Tuesday, January 8, 2019

खबरों का दिन सोमवार,सवर्णों को लालीपाप


बिपिन नंदलाल गिरि 

8 करोड़ कमाने वाले गरीब सवर्ण- 

इस चुनावी मौसम में दिन की जो पहली खबर आयी वो भी बहुत बड़ी थी क्योंकि मंडल-कमण्डल के बाद पहली बार देश के स्तर पर आरक्षण की बात दस्तक दी हुआ ये कि कल दोपहर में भारत सरकार की तरफ से एक नोटिफिकेशन निकला कि गरीब सवर्णों को भी अब 10 % आरक्षण मिलेगा पर इसके दायरे में 8 लाख सालाना इनकम वाला गरीब आएगा, 5 एकड़ जमीन का मालिक भी आएगा शहर में 100 गज और गाँव में 200 गज तक के मकान का गरीब भी आएगा मै तो साहेब से अनुरोध करता हूँ कि अब आप और ज्यादा गरीबी का मजाक मत उड़ाओ और गरीबी की परिभाषा भी लगे हाथ बदल हीं डालों और रही बात 10 % वाली तो ये एक चुनावी जुमला है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले हीं कह रखा है कि 50 % से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जा सकता ये बात अलग है बहरहाल मैं आप को इसकी दूसरी तस्वीर दिखता हूँ 10 % आरक्षण देने के लिए संविधान के आर्टिकल 15 और 16 में बदलाव करना पड़ेगा इसके लिए संविधान संशोधन लाया जाएगा और संविधान की धारा 15-16 में बदलाव होगा. धारा 15 के तहत शिक्षण संस्थानों में आरक्षण मिलेगा. धारा 16 के अंतर्गत रोजगार में आरक्षण मिलेगा. उसे संसद से पास करवा कर संवैधानिक कानून का दर्जा देना होगा जो आज संसद में 12 बजे पेश होगा पर मुझे नहीं लगता कि सरकार के लिए आसान है, सरकार तो अब पूरी तरह चुनाव मोड में आ चुकी है वो दो करोड़ रोजगार दिए नहीं, राम मंदिर बनवाएं नहीं तो एक राजनितिक लॉलीपॉप तो जनता को देना बनता हीं था जो दे भी दिया लेकिन सरकार की राह संसद में कठिन है क्योंकि हर राजनितिक पार्टियों का अपना एक निश्चित वोट सुरक्षित है तो वो क्यों पास होने देंगी और रही बात बीजेपी की तो उसे हीं इस बिल की जरूरत है क्योंकि दो साल पहले तक बीजेपी को सवर्णों की पार्टी कहा जाता था और जब से इन्होने एस सी / एस टी एक्ट पर अध्यादेश लेकर आये और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटा तब से इनकी छवि सवर्णों के बीच में टूटने सी लगी थी उसी से खुद को बचाने के लिए इस तरह का एक स्टंट किया गया है. जो लोग आरक्षण को लेकर बाबा साहब अम्बेडकर की आलोचना करते रहते थे और उन्हें भला-बुरा  कहते थे वैसे लोग अब कुछ कहेंगे या उनकी जुबान में टाँके लग जायेंगे.

एक बात और गौर करने वाली है कि जो संघ, बीजेपी आरक्षण ब्यवस्था के खिलाफ कई बार मुखर तो कई बार दबे स्वर में आलोचना करती है वो इस बिल को संसद में किस नैतिक हक से लाना चाह रही है यही सब सवाल उठेंगे और तब बीजेपी को इनका जबाब देना भारी पड़ जायेगा इस बिल का एक असर ये भी हो सकता है कि पिछड़ी और अन्य जातियाँ इसके खिलाफ गोलबंद हो जाये और सत्ताधारी पार्टी के लिए ज्यादा मुश्किल खड़ी हो जाये और इसी की संभावना मुझे ज्यादा दिखाई दे रही है क्योंकि इस बार चुनाव जातियों का होगा न कि 2014 की भांति जात-पात से ऊपर उठकर, इसलिए पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन-जाति इकठ्ठा भी हो सकती है अब परसेप्शन की लड़ाई जो जीतेगा वही आगामी आम चुनाव भी जीतेगा ये करीब-करीब तय हैं. ये देखने की बात है और चुनाव बाद इस बात का विश्लेषण चुनावी पंडितों द्वारा जरूर किया जायेगा.     

दूसरी अति महत्वपूर्ण खबर-

कल के दिन देशवासियों के सामने दो बहुत चौकाने वाली घटनाएं घटित हुई पहली ये थी कि बी चन्द्रकला नामक एक भारतीय प्रशासनिक अधिकारी के ऊपर दो दिन पहले सीबीआई का छापा पड़ा वो भी उनके 2012 कार्यकाल को लेकर और सत्ता पक्ष की तरफ से इसमें तब के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव का नाम भी जोड़ा गया क्योंकि उस वक्त अखिलेश यादव के पास खनन मंत्रालय का प्रभार था. वक्त ये था कि अखिलेश को शायद सीबीआई समन करने वाली थी उसके बाद जो हुआ वो दो दशक का सबसे विहंगम दृश्य था. राज्य सभा में सीबीआई और अखिलेश के मुद्दे पर खूब शोर-शराबा हुआ फिर संसद के बाहर हीं समाजवादी पार्टी के महासचिव श्री राम गोपाल यादव द्वारा एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया और ये दो दशक का सबसे विहंगम दृश्य यही अवतरित हुआ जब सपा के प्रोफ़ेसर राम गोपाल यादव और बसपा के मायावती जी के बहुत करीबी श्री सतीश चंद्र मिश्रा जी दोनों मिलकर पत्रकार वार्ता को सम्बोधित किये और अपनी तरफ से मिश्रा जी ने अखिलेश का खूब बचाव किया और उन्हें राजीनीति का शिकार बताया और आश्वासन दिया कि बसपा हमेशा अखिलेश यादव के साथ है थोड़ी देर बाद एक और बड़ी खबर आयी कि मायावती जी ने फ़ोन पर अखिलेश से बात की और उन्हें हिम्मत न हारने की सलाह देते हुए कहीं कि मैं आपके साथ हूँ मतलब बुआ-बबुआ साथ-साथ है और इस बात की पुष्टि करने के लिए मायावती जी ने एक प्रेस नोट जारी किया.


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