"कैरवां" ने इस घटना पर अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित (छापी) की है जिसमें ये बताया गया है कि कैसे विवेक की कम्पनी के कर्मचारी शौर्य डोभाल की कम्पनी के लिए भी कार्य करते हैं. इसमें इतना गड़बड़ झाला है कि चौकीदार के चौकीदारी की पर एक यक्ष प्रश्न खड़ा होने लगा है.
जैसे- जैसे लोकतंत्र का महापर्व लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे ही रोज कुछ चकित करने वाले खुलासे हो रहे हैं जिससे इस तथाकथित मजबूत सरकार के दावों की पोल खुलती जा रही है वो चाहे सीबीआई मामले में जस्टिस पटनायक की टिप्पणी हो या माननीय उच्चतम न्यायालय का सीबीआई के संबंध में सरकारी फैसला बदलना हो. अब इसमें सनसनी फैलाने वाला एक और नाम जुड़ रहा है जिसका नाम सुनकर निश्चित तौर पर आप चौंक जायेंगे ऐसा मेरा दावा है.
देश के सुरक्षा एजेंसी के सलाहकार अजित डोभाल (NSA) महोदय हैं जिन्हें चाटुकार पत्रकार और चाटुकार मंत्री जेम्स बांड का नाम देते है और इस तथाकथित जेम्स बांड के दो बेटे हैं जिनका नाम क्रमशः विवेक डोभाल और शौर्य डोभाल है जिसमें एक की नागरिकता इंग्लॅण्ड मूल की है और जिनका नाम विवेक डोभाल है जो सिंगापुर में रहते हैं और GNY ASIA FUND नामक एक फर्म के निदेशक है. आज से बरख्श दो साल पहले देश में ये शोर होता था कि डोभाल दाऊद को कॉलर पकड़कर घसीटते हुए बहुत हीं जल्द भारत लाने वाले हैं और "डी" कम्पनी को बर्बाद कर देंगे लेकिन किसे पता था कि "डी" डोभाल पुत्रों वाली हिन्दुस्तान में भी चल रही होगी। कैरवां नामक एक वेबसाइट ने दिलेरी दिखते हुए जज लाया पर दर्जनों रिपोर्ट छापी थी फिर उस पत्रिका, वेबसाइट पर क्या-क्या जुल्म हुआ हर किसी के सामने है. इस बार भी इसी पोर्टल ने हिन्दू-मुस्लिम डिबेट से दूर जाकर और चट्टान जैसा साहस दिखाते हुए भारतीय जेम्स बांड के पुत्रों के काले धंधे के कारनामों को उजागर करने का प्रयास किया है.
कौशल श्रॉफ नामक एक खोजी पत्रकार ने अमेरिका, इंग्लैंड, सिंगापुर और केमैन आइलैंड से अनेक कठिनाइयों से गुजरकर दस्तावेज़ जुटाकर भारतीय जेम्स बांड डोभाल के बेटों के काले धन को सफेद धन (फेयर एंड लवली) करने और हिन्दुस्तान के पैसे को विदेश भेजने के कारोबार का खुलासा कर दिया है जिससे अब हड़कंप सा मच गया है. इस काले धंधे को हेज फंड और ऑफशोर कंपनियों. के नाम से जाना जाता है. एक कमाल की घटना ठीक उस समय घटती है जब हमारा चौकीदार 8 नवम्बर 2016 को रात 8 बजे जनता से 50 दिन मांग रहा था ठीक उसके (नोटबंदी)13 दिन बाद 21 नवंबर, 2016 को टैक्स चौरी करने वाले देशों में शामिल केमैन आइलैंड में विवेक डोभाल कंपनी खोलते हैं. 'कैरवां' के एडिटर विनोद होज़े ने ट्वीट किया है कि नोटबंदी के बाद विदेशी निवेश के तौर पर सबसे अधिक पैसा भारत में केमैन आइलैंड से आया था. 2017 में केमैन आइलैंड से आने वाले निवेश में 2,226 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी.
"कैरवां" कम्पनी को मै सलाम करता हूँ कि इस दरबारी और गोदी मीडिया के दौर में आपने उम्मीद के एक लौ तो जला हीं रखी है वर्ना नाम के मुख्यधारा के जो चैनल हैं उन्होंने तो हिन्दू-मुस्लिम और ठगबंधन-गठबंधन पर शोर मचाने के अलावा कोई और काम नहीं हैं. इन हिंदी चैनलों की पत्रकारों का जमीर मर चुका हो और आप जैसे हीं कुछ महान पोर्टल चलाने वालों से देश को उम्मीदें हैं. नोटबंदी तो एक घोटाला था ये पहले दिन से पता था पर इतना बड़ा था ये अब पता चल रहा है.


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