कल की ममता जी की रैली देखकर जाहिर तौर पर लगता है की ममता दी का उनके प्रसंशकों में अटूट विश्वाश है उसका अंदाजा कल की रैली में आये हुए जनता को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है, इस रैली में सभी विपक्षी पार्टियों के प्रथम पंक्ति या तो द्वितीय पंक्ति के २० पार्टियों के सम्मानित नेतागण उपस्थित हुए जिनमें मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व प्रधान मंत्री देवगौड़ा, सतीशचंद्र मिश्रा, अखिलेश यादव, हेमंत सोरेन, बाबूलाल मरांडी, शरद यादव, शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल, अपांग, तेजस्वी यादव, फारूक अब्दुल्ला, एम के स्टालिन, उमर अब्दुल्ला, चंद्र बाबू नायडू, यशवंत सिन्हा, अरूण शौरी, शत्रुन्घ्न सिन्हा समेत सभी मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता मंच पर मौजूद थे पर उनमें खास बात ये थी कि अपने स्वभाव से बागी कहलाने वाले गुजरात के दो चर्चित युवा हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवानी भी पहुंचे थे और ममता जी ने संक्षेप में हीं सही लेकिन मंच से बात रखने का मौक़ा दिया, और इन्हीं दोनों नौजवानों ने और इन दोनों नौजवानों ने अपनी बात अपने ढंग से रखी.
हार्दिक पटेल ने एक नारा दिया-
सुभाष बाबू लड़े थें गोरों से
हम मिलकर लड़ेंगे चोरों से
जिग्नेश मेवानी के भाव का मुख्य अंश सरकार को सत्ता से बेदखल करने के साथ-साथ संविधान के मूल्यों की रक्षा करने से संबंधित एक संक्षिप्त पर मारक शब्दों वाली थी.
यशवंत सिन्हा : मैं कहना चाहता हूँ कि कश्मीर की समस्या गोली से नहीं बोली से हल होगी कभी आप प्यार से दो बोल, बोल कर देखे की कश्मीर में इसका क्या असर होता है. मै फकीर हूँ मुझे अब कुछ नहीं चाहिए मेरी आप लोगों से यही अपेक्षा है कि देश बचाओ बीजेपी के सामने विपक्ष का बस एक ब्यक्ति दो और इस गलीच सोच वाली सरकार को हराओ, उनका नारा था सबका साथ सबका विकास पर उन्होंने सबका साथ तो लिया पर सबका नाश किया.
अरुण शौरी : इन्होने तो सैनिकों के साथ धोखा किया राफेल में कितना बड़ा घोटाला हुआ आप सब के सामने है इन्होने सीबीआई, आरबीआई, ईडी समेत अन्य संस्थाओं को बर्बाद कर दिया, मोदी जी भी जानते है कि अब उनकी अपील नहीं रही इसलिए चुनाव जीतने के लिए मोदी किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं जो आज आप कर्नाटक में देख रहें हैं वो कल आप मध्य-प्रदेश में भी देखेंगे, मेरी अपील है आप सब विपक्ष के नेताओं से कि आप अपने अहम का त्याग करें और एक साथ मिलकर चुनाव लड़ें.
अभिषेक मनु सिंघवी : इस मंच पर २२ पार्टियों का इंद्र धनुष बना है जो सरकार को निश्चित हीं हराएगी और इस इन्द्र धनुषीय मंच का ये कर्तब्य है कि आप सब वोट बटने से रोकें क्योंकि वोट बटने का फायदा यू पी, हरियाणा, बंगाल, बिहार या अन्य राज्यों में बस एक पार्टी वो भी भाजपा को मिलता है.
शरद यादव : लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने का उनका मूल्य उद्देश्य है और साथ-साथ यादव जी नई नोटबंदी पर निशाना साधते हुए कहा की नोटबंदी के कारण देश की अर्थव्यवस्था कई साल पीछे चली गई.
ये कुछ वक्ताओं के शब्द इस महारैली से निकले हैं.
ममता जी ने इस ऐतिहासिक ब्रिगेड मैदान में कल की रैली के माध्यम से एक बात तो दर्शा हीं दी है कि उनकी चमक अभी फीकी नहीं पड़ी है आज भी उतनी हीं चमकदार है जितनी आज के ५ साल पहले थी. यह वही ऐतिहासक मैदान हैं जिसमें ४१ साल पहले माकपा के ज्योति बसु जी ने रैली करके कांग्रेस की सरकार को उखाड़ फेकने का दम्भ भरा था और कांग्रेस को मूल समेत उखाड़ कर फेक दिया था और तीन दशक से ज्यादा ठसक के साथ अपनी सकता चलाई थी और उसी बासु की सरकार को हटाने का बिगुल ममता जी भी कभी इसी मैदान से फूंकी थी और उस सरकार को उखाड़ फेकने में सफलता हासिल की थी.
इस रैली में उपस्थित लाखों की भीड़ के माध्यम से ममता जी का एक प्रयास था कि विपक्ष की एकजुटता दिखाई जाएँ जिसमें वो बहुत हद तक सफल भी रहीं है. विपक्ष के कुछ एक बड़े नेताओं जैसे राहुल गाँधी, मायावती जी को छोड़ दे तो सभी उपस्थित रहे और इस मंच के माध्यम से विपक्षी एकजुटता के नारे लगाए. इस महारैली का असर सत्ताधारी पार्टी पर साफ़-साफ़ दिखाई दे रहा है क्योकि रैली खत्म होने से पहले ही पत्रकार वार्ता करने लगे हैं
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