कल 20 वीं सदी के दूसरे दशक के अंतिम साल में हम प्रवेश करने वाले है. कल से एक नए साल की शुरुआत हो जायेगी. तो 2010 से 2020 तक का सफर अपने अंतिम पड़ाव पर होगा. जैसा कि सर्व विदित है कि साल 2019 बहुत से महत्वपूर्ण धटनाक्रमों को अपने में समेटे हुए है. जनवरी 2019 की शुरूआत एक साधारण दिन की तरह होती है और फरवरी के आधे महीने तक सामान्य दिनों की तरह चलती है. लेकिन उसके बाद कुछ कुछ बहुत बड़ी घटनाएं घटित होती हैं. जो हमें अंदर से झकझोर कर रख देती है और हमारी आत्मा हमसे खुद हमसे कुछ सवालों का जबाब ढूढ़ने लगती है.
कुछ महत्वपूर्ण झलकियाँ -
प्रियंका गांधी का सक्रिय राजनीति में आना
फरवरी महीने में गांधी परिवार की एक और सदस्य श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा. जैसा कि सबको पता है कि अब तक प्रियंका गांधी अपनी माँ श्रीमती सोनिया गांधी जी और श्री राहुल गांधी जी के क्षेत्रों तक हीं खुद को सिमित कर के रखा था. अमेठी और रायबरेली में हीं चुनावी चुनावी बिसात बिछाती थी और लोगों से संवाद स्थापित करती थी तथा सफलता भी प्राप्त करती थी. कांग्रेस के लिए साल की ये सबसे अच्छी खबर थी. अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने लखनऊ में रोड शो के माध्यम से किया और समर्थकों की बहुत अच्छी खासी संख्या भी देखने को मिली थी. उनकी चुनौतियां कांग्रेस को निराशा से उबारने की थी. जिस पर वो अपना पूरा ध्यान आज भी केंद्रित की हुई हैं.
पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर कायराना हमला, 37 जवान शहीद
फरवरी महीने की 14 तारीख को देश में एक ऐसी घटना घटी जिससे हर हिन्दुस्तानी का कलेजा काँप उठा. कुछ आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में अर्धसैनिक बलों के काफिले पर बिस्फोटक भरी कार से हमला कर दिया. जिसमे हमारे 40 से ज्यादा माँ भारती के सपूत शहीद हुए. यह खबर देखते, पढ़ते, सुनते हीं हर भारत वासी स्तब्ध था. धमाका इतना ताकतवर था कि सेना के वाहनों की परखचे तक उड़ गए थे. हमारे कुछ वीरों के अंग भी क्षत-विक्षत हो गए थे. इस घटना के बाद देश के नागरिकों में बहुत उबाल था. जो स्वाभाविक था. कितनी माओं ने अपने आँचल के प्यार को खो दिया, कितनी बहनों ने राखी की कलाई खो दी और कितनी देवियों ने अपने सिन्दूर को भी खो दिया। मेरे अनुसार ये पूरे साल का सबसे बड़ा घटनाक्रम रहा है.
भारत का पाक में घुसकर एयर स्ट्राइक
पुलवामा हमले पर देश में उपजे हुए असंतोष का बदला लेते हुए सरकार की मंजूरी से भारतीय वायुसेना ने पाक के अंदर घुसकर आतंकी ठिकानों को गोले-बारूद से ध्वस्त कर दिया। यह सेना का बहुत बड़ा पराक्रम था. भारत के इस जबाब के बाद सीमा पर बहुत तनाव था. इसी कर्म में पाक की उन्नत फाइटर प्लेन फ-१६ को सुखोई से विंग कमांडर अभिनंदन ने मार गिराया और इसी कोशिश में वो पाकिस्तान की सीमा में विमान में गड़बड़ी की वजह से चले गए थे. जिनके साथ पाकिस्तान ने बहुत बुरा बर्ताव किया था परन्तु भारत के दबावों के आगे झुकते हुए पाक ने महज कुछ दिनों के अंदर विंग कमांडर को भारत को सौप दिया था.
मनोहर परिकर जी का चला जाना
मार्च के महीने में गोवा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर परिकर का अंततः लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया. आज के दूषित राजनीतिज्ञों में मैं मनोहर जी और माणिक सरकार को सच्चा जनसेवक मानता हूँ. परिकर जी बहुत हीं सभ्य, शालीन और पढ़े-लिखे राजनीतिज्ञ थे. परिकर जी राजनीति में आने से पहले इंजीनियरिंग के छात्र थे. इनका जाना भाजपा के साथ-साथ देश को भी काफी कष्टदायक रहा.
