Thursday, March 7, 2019

बीजेपी सांसद ने बीजेपी विधायक को जूते से दिया भरपूर आशीर्वाद

जूते का इससे बढ़िया इस्तेमाल कभी नहीं हुआ था न भूतो न भविष्यते क्योंकि अब मोदी है तो मुमकिन. राष्ट्रवादी जूता मारने वाले भाई साहब अरे माफ़ करना माननीय महोदय भारतीय जनता पार्टी के शरद त्रिपाठी जी है ये बहुत राष्ट्रवादी पुरुष है इनके पिता जी श्रीमान पंडित जी उत्तर-प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी जी है. सोचने वाली बात ये है कि ये सब के सब प्रचंड राष्ट्रवादी है और संघ के कर्मठ सिपाही और और सावरकर वाले राष्ट्रवाद के सच्चे द्योतक है. दूसरे मतलब जूते की सम्मान बढ़ाने वाले और जूते को सीधा मष्तक और गाल पर खाने वाले राष्ट्रवादी विधायक जी का नाम श्री राकेश सिंह बघेल है. मेरा किसी की सम्मान को कम करने का कत्तई इरादा नहीं है वो चाहे जूता मारने वाले संस्कारी राष्ट्रवादी श्री त्रिपाठी जी हों या जूते की शान में खुद को झुका देने वाले परम् संस्कारी विधायक श्री बघेल हो यहां तक की मैं जूते के सम्मान को भी ठेस पहुंचाने की हिमाकत नहीं कर सकता.
हवा में खबर तैर रही है शायद झूठी होगी कि इन दोनों संस्कारी नेताओं में पुलवामा हमले के बाद देश को हुए घाव की भरपाई करने के लिए बात-चीत की जा रही थी. इतने में कहीं से ये आवाज आयी शायद राकेश जी थे कि सबसे पहले मैं पाकिस्तान में जाऊंगा और उनके देश को हनुमान जी की तरह तबाह करके हीं वापस आऊंगा. इतना सुनते हीं दूसरे वाले महान राष्ट्रवादी संसद श्री त्रिवेदी जी का भी खून खौला और उन्होंने ये बोलते हुए संस्कारी विधायक को ४ सेकेण्ड में ७ जूते मार दिए कि मेरे रहते हुए तुम कैसे जा सकते हो बस फिर फैसला हो गया और जूते का सम्मान भी भी बढ़ गया.
गजब का इत्तेफाक घटा कल जूता भी कोई मामूली नहीं था और जूता खाने वाला सिर और गाल भी मामूली नहीं था. पंडित जी के चरण का जूता था और बाबू साहेब का सिर वैसे आप सब बुरा और अपमान मानेंगे पर पंडित जी ने हमारी सनातन परम्परा की रक्षा की है और ठाकुर साहेब को आशीर्वाद दिया था. समझे आप लोग. आप लोग बस जूता-जूता कह कर विधायक जी का बस मजाक उड़ाने में लग गए थे लेकिन ये नहीं सोच सके की पंडित जी ने अपनी चरण पादुका से आगामी चुनाव के लिए आर्शीवाद दिया था. अगर आपको याद न हो तो मैं आपकी याद ताजा करते हुए कलयुग में घटित एक घटना की याद दिलाता हूँ जब २०१८ में छत्तीसगढ़ में विधान सभा का चुनाव था उस समय डॉ रमन सिंह जी ने कलयुग के सबसे बड़े मुख्यमंत्री कम योगी ज्यादा का चरण-स्पर्श कर आशीर्वाद लिया था. तब यही भाजपाई इसे संस्कार कह रहे थे. तो कल की घटना उसी से प्रेरित थी ये कोई जूता काण्ड नहीं था ये एक ब्राह्मण का एक क्षत्रिय को आशीर्वाद था. जो देशद्रोहियों को समझ नहीं आएगा चमचों इसे समझने के लिए आपको संघ में जाना पड़ेगा, भाजपा का सदस्य बनना पड़ेगा। सावधान आगे से कोई इसे जूता काण्ड का नाम नहीं देगा जिसे भी कुछ बोलना होगा अगर जरूरी हो तो वो 'पंडित जी का आशीर्वाद' बोल सकता है.           
भाई मै जूता काण्ड का अब कोई जिक्र नहीं करना चाहता, अब आप लोग तो समझ हीं गए होंगे ! उत्तरप्रदेश के वाराणसी निवासी गाँव खेवली के सुदामा पांडेय 'धूमिल' की रचना "मोचीराम" शीर्षक नाम की एक कविता याद आती है जो हिंदी में पूर्वांचल विश्व विद्यालय के बी ए द्वितीय वर्ष में सम्मिलित थी. वो कल के भाजपा नेताओं के आपसी प्रेम के बाद बरबस ही याद आ गयी -


मोचीराम

राँपी से उठी हुई आँखों ने मुझे
क्षण-भर टटोला
और फिर
जैसे पतियाये हुये स्वर में
वह हँसते हुये बोला-
बाबूजी सच कहूँ-मेरी निगाह में
न कोई छोटा है
न कोई बड़ा है
मेरे लिये,हर आदमी एक जोड़ी जूता है
जो मेरे सामने
मरम्मत के लिये खड़ा है।

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