लायक नहीं है, जितनी निंदा की जाए उतना कम है। चाहे उन्होंने माफी मांग ली हो, लेकिन मैं मन से उन्हें कभी माफ नहीं कर पाऊंगा।' पर कांग्रेस के कार्यकर्ता देश के अन्य हिस्सों से जमीन से लेकर फेसबुक और ट्विटर तक बीजेपी को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहें हैं जिसकी वजह से बीजेपी के नेताओं पर तनाव साफ़-साफ़ देखा जा सकता है. परिणाम आने के बाद इस बयान के नफे-नुकसान की चर्चा होगी अभी के लिए बीजेपी पिछले पैर पर है।


Friday, May 17, 2019

यह चुनाव विकास से होते हुए गोडसे देशभक्त पर समाप्त

आज महज कुछ घंटों के बाद लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के प्रचार का पटाक्षेप हो जायेगा। सभी पार्टियां अपने-अपने दावे और आंकड़ों के आधार पर 23 मई दोपहर तक अपनी-अपनी सरकार बनाएंगी उसके बाद चुनाव आयोग आधिकारिक तौर पर एक अंतिम आंकड़ा दे देगा फिर सारी बकवास खत्म हो जायेगी और किसी एक पक्ष या तीसरे पक्ष की सरकार की उम्मीद हो जायेगी। जहां तक मेरा आंकलन है तो स्प्ष्ट तौर पर न तो किसी पार्टी और न हीं किसी गठबंधन को बहुमत मिलने जा रहा है. इस स्तिथि में उन दलों की भूमिका ज्यादा महत्वपूर्ण हो जायेगी जो न तो इस खेमें में शामिल हैं और न हीं उस खेमें में. जैसे बीजद, टीआरएस, वाई एस आर कांग्रेस, टीएमसी जैसी मुख्य एवं शक्तिशाली क्षेत्रीय पार्टियों का रूख आगामी सत्ता के लिए अहम होगा।

यह चुनाव मेरे ख्याल से इतिहास का अब तक का सबसे गंदा चुनाव रहा होगा जिसमें सारी मर्यादाएं चूर-चूर हो गयी, न बात की कोई मर्यादा बची और न हीं भाषा की. यह चुनाव विकास के नाम से शुरू हुआ और भारत-पाकिस्तान, देशभक्त-देशद्रोही, हेमंत करकरे मेरे श्राप से मरा, करकरे देशद्रोही था, कांग्रेस की विधवा, भ्र्ष्टाचारी नंबर वन के रूप में जीवन समाप्ति, बंगाल हिंसा, चुनाव आयोग की दोहरी भूमिका, बुआ-बबुआ के जुमले से होते हुए कल "गोडसे देशभक्त" तक आ पहुंचा है. हम और क्या उम्मीद कर सकते हैं अपने इन मंदबुद्धि आतंक छाप नेताओं से. कल बम ब्लास्ट की आरोपी और मध्य प्रदेश के भोपाल लोकसभा क्षेत्र से राष्ट्रभक्त पार्टी बीजेपी के उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने खुलेआम टीवी मीडिया के माध्यम से कहा कि " नाथू राम गोडसे कल भी देशभक्त था और आज भी तथा कल भी देशभक्त रहेगा". जैसे हीं बीजेपी के नेताओं को इस बात की भनक लगी तो आनन-फानन में उन्होंने एक पत्रकार वार्ता बुलाई और उनके बयान की निंदा करते हुए जनता से सार्वजनिक माफी की मांग की क्योंकि बीजेपी को आदेश हो चुका था कि इनका हेमंत करकरे के संबंध में दिया गया एक बयान बीजेपी को कितना भारी पड़ चुका है और अब तो बात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की है और अभी 54 सीटों पर चुनाव होना बाकी है तो तुरंत डैमेज कंट्रोल की कहानी शुरू हो गयी और बहजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री जी दोनों ने उनके इन बयानों की निंदा की. निंदा इसलिए  कि प्रज्ञा और हेगड़े ने गाँधी जी को अपशब्द कहा बल्कि निंदा इस लिए की कि 2 दिन बाद अंतिम चरण का वोट पड़ने वाला है और उसमें इनको भयंकर हानि होती अन्यथा अंदर से तो इनकी हीं भाषा वो बोली हैं। जो बीजेपी के लिए अब उलटा पड़ रहा है. कल रात का सूरज ढला और आज सूरज निकला इतने में बीजेपी के दो नेता जिसमें एक कर्नाटक से मंत्री है जिनका नाम अनंत कुमार हेगड़े हैं वो तो प्रज्ञा से दो कदम आगे निकलते हुए बोले कि माफी की कोई जरूरत नहीं है और जो बात 7 दशक से नहीं हुई उस पर अब सार्वजनिक तौर पर बहस होनी चाहिए और उन्होंने कहा कि गोडसे की देशभक्ति पर चर्चा अब नहीं होगी तो कब होगी। वैसे आप सबकी जानकारी की लिए बता दूँ कि हेगड़े संघ के बड़े वफादार कार्यकर्ता है. बीजेपी/संघ की शाखा में मेरे गांव से भी कुछ बच्चे-बूढ़े जाते हैं और उनकी बात सुनकर शायद आप हतप्रभ हो जाएंगे वो भी वही बात बोलते हैं जो अनंत हेगड़े या प्रज्ञा ठाकुर बोल रही है. मैं पूरी जिम्मेदारी से कह सकता हूँ कि संघ अपनी शाखा में गाँधी, नेहरू के प्रति केवल दुष्प्रचार करना सिखाता है. प्रज्ञा और हेगड़े की बयान को मैं मजाक में नहीं टाल सकता क्योंकि मैं इन शब्दों के इनके विमर्श के रूप में देखने की कोशिश कर रहा हूँ. गोडसे गांधी जी का हत्यारा हीं नहीं बल्कि एक आंदोलन का हत्यारा भी था और रही बात इन चतुर्थ श्रेणी के नेताओं की बात तो उनको समझ लेना चाहिए कि गाँधी कोई ब्यक्ति नहीं थे, कोई शरीर नहीं थे जो स्वर्गवासी हो गए तो खत्म हो गए. गांधी एक विचार है वो तब तक ज़िंदा रहेंगे जब तक सबकी सांस चलती रहेगी।