यू पी लोकसभा चुनाव में माया की बसपा और अखिलेश की सपा का तालमेल
लोक सभा चुनावों से पहले राजनीति में एक और घटना घटी. जो पूरे राजनैतिक परिप्रेक्ष में अलौकिक और अप्रत्याशित घटना थी. विधान सभा में करारी हार के बाद सपा और बसपा का गठजोड़ हुआ. जो हर राज्य वासी को अचंभित करने वाली थी. दोनों पार्टियों ने मिलकर चुनाव लड़ा, परन्तु उम्मीद के मुताबिक़ सफलता न मिलने के कारण लोकसभा चुनाव के बाद गठबंधन टूट गया और बाद के विधानसभा उपचुनाव में दोनों पार्टियां अलग-अलग लड़ी.
लोकसभा चुनावों में बीजेपी को अपार सफलता
पांच वर्षों में एक बार आने वाला देश के लोकतंत्र का सबसे बड़ा चुनाव अप्रैल से शुरू हुआ और मई के तीसरे हफ्ते तक चला. जिसमें जनता ने नरेंद्र मोदी के दिल खोलकर वोट दिया। बीजेपी के हिस्से ५० प्रतिशत से ज्यादा सीटें आई और बीजेपी 2014 के 282 सांसदों की संख्या को पीछे छोड़ते हुए 303 तक बढ़ाकर ले आई. वहीं कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष पिछले आम चुनाव की भांति अपने हीं भार के निचे दबा रहा. कांग्रेस अपनी पिछली संख्या को मामूली तौर पर बढ़ाकर 44 से 52 तक ले आयी. फिर भी विपक्ष का पद हासिल करने लायक संख्या नहीं थी.
सोनभद्र में आदिवासियों का नरसंहार
19-20 जुलाई के आस-पास सोनभद्र जिले के उम्भा गाँव में एक बहुत हीं दर्दनाक घटना देखने को मिली. जहाँ दो पक्षों के बीच में जमीन का विवाद दशकों से चला रहा था. इस गाँव के मुख्य निवासी आदिवासी थे और जो दूसरी पार्टी थी वो दबंग था और साथ हीं साथ प्रधान भी था. एक दिन प्रधान अपने साथ सैकड़ों लोगों के दर्जनों ट्रैक्टर में भरकर ले जाता है और विवादित जमीन पर हल चलाने लगता है जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया. जिस पर हथियारों से लैस गुंडों की टीम ने आदिवासियों/दलितों पर धुंआ धार गोलियों की बौछार कर दी. जिसमें कई दलितों की जान चली गयी. यह सरकार के कानून-ब्यवस्था के मुंह पर तमाचा था. जिस पर राजनीति भी खूब हुई. कांग्रेस महासचिव प्रियंका यादव भी पीड़ितों से मिलने के लिए गयी, परन्तु पुलिस ने उन्हें जाने से रोक दिया। तो वो अपने समर्थकों समेत वहीं धरने पर पूरी रात बैठी रही. अंततः प्रशासन ने पीड़ित परिवार को मिर्जापुर में लाकर प्रियंका गांधी से मिलवाया। पीड़ित परिवारों का दुःख देखकर कलेजा फट रहा था.
कश्मीर से धारा 370 की विदाई
5 अगस्त को लोकसभा में एक संशोधन के जरिये सरकार ने कश्मीर से धारा 370 और 35 A को समाप्त करने का निर्णय लिया। जिसे सफलतापूर्वक संसद के दोनों सदनों में पास भी करवा लिया। इस कृत्य के बाद कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों को उनके घर में नजरबंद कर दिया गया है और इंटरनेट तथा फ़ोन पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी गयी है. सरकार कश्मीर के हालात ठीक होने का दावा तो करती है पर पुरानी चहल-पहल बहाल होती नहीं दिख रही है.
राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला
490 साल पुराने अयोध्या मामले पर अन्ततः आज 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के अगुवाई में 5 जजों की टीम ने हमेशा-हमेशा के लिए इस विवाद का निपटारा कर दिया. राम मंदिर और बाबरी मस्जिद का मसला हल होने के बाद देश के सभी लोगों ने शान्ति कायम रखी. जो हमारे देश के गौरवशाली लोकतंत्र को प्रदर्शित करता है. न्यायालय ने सरकार को तीन महीने के भीतर मंदिर निर्माण के लिए एक बोर्ड गठित करने का आदेश दिया है. उम्मीद है कि अब देश में अमन-चैन आएगा.
