Friday, December 6, 2019

हैदराबाद बलात्कार के आरोपियों का पुलिस एनकाउंटर

आज तड़के जब सो कर उठा तो टीवी पर एक खबर देखने को मिली। जिसमें पिछले दिनों हैदराबाद में एक महिला डॉ प्रियंका रेड्डी की कुछ दरिंदों ने पहले उसकी अस्मत लूटी फिर उसे ज़िंदा जला दिया। इस आरोप में एक तर्क ड्राइवर समेत कुल चार आरोपी पुलिस द्वारा पकड़े गए थे. परन्तु आज की रात को भोर में हैदराबाद पुलिस उन आरोपियों को उक्त घटना स्थल क्राइम सीन दोहराने के नाम पर पर ले गयी. उसका परिणाम ये हुआ कि उन अभियुक्तों का एनकाउंटर कर दिया गया. यह खबर जैसे हीं देश के सामने आयी उस पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने लगी. कुछ लोग पुलिस के इस कृत्य को सराह रहे थे तो कुछ लोग इसे गलत ठहरा रहे थे. हर किसी के अपने-अपने तर्क थे.         
इन सबको देखने के बाद मैं यह महसूस करता हूँ कि देश में अब कानून को खत्म कर देना चाहिए और हर जिले की पुलिस को यह आदेश दे देना चाहिए कि जिस किसी को आप मारना चाहते हैं, उसे मार दो. उसके किये की सजा शरिया क़ानून की तरह तुरंत दो या दुसरे शब्दों में कहें तो उसके किये की सजा भीड़ तंत्र के विचार अनुरूप दें. मैं मानता हूँ कि उन्होंने जघन्यतम अपराध किये थे. परन्तु उनके अपराध अब तक साबित नहीं हुए थे. अगर पुलिस जो संविधान बचाने की कसम खाती है. वही सविधान को आघात पहुंचाने लगे तो देश का क्या होगा ? भीड़ तंत्र देश के संविधान पर हावी हो जाएगा और मानवता बिखर जायेगी.
आप या हम कैसे किसी आरोपी को सजा दे सकते हैं. पुलिस की भूमिका खुद इस मामले में संदिग्ध लग रही है. पुलिस एनकाउंटर करने के अलावा अकाट्य तथ्य जुटाकर उसे फांसी की सजा दिलवा देती और उसके बाद जनता के बीच ले जाकर किसी चौक-चौराहे पर उसको फांसी पर लटका देती. इससे पुलिस का इकबाल भी बना रहता, संविधान की मर्यादा भी बची रहती तथा दोषियों को उनके किये की अंतिम सजा भी मिल जाती. परन्तु पुलिस के इस कदम से शायद हीं इनमें से किसी पहलुओं का निवारण हुआ हो. जनता हमेशा आक्रोश में आकर नेताओं पर, प्रशासन पर दबाव बनाती है. लेकिन ऐसी परिस्थिति में शासन-प्रसाशन को अपने विवेक के अनुसार सभी मर्यादाओं की पालन करते हुए कदम उठाने की उम्मीद की जाती है.

नए भारत में आपका स्वागत है !  

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