Tuesday, May 14, 2019

मोदी जी के डिजिटल कैमरे का प्रयोग, झूठ और उसकी पड़ताल

न्यूज़ नेशन नामक एक टीवी चैनल के पत्रकार दीपक चौरसिया को दो दिन पहले प्रधानमंत्री महोदय ने एक साक्षात्कार दिया था. उस साक्षात्कार के दौरान प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ने कुछ ऐतिहासिक झूठ बोले है जिनका मैंने तथ्यों के साथ अध्ययन किया तो पाया की उनके द्वारा काही गयी बात सरासर झूठी हैं उसमें लेस मात्र की सच्चाई नहीं है. उस साक्षत्कार में मोदी जी कहते हैं कि " मैंने पहली बार डिजिटल कैमरे का उपयोग किया था 1987-88 उस समय बहुत कम लोगो के पास ई-मेल रहता था. मेरे यहां बीरम गॉव तहसील में आडवाणी जी की सभा थी तो डिजिटल कैमरे से मैंने उनकी फोटो ली वो कैमरा बड़ा था (हाथ से कैमरे की साइज बताते हैं ) और उस फोटो को मैंने दिल्ली ट्रांसमिट की और दूसरे दिन आडवाणी जी की कलर फोटो छपी तो वो आडवाणी जी बहुत सरप्राइज हुए कि दूसरे दिन मेरी कलर फोटो कैसे छपी". तो आज मैं प्रधानमंत्री जी कहे हुए और सरकारी दस्तावेज में दर्ज हुए आंकड़ों का मिलान करने की कोशिश करूंगा. जिससे दूध का दूध और पानी का पानी साफ़ हो जाय - 

आज की मेरी पड़ताल मोदी जी के ई-मेल पर फोटो अटैचमेंट और भारत में ई-मेल सेवा शुरू कब हुई उससे होगी। कुछ तथ्य मिले हैं जिन्हें मैं आपके सामने रखने की कोशिश कर रहा हूँ -

31 मार्च 1986 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री राजीव गाँधीव जी ने VSNL (विदेश संचार निगम लिमिटेड) का गठन किया.