महाराष्ट्र में राजनैतिक उलटफेर
महारष्ट्र में अक्टूबर में विधान सभा का चुनाव हुआ. जिसमें एक तरफ सेना पोर बीजेपी का गठबंधन था तो दूसरी तरफ कांग्रेस और शरद पवार की अगुवाई वाली नेशनलिष्ट कांग्रेस थी. चुनाव दोनों गठबंधनों ने एक-दूसरे गठबंधन के खिलाफ लड़ा. पर जैसे हीं चुनाव का परिणाम आया तो पता चला कि मामला त्रिशंकु विधान सभा की तरफ जा रही है और किसी पार्टी को बहुत तो नहीं मिल रहा है पर सेना-बीजेपी गठबंधन को बहुमत से ज्यादा मिल रहा है. ऐसी स्थिति को भांपते हुए सेना ने मुख्यमंत्री का पासा बीजेपी के तरफ फेंक दिया कि अगर सरकार बनानी है तो आधे समय के लिए सेना के साथ मुख्यमंत्री का पद बांटना पड़ेगा. जिस पर बीजेपी तैयार नहीं हुई. क्योंकि बीजेपी को लगता था कि सेना की मजबूरी है और वो लौट कर बीजेपी के पास आएगी। पर उधर तो संजय राउत और नवाब मलिक अलग हीं मोड़ पर जाने की सोच रहे थे. सरकार गठन को लेकर सेना, कांग्रेस और एनसीपी में मीटिंग का दौर चल हीं रहा था कि अचानक २३ नवम्बर को खबर आयी की एनसीपी के अजित पवार ने बीजेपी को समर्थन दे दिया और रात में हीं प्रधानमंत्री ने अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति शासन हटा दिया और देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री और अजीत पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले ली. ये खबर टीवी पर आते हीं एनसीपी,सेना, कांग्रेस में भूचाल आ गया.
फिर बिना समय गवाए शरद पवार पावर में आये और अजित पवार को छोड़ अपने सभी विधायकों की मीडिया के सामने परेड करवा दी. उधर सेना अविलम्ब फ्लोर टेस्ट की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट चली गयी. अंततः 80 घंटे बाद देवेंद्र फडणवीस बिना बहुमत साबित किये सरकार से इस्तीफा दे दिया। फिर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महराष्ट्र में सेना, कांग्रेस, एनसीपी की नई सरकार का गत हुआ. इसी के साथ महाराष्ट्र के नाटक का अंत हुआ.
नागरिक संशोधन बिल पर संग्राम
संसद के आख़िरी सत्र में अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश में धर्म के आधार पर प्रताड़ित हिन्दू, सिख, जैन, बुद्ध, पारसी और ईसाई जो 2014 से पहले भारत में आकर बस गए हैं उनको संविधान में इस संशोधन के द्वारा नागरिकता देने का प्रावधान किया गया. सरकार इसे संविधान के अनुरूप बता रही है तो विपक्ष और अन्य संगठन इसे संविधान की मूल आत्मा के खिलाफ बता रहे है. देश के चारों दिशाओं में इस बिल का घोर विरोध हो रहा है. जिसमें दर्जनों लोगों की जानें जा चुकी हैं और पूरे देश में लाखों चिन्हित, अचिन्हितों के खिलाफ मुकदमें कायम किये गए है. इस आग से देश के नामी विश्वविद्यालय भी नहीं बच सके. अलीगढ़ मुस्लिम विश्व विद्यालय, जामिया मिलिया इस्लामिया, जवाहर लाल नेहरू विश्व विद्यालय के छात्र कड़ाके की ठंड में भी बिल के खिलाफ अपना विरोध बुलंद किये हुए हैं. पुलिस विश्व विद्यालय के अंदर घुसकर छात्रों के साथ बर्बरता की. जिनकी जाँच विश्व विद्यालय की आंतरिक कमेटी द्वारा की जा रही है। नागरिक संशोधन बिल का विरोध आज भी बदस्तूर जारी है.
कोई मेरी भाषा से, वाणी से आहत हुआ है तो गुजरने वाले साल के अंतिम दिन में मैं उन लोगों से क्षमा चाहता हूँ.
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