जब एक तरफ हम कहते हैं कि हमारे युवा बहुत हीं समझदार और पढ़े-लिखे सुलझे हुए चरित्र वाले है ठीक उसी समय भारतीय लोकतंत्र में नेताओं के चुनावी भाषणों में पाकिस्तान की महती भूमिका क्यों बढ़ती जा रही है. कल सहारनपुर में राष्ट्रवादी पार्टी के राष्ट्रवादी मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ योगी (अजय विष्ट) जी ने 2019 लोकसभा चुनाव में पाकिस्तान के आधिकारिक प्रवेश ऐलान कर दिया और कांग्रेस के स्थानीय लोकसभा प्रत्यासी इमरान मसूद के टाईटल को पाकिस्तानी आतंकी मसूद से जोड़ते हुए कहा कि "अगर आप इमरान मसूद को वोट डोगे तो वोट आतंकी मसूद को जाएगा क्योंकि कांग्रेस प्रत्यासी इमरान मसूद आतंकी मसूद के दामाद है." जो बिलकुल सफ़ेद झूठ है इन दोनों मसूद में कोई भी पारिवारिक, ब्यवसायिक रिश्ता नहीं है. इस तरह के बयान असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए होते है और अब जनता इसे भली भांति जान चुकी है. ये झूठ ठीक उसी तरह है जैसे योगी जी सन्यासी (योगी) हैं. इनके एक और मुख्यमंत्री जिनके जिम्मे गुजरात की सत्ता है कल वो भी गुजरात की एक पब्लिक रैली में कहा कि "अगर यहां से कांग्रेस जीत जाती है तो दिवाली पाकिस्तान में मनेगी और अगर मोदी जी जीत जाते हैं तो पकिस्तान में खौफ होगा." मैंने वर्तमान सत्ताधारी के कुछ हालिया बयानों का अध्ययन किया तो एक बात पाया कि भाजपा क्यों बार-बार पाकिस्तान के नाम का सहारा लेती है तो उससे पता चला कि जब इन्हें लगता है कि ये चुनाव में मुंह की खाने वाले है और इनकी करारी हार होने वाली है तो ये पाकिस्तान को ऐसे ले कर आते हैं जैसे लक्ष्मण की मूर्छित होने पर हनुमान जी सुखेन वैद्य के कहने पर पूरा पर्वत उठा लाते है.
पाकिस्तान की भारतीय राजनिति में प्रवेश की कहानी का एक बड़ा किस्सा बिहार विधान सभा चुनाव 2015 में देखने को मिला। इस चुनाव में गौर करने वाली बात ये है कि लगभग दो दशकों तक भाजपा के सहयोगी रहे नितीश कुमार (JDU) इस चुनाव में कांग्रेस, राजद का हिस्सा थी और भाजपा को आभास हो चुका था कि उसे इस चुनाव में मुँह की खानी पड़ेगी। ठीक उसी समय भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष श्री अमित शाह बिहार की एक पब्लिक रैली में कहा कि "अगर महागठबंधन बिहार में ये चुनाव जीत जाएगा तो पाकिस्तान में होली मनेगी" यह बयान रिकॉर्ड में है. इसके बावजूद बीजेपी ये चुनाव हार गयी ये बात अलग है कि चोर दरवाजे से आज नितीश जी के साथ सत्ता सुख भोग रही है और नितीश जी बिहार के जनादेश का अपमान कर अवसरवादिता का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है.
दूसरा बड़ा उदाहरण 2017 के अंत में हुए गुजरात चुनाव के दौरान हुआ जब दिल्ली में एक दिन रात के खाने पर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री मन मोहन सिंह जी ने पाकिस्तान के कुछ अधिकारियों समेत भारतीय थल सेना के पूर्व प्रमुख को खाने पर बुलाया था और उसी रोज गुजरात में चुनाव प्रचार जोरों पर था तब बीजेपी/संघ को लगा कि उनके हाथ से सत्ता अब जाने वाली है तब बीजेपी के शीर्ष नेता श्री मोदी जी ने पाकिस्तान के रूप में अपना ब्रम्हास्त्र चल दिया और पब्लिक रैली में कहा कि "कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ मिलकर मुझे हराने की साजिश रची है." मोदी जी के इस बयान से उनकी पार्टी को फायदा भी हुआ और चुनाव हारते-हारते जीत गयी. ये बात अलग है जब विपक्ष खासकर कांग्रेस के नेताओं ने प्रधानमंत्री श्री मोदी जी से मनमोहन सिंह के खिलाफ उनके उनके द्वारा लगाए गए आरोपों पर सुबूत पेश करने की मांग कि तो एक बार फिर सत्ता धारी दल विफल साबित हुआ और कई दिन संसद गतिरोध के बाद राज्य सभा के सत्ता पक्ष के नेता श्री अरुण जेटली जी को सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए बयान पर माफी (खेद) मांगना पड़ा. यह वाकया भी संसद की आधिकारिक कारवाही में दर्ज है.
इन कुछ बहुमूल्य वाक्यों को सुनने अथवा पढ़ें के बाद आप वाकई समझ गए होंगे कि पाकिस्तान की हमारे देश में चुनावी मौसम में कितना महत्वपूर्ण योगदान है. जब भी मूल मुद्दों से ध्यान भटकान हो पाकिस्तान को ले आओ सब शांत। आज स्वायत्त संस्थाओं द्वारा किये गए सर्वे और दावे के अनुसार 45 सालों में सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर 2018-2019 में है, किसानों की आत्महत्या में बढ़ोत्तरी हुई है, सीमा पर जवानो के शहीद होने की संख्या में भारी इजाफा हुआ है, कश्मीर की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार, दलितों के खिलाफ उत्पीड़न के मामले नित नए मुकाम हासिल कर रहें है. तो इन सब से ध्यान हटाने के लिए सत्ता के लिए पाकिस्तान हीं एक मात्र उपयुक्त औजार साबित हो रहा है.
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