2 अक्टूबर (गांधी जयंती ) 1991 को VSNL ने ई-मेल लांच किया उस समय नरसिम्हा राव देश के प्रधान मंत्री थे.

24 मई 1992 तक भारत में मात्र 100 ई-मेल खाता धारक थे, जिनमें मुंबई में 50 तो दिल्ली में 25 और कुछ चुनिंदा संस्थान जैसे भाभा अटॉमिक रिसर्च सेंटर, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस शामिल थे.

स्रोत : 24 फरवरी 1992 Times Of India  (रिपोर्टर के नाम की जगह स्टाफ रिपोर्टर लिखा है).

किसी भी मेल के साथ पहला अटैचमेंट मार्च 1992 में प्रयोग किया गया जो एक तस्वीर थी और भेजने वाले का नाम नथानिया बोरेंस्टाइल था. जो अमेरिकी नागरिक था.

इंटरनेट सेवा 15 अगस्त 1995 को VSNL ने लांच किया. 

जब नेट और अटैचमेंट की बात हो हीं रही है तो इससे हट कर एक और बात कर लिया जाय कि जब मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल किया तो उस समय वो पहला ब्यक्ति कौन था जिसने मोबाइल काल किया और किसको किया ये भी जान लेना उतना हीं जरूरी जितना की मोदी जी का फोटो अटैचमेंट भेजना.

अगस्त 1995 में पहला मोबाइल फ़ोन काल पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री श्री ज्योति बसु जी ने तब के संचार मंत्री श्री पंडित सुखराम को किया था.

इन दावों  के बाद आपको यकीन हो जाना चाहिए कि देश के प्रधानमंत्री महोदय केवल बदजुबानी करते है और वो बदजुबानी अब तो रडार की उचाई तक पहुंच गयी है. बकौल मोदी जी "सर्जिकल स्ट्राइक के दिन अफसरों के खा था कि मौसम खराब है, बारिश हो रही है तो हम स्ट्राइक का दिन बदल देते हैं तो महान वैज्ञानिक श्री नरेंद्र  कहते हैं कि नहीं आसमान में बादल है, मौसम खराब है आज अगर हम स्ट्राइक करते हैं तो हमारे लिए अच्छा होगा क्योकि बदली होने की वजह से हमारे विमान को पाकिस्तानी राडार पकड़ नहीं पायेगा". साहेब ने तो रक्षा विज्ञान और इसरो तक को हिला कर रख दिया है अपने इस अनोखे तकनीक के माध्यम से.

इन तथ्यों का पड़ताल करने से पता चलता है कि 1987-88 में ई-मेल भेजने का मोदी जी का दावा गलत साबित होता है.


Monday, May 13, 2019

आईपीएल फाइनल के रोमांचक मुकाबले में चेन्नई को मुंबई ने 1 रन से हराया

कल आईपीएल का समापन हो गया. डेढ़ महीने के लम्बे सफर को तय करते हुए अंततः अपनी समापन की बेला को प्राप्त हुआ. इस टूर्नामेंट की दो बेहतरीन टीमें कल हैदराबाद में आमने-सामने हुई जिनका नाम मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपरकिंग्स था. कल जब मैच शुरू हुआ और मुंबई ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने का निर्णय लिया और रोहित शर्मा और क्विंटन डीकॉक सलामी जोड़ी जब मैदान पर उत्तरी और तेजी से खेलना शुरू किया खासकर डिकॉक तब तक तो ऐसा लग रहा था कि मुंबई इंडियंस एक अच्छा टोटल कम से कम 180 रन तो बनाएगी हीं पर 29 के निजी स्कोर पर जब डिकॉक आउट होकर बाहर गए और उनके कुछ देर बाद रोहित शर्मा और सूर्य प्रकाश आउट हुए तभी ऐसा समझ में गया कि मैच अब खत्म हो गया है.

