Saturday, July 20, 2019

सोनभद्र नरसंहार मामले में प्रियंका का हल्ला-बोल

अत्यंत हृदय विदारक, दिल को झकझोर देने वाला दृश्य देखने को मिला जब कांग्रेस नेत्री श्रीमती प्रियंका गांधी ने नरसंहार में पिड़ित परिवार वालों से मुलाक़ात की. इस तरह की असहाय पीड़ा भगवान किसी को न दें पर इन लोगों को सरकार की कृपा से मिला. यह एक बहुत बड़ा नरसंहार है. प्रियंका जी ने जो किया वही मानवता का धर्म-शास्त्र कहता है. किसी दुखी इंसान को ढाढ़स बढ़ा देने से उसका कष्ट थोड़ी देर के लिए कम हो जाता है और उसी दरम्यान वो सम्भलने की कोशिश भी करता है. यहां तो इतना बड़ा नरसंहार हुआ है और वो आदिवासी भाई-बहनों के साथ. हम तो टीवी पर देखकर इतना भावुक हो गए है पर जिसके साथ यह वीभत्स घटना घटी है उनके दुःख की कल्पना करना सोच से परे है. प्रियंका जी के जिद की मैं सराहना करूंगा जो उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों से मिले बिना वो अब यहाँ से नहीं जाने वाली हैं. इसी जन-प्रेम, जनसेवा भावना की वजह से पीड़ित परिवार को न्याय और हक दिलाने के लिए पूरी रात मिर्जापुर, चुनार के गेस्ट हॉउस में हिरासत में रह कर काट दिया और बोली कि अंतिम साँस तक मैं पीड़ित परिवारों से मिले बगैर नहीं जाउंगी। एक उच्च दर्जे की नेता के मुंह से ऐसी बात सुनकर अच्छा लगा कि चलो देश में अभी कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अडानी, अम्बानी की नहीं बल्कि दलित, वंचित, शोषित, आदिवासी की भी फ़िक्र करते हैं. जब कांग्रेस के नेता जितिन प्रसाद, राजीव सातव, दीपेन्द्र सिंह हुड्डा, मुकुल वासनिक, राज बब्बर और आर पी एन सिंह सोनभद्र नरसंहार में मारे गए लोगों के समर्थन में  प्रियंका जी के धरने में शामिल होने के लिए जा रहे थे तभी इन सभी को वाराणसी एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया. इनके अलावा टीएमसी सांसदों की एक प्रतिनिधिमंडल भी सोनभद्र जाने के लिए लालबहादुर शास्त्री हवाई अड्डे पर उतरा जिसकी अगुआई राज्य सभा सांसद डेरेक-ओ-ब्रायन कर रहे थे. उन्हें भी यू पी पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया. इससे शक उठता है कि इस नरसंहार में सरकार कुछ छिपाना चाह रही है. अगर सब कुछ सही है तो जो भी नेता घटनास्थल पर जाना चाहते हैं और सोनभद्र में नरसंहार पीङित परिवारों से मिलना चाहते हैं तो उन्हें क़ानून के हिसाब से प्रशासन को खुद मिलवा देना चाहिए और वो भी तब जब घटना को हुए तीन दिन से ज्यादा हो गया है उसके बाद भी सरकार और प्रशासन तरह-तरह की हिला-हवाली कर रही है.
कांग्रेस महासचिव के जमीन पर उतरकर काम करने करने से निश्चित तौर पर आने वाले भविष्य में कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में फायदा होने वाला है. चुनार गेस्ट हॉउस के सामने का रात के समय का दृश्य देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस का सोया हुआ संगठन फिलहाल जाग गया है. वो भले हीं एक रात के लिए हो. 1977 में हार के बाद बिहार के बेलछरी में हुए नरसंहार में पीड़ितों से मिलने के लिए स्वर्गीय इंदिरा गांधी जी हाथी पर चढ़ कर गयी थी और कार्यकर्ताओं के साथ जमीन पर बैठकर प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की थी. कुछ पुराने कांग्रेसियों को कल का प्रियंका अवतार कुछ उसी तरह नजर आ रहा है. कल प्रियंका भी खुरदुरी जमीन पर रात अँधेरे में बैठकर अपने कार्यकर्ताओं के साथ एक लम्बा समय बिताया जिससे कार्यकर्ताओं में भी एक नया जोश देखने को मिला और लोग भारी मात्रा में इकट्ठा होकर रात जमीन और सोते-गाते बिताये और प्रियंका के जिद को देखते हुए अंततः प्रशासन और सरकार आज 11 बजे के बाद पीड़ितों को बुलवाकर गेस्ट हाउस में खुद मिलवाया और पीड़ित महिलाएं देखती हीं प्रियंका जी से लिपट कर रोने लगी और उनको रोता देख प्रियंका गांधी भी भावुक हो उठी. कांग्रेस को ऐसे हीं जुझारू नेता की जरूरत है जो जनता की मांग के अनुरूप अपने आप को ढल सके. प्रियंका के धरना पॉलिटिक्स से बीजेपी के अंदर भी एक नए मंथन को जन्म दे दिया और इस लड़ाई में प्रियंका मुख्य विपक्षी पार्टी के तौर पर कांग्रेस को आगे बढ़ा दिया है. आदिवासी पीड़ित परिवारों के चोट पर मरहम लगाते हुए कांग्रेस ने 10-10 लाख रूपये देने की घोषणा की.


  


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