कांग्रेस को तीन हिंदी भाषी राज्य को जीते अभी तीन सप्ताह भी नहीं बीते थे कि कांग्रेस पार्टी के लिए तमाम ऐसी खबरें आयी जो उसके जीत की ख़ुशी को काफूर करने के लिए काफी थी. राफेल मामले में देश के सर्वोच्च न्यायालय से फैसला सरकार के पक्ष में आया फिर इसी महीने की 16 तारीख से एक तरफ कांग्रेस के तीन नवनिर्वाचित नेता मुख्यमंत्री की शपथ लेने की अंतिम छण के करीब थे जभी 1984 की सिख विरोधी दंगे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का एक बहुत बड़ा फैसला आया जिसमें कांग्रेस पार्टी की और से दिल्ली से तीन बार के सांसद रह चुके सज्जन कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई ये सिलसिला यही तक नहीं रुका यहां से आगे बढ़ते हुए कांग्रेस के लिए नाक का सवाल बन चुका नेशनल हेराल्ड तक पहुंचा और एक तरह से कांग्रेस को आज दोपहर दिल्ली हाईकोर्ट से करारा झटका लगा और कांग्रेस की अपील को माननीय कोर्ट ने ख़ारिज करते हुए आईटीओ स्थित नेशनल हेराल्ड भवन (जो कि समाचार पत्र छपने के लिए किराये पर ली गयी थी) को दो हफ्ते के भीतर खली करने का आदेश पारित कर दिया.
नेशनल हेराल्ड है क्या-
यह अख़बार अंग्रेजी भाषा का एक महत्पूर्ण अखबार हुआ करता था इसका बहुत हीं गौरवपूर्ण इतिहास रहा है इस अखबार की स्थापना 9 सितम्बर 1938 में भारत के पहले प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री जवाहरलाल नेहरू जी के द्वारा किया था जो उस समय स्वंत्रता आंदोलन में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लेख छपने के नाम से मशहूर था यह अखबार तीन प्रुमख भाषाओँ में प्रकाशित जाता था जिसका नाम अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, उर्दू में कौमी आवाज तथा हिंदी में नवजीवन था. चर्चित होने की वजह से ब्रिटिश सरकार ने "भारत छोडो आंदोलन" के वक्त 1942 में कुछ सालों के लिए नेशनल हेराल्ड अखबार पर प्रतिबन्ध लगा दिया था जिसे कुछ सालों बाद हटा लिया गया था. इस अखबार का आजादी से पहले जनमानस में खासा प्रभाव था क्योंकि इसी अखबार के माध्यम से देश के तमाम बड़े स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अपनी-अपनी भावनाओं को जन-जन तक पहुंचाते थे इसलिए इस अखबार को स्वतंत्रता सेनानियों का "माउथ पीस" तक कहा जाता था. फिर देश आजाद हुआ और जब तक पंडित नेहरू जी जिन्दा थे जब तक इस अखबार से समयानुसार पत्रों की छपाई और बटाई चलती रही और नेहरू जी के देहांत के बाद यह अखबार उचित देख-रेख के अभाव में धीरे-धीरे जनता से दूर होता गया ठीक वैसे हीं जैसे नेहरू की सोच को इस देश हटाने को आज कोशिश की जा रही है. धीरे-धीरे इस पत्रिका का बाजार में बिकना बंद होता गया और अंततः 2008 में इस अखबार नेशनल हेराल्ड पत्र को बंद करना पड़ा.
इसके बाद नेशनल हेराल्ड के प्रबंधन ने ए जे एल (Associated Journals Limited) नामक एक संस्था के साथ मिलकर इसे चालू करने की योजना पर फिर से काम करना शुरू किया और 1 जून 2017 को फिर से इसके मूल भाषा अंग्रेजी में छपाई का काम शुरू किया या कहें तो एक तरह से फिर से दोबारा नेशनल हेराल्ड को शुरू किया गया. छपाई होने से पहले ही यह अखबार राजनितिक झगड़ों में फंस गया जिस मामले में कांग्रेस के तत्कालीन राष्टीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गाँधी और कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष श्री राहुल गाँधी जमानत पर बाहर है. इस मुद्दे को अदालत में ले जाने वाले भाजपा के और देश के सबसे बड़बोले नेता डॉ सुब्रमण्डयम स्वामी जी है जो इस मामले में राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी को आरोपी मानते हैं...........
अब अगली अपील अब सुप्रीम कोर्ट में होगी.
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