Thursday, May 9, 2019

क्या छठे चरण में मोदी का तिलिस्म तोड़ पाएंगे माया-अखिलेश

लोकसभा चुनाव अब समाप्ति की तरफ अग्रसर है जैसा की हम सभी को पता है कि वर्ष 2019 का आम चुनाव 7 चरणों में सम्पन्न होगा ऐसा भारतीय चुनाव आयोग पूर्व में हीं घोषित कर चुका है. तीन दिन बाद 12 मई को छठे दौर का मतदान होगा और उसमे पूर्वांचल को देखना सबसे दिलचस्प पहलू होगा. क्योंकि उत्तर प्रदेश हीं ऐसा प्रदेश है जो हर बार की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री का चुनाव करने में महत्वपूर्ण भूमिका में रहेगा। मेरी नजर यहां की 14 सीटों पर जिसमें पिछली बार आजमगढ़ को छोड़कर बाकी सभी सीटें बीजेपी ने जीती थी. तो अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या सपा-बसपा बीजेपी से कुछ सीटें छीनती हैं या बीजेपी अपने 2014 के प्रदर्शन को दोहराने में कामयाब रहती है. जहां तक मैंने 2014 के नतीजों का सीटवार आंकलन किया तो आंकड़ों में सपा-बसपा के सामने बीजेपी कहीं नहीं ठहर रही है और ये आंकड़ें उस वक्त के हैं जब तथाकथित मोदी लहर थी. 2014 के आंकड़ों को मैं यहां आपके सामने लाने की कोशिश करूंगा जिसे देखकर, गणितीय गणना करके आप खुद एक निश्चित आंकड़ें तक पहुंच जाएंगे.

उत्तर प्रदेश में छठे चरण का सीटवार विश्लेषण इस प्रकार है -

श्रावस्ती 

विजयी : ददन मिश्रा : भाजपा : वोट प्राप्त 3,45,964
अतीक अहमद : सपा : 2,60,051
लालजी वर्मा : बसपा : 1,94,890
सपा और बसपा मिलाकर : 4,54,890
फायदा : सपा+बसपा

2019 में प्रत्याशी
ददन मिश्रा : भाजपा
धीरेंद्र प्रताप सिंह : कांग्रेस
राम शिरोमणी वर्मा : सपा+बसपा

डुमरियागंज 

विजयी : जगदंबिका पाल : भाजपा : 2,98,845
माता प्रसाद पांडे : सपा : 1,74,778
मुहम्मद मुकीम : बसपा : 1,95,257
सपा और बसपा मिलाकर : 3,70,035
फायदा : सपा+बसपा

2019 में प्रत्याशी
जगदंबिका पाल : भाजपा
आफताब आलम : सपा+बसपा

सुलतानपुर 

विजयी : वरुण गांधी : भाजपा : 4,10,348
पवन पांडे : बसपा :  2,31,446
शकील अहमद : सपा : 2,28,114
सपा और बसपा मिलाकर : 4,59,590
फायदा : सपा+बसपा

2019 में प्रत्याशी
मेनका गांधी : भाजपा
संजय सिंह : कांग्रेस
चंद्रभद्र सिंह : सपा+बसपा

प्रतापगढ़ 

विजयी : कुंवर हरिवंश सिंह : भाजपा : 3,75,779
आसिफ निजामुद्दीन : बसपा : 2,07,567
प्रमोद कुमार सिंह पटेल: सपा : 1,20,107
सपा और बसपा को मिलाकर : 3,27,674
फायदा : भाजपा

लालगंज 

विजयी : नीलम सोनकर : भाजपा : 3,24,016
डॉ. बलिराम-बसपा : 2,33,971
बेचाई सरोज : सपा : 2,60,930
सपा और बसपा को मिलाकर : 4,94,901
फायदा: सपा+बसपा

2019 में प्रत्याशी
नीलम सोनकर : भाजपा
पंकज मोहन सरकार : कांग्रेस
संगीता : सपा+बसपा

आजमगढ़ 

विजयी : मुलायम सिंह यादव : सपा : 3,40,306
रामाकांत यादव : भाजपा : 2,77,102
शाह आलम : बसपा : 2,66,528
सपा और बसपा को मिलाकर : 6,06,834
फायदा : सपा+बसपा

2019 में प्रत्याशी
दिनेश लाल यादव निरहुआ : भाजपा
अखिलेश यादव : सपा+बसपा

जौनपुर  

विजयी : कृष्ण प्रताप : भाजपा- 3,67,149
पारसनाथ यादव : सपा-1,80,003
सुभाष पांडेय : बसपा-2,22,0839
सपा और बसपा को मिलाकर : 4,00,842
फायदा : सपा+बसपा

