Tuesday, December 11, 2018

आज का परिणाम राहुल गाँधी को एक बड़े राजनेता के रूप में स्थापित करेगा

आज पांच राज्यों का चुनाव परिणाम आ रहा है उसमें छत्तीसगढ़ और राजस्थान तो पूरी तरह से कांग्रेस के झोली में जा चूका है और मध्य-प्रदेश लूका-छिपी का खेल दोनों पार्टियों के साथ खेल रहा है और बहुत कड़ी टक्कर एक-दुसरे को दे रही है और मेरे ख्याल से यह लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत है परन्तु एक बात तो यह अब आईने की तरह साफ हो चुकी है कि राहुल गाँधी का कद अब भारतीय राजनीति में बहुत बढ़ जायेगा और निश्चित तौर पर कांग्रेस हीं विपक्ष की तरफ से वो छाता होगी जिसके निचे सभी पार्टियां इकट्ठी होंगी और उसी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने को मजबूर होंगी.

मैं तो देख रहा हूँ जहाँ तक राजनीति की बात है तो विपक्ष के नेता और यहां तक तो सत्ता के साथ भागीदारी रखने वाली पार्टियां जैसी शिवसेना ने भी राहुल गाँधी की तारीफ इन नतीजों के बाद करनी शुरू कर दी है तो ये प्रतीत तो होने लगा है कि देश में मोदी का विकल्प धीरे-धीरे उभर रहा है और उस विकल्प को उभरने का काम जनता करती है. जनता जिसे नेता बनाती है वही नेता बनता  है और विकल्प भी जनता खुद से हीं बनाती है. आज हिंदी भाषी क्षेत्रों राजस्थान, मध्य-प्रदेश और छत्तीसगढ़ में वर्तमान सत्ताधारी पार्टी बीजेपी को बहुत बड़ा नुकसान होता दिख रहा है जिसकी भरपाई चार महीने बाद होने वाले चुनाव मवन करना बहुत मुश्किल होगा.

 इस चुनाव के परिणाम का विश्लेषण करने से ये भी पता चलता है कि ग्रामीण मतदाता सरकार के कार्यों से खुश नहीं था और दिल खोलकर कांग्रेस के लिए वोट किया है इससे लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को एक संजीवनी तो मिलेगी हीं साथ हीं साथ किसान जो निर्विवाद रूप से कांग्रेस से जुड़ें रहे थे वो बीच के कुछ सालों में भाजपा के पास चले गए थे जो वापस लौटकर कांग्रेस के तरफ दुबारा से आ रहे हैं. जो कांग्रेस के रणनीतिकारों को थोड़ा खुश होना का मौका जरूर देगी, और मै फिर कहना चाहूंगा कि इस जीत का श्रेय कार्यकर्ताओं के साथ-साथ प्रादेशिक नेताओं और राहुल गाँधी की मेहनत को जाता है.  जो एक ये झूठ का मिथक बना दिया गया था कि अमित शाह बहुत बड़े चाणक्य है और मोदी एक जादूगर की तरह उसके नतीजों को अपने पाले में  ला देते है तो गाँधी के युवा और अनुभवी टीम ने आज उस मिथक को तोड़ने का काम किया और ये दिखाया कि बीजेपी/आरएसएस को हराया जा सकता है कर्नाटक के बाद तीन तीनों राज्य के चुनाव उनके कुशल नेतृत्व और समझ के गवाही खुद-ब-खुद देने का काम कर रहें हैं.

मध्य-प्रदेश में तो पेंच ऐसा फसा है कि बसपा और निर्दलीयों पर सारा दारोमदार जा टिका है ये दोनों शक्तियां बेशक नंबर के खेल में छोटी लगती हो परन्तु सत्ता की चाबी उन्हीं के हाथ में बंद हो गयी है और अब जिस करवट बैठेंगे सत्ता उन्हीं की होगी, लेकिन प्रजातंत्र में अगर खरीद-फरोख्त करके सरकार बनाने का काम किया जायेगा तो बहुत शर्म की बात होगी और ये लोकतंत्र के माथे पर एक कलंक होगा.

साढ़े तीन बजे दोपहर तक सात घंटे की मैराथन गणना के बाद भी मध्य-प्रदेश का संभावित परिणाम त्रिशंकु विधान सभा के तरफ नजर आ रहा है दोनों पार्टियों में इतनी कड़ी टक्कर एक-दूसरे को देती नजर आ रही है और राजनितिक विश्लेषकों को भी कुछ कहने में भी दिक्कत हो रही है क्योंकि क्या पता किसका अंदाज और कोई एक पार्टी जीत के नंबर को पा लें. अब तक दोनों पार्टियां इन सात घंटों में 10 बार एक दूसरे के नंबर के  बराबर (टाई) आ चुकी है पर वास्तविक परिणाम का अब तक पता नहीं चल सका और उम्मीद है कि दो घंटे में सब कुछ साफ-साफ़ हो जायेगा.

फिर मैं लौटकर राहुल गाँधी के नेतृत्व पर आता हूँ कि देश जो एक सवाल पूछ रहा था उसका जबाब काफी हद तक इस चुनाव ने देश की जनता के सामने रख दिया है और हाथ को थोड़ा और मजबूती प्रदान किया। अब इसका असर देखने को मिल रहा है कि मायावती जी अपने नव-निर्वाचित विधायकों को दिल्ली बुला ली हैं और दूसरी और समाजवादी पार्टी के महासचिव श्री रामगोपाल जी ने बाकायदा एक तरह से कांग्रेस को समर्थन करने एलान कर दिया ये असर कांग्रेस के इन परिणामों को जाता है और इसी से राहुल के कद के बढ़ने का पता चलता है.

नोट- मध्य-प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह जी ने कहा था कि कांग्रेस 120 सीट जीतेगी और लगभग उनका आंकलन हीं सही निकला, इसे कहते है राजनिति का खिलाङी.

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