विवेक तिवारी नाम के एप्पल मोबाइल के एरिया मैनेजर को लखनऊ में रात को गोलीमार दी जाती है और पुलिस बहाने बना रही है क्या यही रामराज्य है, "बिष्ट" जी आपने पुलिस को इतनी छूट दे दी है कि किसी की भी हसती-खेलती जिंदगी में आग लगा दे.हमें ये सोचना होगा पुलिस को इतनी ताकत कौन दिया है सरकार निर्दोष लोगों का"इनकाउंटर"भी करा सकती है ये सोच कर डर लगने लगा है कि हम किस दुनिया मेंरह रहें है,कैसे लोगों के हाथ में हमारा भविष्य है. हमने तो ऐसी सरकार की कल्पनासपने में भी नहीं की थी,अगर विवेक तिवारी जी ने गाड़ी नहीं रोकी तो गोली क्यों मारीगयी क्या विवेक तिवारी अपराधी थे नहीं वो एक विदेशी कंपनी में नौकरी करके इज्जतकी जिंदगी जी रहे थे,तो पुलिस उनके साथ इस तरह का ब्यवहार कैसे कर सकतीहै,तिवारी जी के सिर में नजदीक से गोली मारी जाती है और उनकी पत्नी को अस्पताल में इधर-उधर भगाया जाता है उन्हें अँधेरे में रखा जाता है,यह कृत्य पुलिस के ब्यवहारके प्रति शक बढ़ाने वाला था.
पुलिस को ऐसे घृणित कार्य करने का बल कहाँ से मिलता है शायद जब मुख्यमंत्री जीजब मंच से संबोधित करते हुए कहते है कि "हमारी सरकार अपराधियों को ठोकनाजानती है"तब पुलिस को नैतिक बल इन्हीं वक्तब्यों से मिलता है इस तरह की यूपी मेंये पहली घटना नहीं है इससे पहले नोएडा,आजमगढ़,मथुरा और प्रदेश के अन्य हिस्सोंमें इस तरह की पुलिसिया कार्यवाही देखने को मिली थी जिसमें की निर्दोष लोगों कोमौत के घाट उतार दिया जाता है. पुलिस की इस तरह की कार्य पद्धति तो प्राइवेटनौकरी की याद दिलाती है जिसमे लक्ष्य (टारगेट)दे दिया जाता है जिसको वो लोग पूराकरते हुए गुण-दोष का पक्ष नहीं देखते है सिर्फ अपना लक्ष्य देखकर कार्य करते है.
शर्म की बात तो तब हो गयी "जब एबीपी न्यूज़ पर भाजपा के प्रवक्ता त्रिपाठी जी कहतेहै ये घटना इस लिए हुई क्योंकि इसकी भर्ती मुलायम और अखिलेश यादव ने की थी,इनके इस कथन को अगर हम सत्य मने तो गुजरात में जो दंगा हुआ फिर तोभाजपा जिम्मेदार है एम पी में किसानों पर जो गोली चलाई गयी उसमें शिवराजजिम्मेदार है."
ये समझ नहीं आता कि कुछ संवेदनहीन,असभ्य,गैरजिम्मेवार लोग टीवी पर चीखनेक्यों आ जाते है जिनके अंदर संवेदना की कोई जगह नहीं है वो सरकार के प्रवक्ता हैएक निर्दोष की हत्या उनके प्रशासन ने गोली मार कर की है और वो संवेदना प्रकटकरने के बजाय जिम्मेदारी मुलायम और अखिलेश की तय कर रहें है,आज सवालमुलायम,अखिलेश या और किसी की नहीं है आज सवाल एक गैरजिम्मेवार पुलिसप्रशासन और उनके कार्य की है और निश्चित तौर पर इसकी जबाबदेही सरकार की है.
किसी भी सभ्य समाज में ऐसे घृणित कार्यों का कोई औचित्य नहीं है,पुलिस के कप्तानसाहेब कह रहे है कि हम आरोपी पुलिस वालों को सस्पेंड करके उनके निरुद्धमुकदमा कायम करेंगे परन्तु ये नहीं कह रहे है कि हम अपनी कार्य-शैली में बदलावकरेंगे और लोगों में अपने प्रति एक नेक विचार कायम करेंगे,जब अपराधी को दंड देनेका अधिकार योगी (बिष्ट) जी ने पुलिस को ही दे दिया है तो फिर IPC और अन्यकानून,अदालत की क्या जरूरत है. केंद्र और राज्य दोनों जगह आपकी सरकार है सरेकानूनों को आप रद्द करवा दें और एक तुगलकी फरमान जारी करके तुरंत सजा-ए-मौत का रास्ता अपना लें.
ॐ नमः शिवाय
UM men danga Raj
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