2019 में प्रत्याशी
के.पी. सिंह : भाजपा
देवव्रत मिश्रा : कांग्रेस
श्याम सिंह यादव : सपा+बसपा

मछलीशहर

विजयी : राम चरित्र निषाद : भाजपा : 4,38,210
तूफानी : सपा-1,91,387
भोलानाथ : बसपा - 2,66,055
सपा और बसपा को मिलाकर : 4,57,442
फायदा : सपा+बसपा

2019 में प्रत्याशी
वीपी सरोज : भाजपा
त्रिवेणी राम : सपा+बसपा

भदोही

विजयी : वीरेंद्र सिंह : भाजपा- 4,03,695
सीमा मिश्रा : सपा-2,38,712
राकेश धर त्रिपाठी : बसपा- 2,45,554
सपा और बसपा को मिलाकर : 4,84,266
फायदा : सपा+बसपा

2019 में प्रत्याशी
रमेश बिंद-भाजपा
रमाकांत यादव- कांग्रेस
रंगनाथ मिश्रा- सपा+बसपा

बस्ती

विजयी : हरीश द्विवेदी : भाजपा- 3,57,680
बृजकिशोर सिंह : सपा-3,24,118
रामप्रसाद चौधरी : बसपा - 2,83,747
सपा और बसपा को मिलाकर : 6,07,865
फायदा : सपा+बसपा

2019 में प्रत्याशी
हरीश द्विवेदी : भाजपा
रामप्रसाद चौधरी : सपा+बसपा


संतकबीर नगर

विजयी : शरद त्रिपाठी : भाजपा- 3,48,892
भीष्म शंकर उर्फ कौशल तिवारी : बसपा- 2,50,914
धालचद्र यादव : सपा - 2,40,169
सपा और बसपा को मिलाकर : 4,91,083
फायदा : सपा+बसपा

2019 में प्रत्याशी
प्रवीण कुमार निषाद : भाजपा
भीष्म शंकर उर्फ कौशल तिवारी : सपा+बसपा

इलाहाबाद

विजयी : श्याम चरण गुप्ता : भाजपा- 3,13,772
केशरी देवी : बसपा - 1,62,073
कुंवर रेवती रमण सिंह : सपा - 2,51,763
सपा और बसपा को मिलाकर : 4,13,836
फायदा : सपा+बसपा

2019 में प्रत्याशी
रीता बहुगुणा : भाजपा
राजेंद्र सिंह पटेल : सपा+बसपा


अंबेडकर नगर

विजयी : हरि ओम पांडेय : भाजपा- 4,32,104
राकेश पांडेय : बसपा- 2,92,675
राममूर्ति वर्मा : सपा- 2,34,467
सपा और बसपा को मिलाकर : 5,22,142
फायदा : सपा+बसपा
2019 में प्रत्याशी

मुकुट बिहारी वर्मा : भाजपा
रितेश पांडेय : सपा+बसपा

फूलपुर

विजयी : केशव प्रसाद मौर्या (उप-मुख्यमंत्री ) : भाजपा : 5,03,564
कपिल मुनी करवारिया : बसपा : 1,63,710
धर्म राज सिंह पटेल : 1,95,082
सपा बसपा को मिलाकर : 3,58,792
फायदा : भाजपा

2019 में प्रत्याशी
केशरी पटेल : भाजपा
पंधेरी यादव : सपा+बसपा

स्रोत : ECI & NDTV Hindi  

अगर आप इन सीटों के मतों के जोड़ पर यकीन रखें तो आप देख सकते हैं कि फूलपुर और प्रतापगढ़ के अलावा बीजेपी हर जगह निचे है या कहने हारने की स्तिथि में है. यही जमीनी सच्चाई भी है. ये दोनों मिलकर सत्ताधारी पार्टी को बहुत कड़ी चुनौती दे रहें हैं. यह चुनाव अब कोई सामान्य चुनाव नहीं रहा है जैसा कि (मैंने एक पहले हीं लेख लिखा था जब सवर्ण आरक्षण का विधेयक संसद से पास हुआ था) सवर्ण आरक्षण देने से ऊँची जातियाँ तो खुश हुई परन्तु जमीन पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन-जाति व अन्य पिछड़े वर्ग को आरक्षण के संदर्भ में चिंता होने लगी और उसी का फायदा सपा और बसपा ने अंदर हीं अंदर खूब उठाया है. मेरे आंकलन के अनुसार छठे चरण में सपा-बसपा सूपड़ा साफ़ कर सकती हैं.   

