Monday, December 3, 2018

गुजरात में उत्तर भारतीयों पर हिंसा


गुजरात में हिंसा होना एक शर्म की बात है परन्तु प्रान्त के नाम पर हिंसा होना उससे भी बड़े शर्म की बात है इस तरह की हिंसा या अफवाह फैलाने वाला चाहे कोई भी हो किसी पार्टी या संगठन का हो उसके खिलाफ गुजरात सरकार को कठोर से कठोर कार्यवाई करनी चाहिए जिससे की इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति फिर से दोहराई जाय,सबसे ज्यादा दुःख की बात ये है कि अभी तक तो सिर्फ महाराष्ट्र में उत्तर भारतियों को मारा-पीटा जाता था उन्हें हिकारत की नजरों से देखा जाता था परन्तु अब उसी तरह की मानसिकता गुजरात सहित देश के दूसरे हिस्सों में फ़ैल रही है चाहे वह सुदूर सिक्किम का क्षेत्र हो या मेघालय का कुछ हिस्सा।ऐसी सोच और ऐसी परिपाटी हमारे समाज और हमारे देश के लिए शुभ नहीं है.

टीवी और न्यूज़ के माध्यम से जो खबरे रही है वो बड़ी भयावह लग रही कि उत्तर भारतीयों को किस तरह से डराया धमकया जा रहा है वो ट्रेनों में डर की वजह से भूसे की तरह भर-भरकर अपने घरों की तरफ लौट रहें है.हर किसी को सामने आकर उन्हें समझाना चाहिए कि उनके साथ कुछ गलत नहीं होगा परन्तु प्रशासन को शुरू में खबर नहीं लगी और जब खबर लगी तो आग पूरी तरह फ़ैल चुकी थी पर अब  प्रशासन काफी मुस्तैद है और दिन-रात एक किये हुए है जिससे कि शांति-बहाल किया जा सके जो सराहनीय कार्य है.

टीवी पर देख रहा हूँ कि राजनितिक लोग अपनी-अपनी राजनितिक रोटियां सेकने लगें है ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए अरे कब तक देश की हर समस्या को राजनितिक प्लेट में सजाकर उसकी राजनीति करोगे आप लोगों का पहला ध्येय तो ये होना चाहिए कि पहले गुजरात में सब कुछ पहले की तरह ब्यवस्थित हो जाये फिर आप लोग करो राजनीति और उसके बाद आपको राजनीति करने से कोई नहीं रोक सकता परन्तु पहले गुजरात को दूसरा महारष्ट्र बनने से तो बचा लो.

राजनीति के इतने कोण तलाशे जा रहें है कि हमें उनके बयानों को सुनकर,देखकर शर्म रही है पर उन्हें नहीं,कोई कह रहा है कि फला पार्टी ने दंगा करने वाले संगठन के प्रमुख को बिहार का प्रभारी बना रखा है तो वो बिहार में वोट कैसे मांग सकता है,कोई कह रहा है कि उसको जेल में डाल दो उसके संगठन को बर्खास्त कर दो पर कोई ये नहीं कह रहा है कि आप लोग डरो मत गुजरात में हीं रहो मै आपके साथ हूँ.इससे पता चलता है कि हमारे देश के राजनीतिज्ञों की मानवीय संवेदना रसातल में पहुंच गयी है वो किसी के साथ नहीं है शिवाय अपनी तुच्छ राजनीति के.   

मैं देश के समस्त लोगों से अनुरोध करता हूँ कि लोग अपने घरों से बाहर निकलें और प्रशासन के साथ शांति को कायम करने में अपनी भूमिका का उचित निर्वाह करें,इसी में हमरे समाज की भलाई है.  

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