Wednesday, May 8, 2019

अबकी चुनाव में राम का कम पाक का शोर ज्यादा

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आता जा रहा है वैसे-वैसे चुनावी बयानों में तल्खियां बढ़ती जा रही है. क्योंकि असल खेल तो वोट का है. इस वोट के खेल में सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़े फर्जी तरिके से फैला दिए जाते हैं. नसों नामक एक संस्था हैं जो बेरोजगारी के आंकड़ों पर नजर रखती थी खैर इस सरकार ने उसके प्रकाशन पर रोक लगा दी है उसका कहना है कि इसमें ३६ प्रतिशत कंपनियों का कोई पता हीं नहीं है जिनके अंशदान का जीडीपी जिक्र है पर इस पर सवाल कौन करेगा और जबाब देने की जहमत कौन उठाएगा. अब आखिर के दो चरण का चुनाव बच रहा है तो जुबानों से जहर के बुझे हुए तीर हर तरफ से छोड़े जा रहे हैं और कुछ चाटुकार लोग उसके समर्थन में नारे लगा हर हैं तो कुछ दूसरी तरफ की चाटुकारिता करने में ब्यस्त हैं. ब्यस्त दोनों तरफ वाले हैं. एक तरफ से "चौकीदार चोर है" का नारा निकल रहा है तो उसका जबाब फिल्म कालिया की तरफ आ रहा है कि "तुम्हारा बाप चोर है" . अब इसमें चोर कौन है जनता २३ मई को बता देगी और जिसका बाप चोर है उसकी बात की जाय तो वो अब इस दुनिया में नहीं हैं

यह चुनाव गायब विकास के नाम से शुरू हुआ था और आज तुम्हारा बाप चोर है तक का अपना सफर बिना किसी कठिनाई पार कर चुका है. ताज्जुब की बात ये है कि इस चुनाव में भक्तों को "भगवान राम की याद कम आयी और पकिस्तान की ज्यादा". पाकिस्तान का जिक्र हमारे चुनाव में इतनी बार हुआ है जितना खुद पाकिस्तानी अपने इस बदहाल मुल्क का नाम नहीं लेते होंगे. आज भगवान राम को भी बहुत कष्ट हो रहा होगा कि राम भक्त तो अब पाकिस्तान भक्त हो गए है. अब इसे विडंबना कहें या भक्तों की मजबूरी. जो कभी राम के नाम पर वोट मांगते थे वो आज पाकिस्तान के नाम पर वोट मांग रहे हैं. शायद शास्त्रों में इसी तरह के बदलाव को सृष्टि का बदलाव नाम दिया गया है. फिर भी हम देशवासी हिम्मत नहीं हारे हैं क्योंकि हमारा सहारा तो एक मात्र प्रभु श्री राम हीं हैं. पाकिस्तान को बस चुनाव के लिए प्रवेश हुआ है चुनाव बाद हम उसे लात मार सीमा से बाहर फेक देंगे फिर लव-जिहाद, धर्म के नाम पर हिंसा, रसोई को खंगालना, गाय के नाम पर लोगों को पीटना, वगैरह-वगैरह। हम समय के साथ बदलने वाले लोग है और इसी के साथ जय श्री राम का नारा बुलंद करते हुए कामना करते हैं कि अगली सरकार सबके भविष्य का ख्याल रखने वाली होगी.



Monday, May 6, 2019

प्रचार में मोदी का राजीव गाँधी पर अनर्गल टिप्पणी

कल की चुनाव रैली में देश के प्रधान मंत्री ने आतंकी हमले में 1991 में शहीद हुए भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री राजीव गाँधी जी के संदर्भ में राहुल गाँधी को सम्बोधित करते हुए कहा कि आपके पिताजी को आपके राज दरबारियों ने गाजे-बाजे के साथ मिस्टर क्लीन बना दिया था. लेकिन देखते ही देखते भ्रष्टाचारी नम्बर वन के रूप में उनका जीवनकाल समाप्त हो गया. नामदार यह अहंकार आपको खा जाएगा. ये देश गलतियां माफ करता है, मगर धोखेबाजी को कभी माफ नहीं करता.' यह अत्यंत निंदनीय एवं घिनौना बयान था और तो और यह बयान किसी पार्टी का छोटा कार्यकर्ता देता तो बात समझ में आती पर जब इस तरह का शब्द देश का प्रधानमंत्री बोले तो इससे ज्यादा बुरा, दुखद और निंदनीय कुछ भी न नहीं हो सकता. पूरा देश जानता है कि राजीव गांधी ने देश के युवाओं को वोट का अधिकार 18 साल की उम्र में दिया जो 21 साल होता था, राजीव जी ने हीं पंचायती राज की कल्पना की और उस पर काम कर के देश के सुदूर गाँव में बैठे लोगों के हाथ में ताकत दिया, राजीव गाँधी जी ने ही "सूचना क्रांति" का जाल इस देश के कोने-कोने में फैलाया इसके बारे में देश के हर जागरूक नागरिक को पता है. उस बारे में मोदी जी जनता को बहला नहीं सकते तो उन्होंने राजीव जी को भ्र्ष्टाचारी कह कर देश की जनता को बरगलाने का काम किया. हाँ एक बीजेपी के एक नेता अग्रवाल जी जो रायबरेली लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी के पूर्व उम्मीदवार भी रह चुके हैं (जो आजकल रायबरेली से सोनिया जी को जितने के लिए ). उन्होंने "बोफोर्स तोप" को लेकर राजीव जी पर घोटाले का आरोप लगाया था परन्तु माननीय हाई कोर्ट द्वारा राजीव गाँधी जी को उनके मरणोपरांत बाइज्जत बरी कर दिया था. तो इससे एक सवाल यह उठता है कि क्या भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी जी का हाई कोर्ट पर यकीन हैं, क्या नरेंद्र मोदी जी कोर्ट की अवमानना नहीं कर रहे हैं. परन्तु मोदी जी को जबाब देते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि मेरी तरफ से आपको इस नफरत भरी टिप्पणी के लिए प्यार. यहीं होती है इंसानियत जिसकी कमी वर्तमान प्रधानमंत्री में हैं. वो भूल जाते हैं कि कल को उनके बारे में भी ऐसा हीं बोला जाता है और उसे सही ठहराने के लिए मोदी जी का राजीव तर्क दिया जाएगा. अब कुछ ऐसे सवाल जनमानस के मन में तैरने लगे हैं. एक मृत ब्यक्ति के बारे में आप आरोप लगा रहे है जो कि आपको जबाब देने के लिए आज जिन्दा नहीं है. ऐसा करके आप हमारे धर्म के विचारों का और उनके पवित्र आत्मा का भी अनादर कर रहें है. मुझे और मेरे जैसे देश के करोड़ों लोगों को आपका यह बयान आपके ओछेपन चरित्र का प्रमाण देता है. रायबरेली और अमेठी की जनता ने उन्हें बहुत प्यार दिया है और प्रधानमंत्री जी के इस बयान ने यकीनन उन्हें काफी दुःख पहुंचाया है जिसका नुकसान निश्चित तौर बीजेपी को इन दोनों सीटों पर उठाना पड़ेगा क्योंकि राजीव जी की यादें वहां के लोगों की साँसों में बसी है. जिसको वहां के बासिन्दे आज भी महशूस करते हैं. 

मैंने अपनी 32 साल की उम्र में वर्तमान भाजपा नेताओं ने जैसे भाषा की मर्यादा गिराई है वैसा कभी नहीं देखा। विपक्ष में अटल जी जैसे बहुत बड़े कद के नेता थे, आडवाणी जैसे फायर ब्रांड नेता थे, सुषमा, जेटली, राजनाथ जी जैसे कद्दावर नेता थे पर उन्होंने इस तरह की नीचता अपने भाषाओँ के माध्यम से नहीं फैलाई जैसे की नरेंद्र मोदी जी और अमित शाह के आने के बाद भाजपा ने किया और उसमें सबसे अग्रिम पक्ति में मोदी जी स्वयं हैं. मोदी जी को समझने के बाद मणिशंकर अय्यर के बयानों की निंदा करने की गुंजाईश कम हो जाती है. इन लोगों ने चुनाव-दर-चुनाव भाषा की मर्यादा को गिराते हुए रसातल में लाकर खड़ा कर दिया है. अतिश्योक्ति नहीं होना चाहिए जब नरेंद्र मोदी जी और अमित शाह मंच पर खड़े होकर माँ-बहन की गाली बके और उनके अंध भक्त इसे देशभक्ति साबित करने पर तुल जाएँ वैसे भाजपा के हिमाचल प्रदेश प्रमुख ने भरे मंच से राहुल गांधी जी की माँ को गाली देने से शुरुआत कर दी हैं.               

Thursday, May 2, 2019

गढ़ चिरौली में 16 जवान शहीद और सत्ता प्रचार में ब्यस्त

कल गढ़ चिरौली, महाराष्ट्र मे नक्सली हमले में देश के 16 वीर जवान शहीद हुए. उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ और अपनी श्रद्धा सुमन करता हूँ.

कल एक बार फिर नक्सलियों ने देश के जवानों पर कायराना हमला किया और उसमें गाड़ी के ड्राइवर समेत 16 जवान वीर गति को प्राप्त हुए पर दुःख तब सबसे ज्यादा हुआ जब किसी भी नेता का चुनावी भाषण नहीं रूका और नहीं किसी ने इन जवानों के प्रति संवेदना प्रकट की. राजनेताओं ने एक ट्वीट से श्रद्धा सुमन अर्पित कर के अपने काम पर चले गए तथा शाम को प्राइम टाइम डिबेट में कुछ अपवादों को छोड़कर किसी ने सेना का जिक्र नहीं किया. ऐसी सरकार और ऐसी सत्ता को डूबकर कर मर जाना चाहिए कि जो जवान हमें बाहरी आततायियों से बचाते हैं उन्हीं के शहीद होने पर हम दो मिनट का वक्त नहीं निकाल पाए. भाषणों में तो सेना के नाम पर वोट बटोरे जाने की कला सीख लिए हैं पर जमीन पर उनके साथ दुःख की घड़ी में खड़ा होना नहीं सीखा. मैं हर राजनितिक पार्टी की बात कर रहा हूँ कि इनको बस सत्ता हथियाने की लालसा है और इससे ज्यादा कुछ नहीं. हमारे प्रधान मंत्री जी जितने झूठ बोलते हैं काश ! उसका आधा सच बोल देते और अपने संस्कार में उतार लेते तो देश का बहुत कल्याण हो जाता. साहेब ने जब 8 नवंबर 2016 को रात 8 बजे नोटबंदी की घोषणा की थी उस समय उन्होंने नोटबंदी से होने वाले कुछ फायदे भी गिनाये थे जिनमें आतंकवाद और नक्सलवाद भी प्रमुख थे. परिधानमंत्री के अनुसार नोटबंदी जैसे एक कदम मात्र से हीं इनका देश से खात्मा हो जाएगा पर हुआ कुछ नहीं पहले से ज्यादा आतंकी घटनाएं देश में बढ़ी, पहले से ज्यादा आतंकवाद और नक्सलवाद की घटनाएं देश में बढ़ी. उरी, पुलवाला, गढ़चिरौली जैसी घटनाएं प्रधान मंत्री जी को झूठा साबित करने के लिए काफी है. यही अगर वोट का माहौल नहीं होता तो जवानों के शहीद हुए शरीर का जलसा लगाया जाता और कैमरे बुला कर कैमरे के सामने स्वांग रचाया  जाता और देशभक्त का डंका गोदी मीडिया में पिटवाया जाता पर आज ऐसा क्यों नहीं हो रहा है तो उसका जबाब है कि गुजराती जोड़ी (मोदी-शाह) को वोट कटने का डर सता रहा है. किसी ने 16 जवानों के शहीद होने की खबर आज टीवी या मीडिया के अन्य प्लेटफार्मों पर देखी है तो बताओ शिवाय हिन्दू-मुस्लिम के पसंदीदा विषय के अलावा. सरकार को इतनी नाकामियों और जवानों के शहीद होने के बाद देश के लोगों से खुले मन से माफी मांग कर अपने पापों का प्रायश्चित कर लेना चाहिए.