कल रात से आज सुबह तक दो बड़ी खबरें सामने आयी हैं. उनमें से एक तो देश के अंदर से है और दूसरा देश के बाहर से. पर दोनों अपने-अपने स्थान पर बहुत महत्वपूर्ण हैं. पहली खबर दीपिका का जेएनयू पहुंचना रहा और दूसरी खबर ईरान का इराक में गठबंधन सेना पर मिसाइल से हमला करना रहा.
ईरान का ईराक में गठबंधन सेना के बेस पर बैलेस्टिक मिसाइल से करारा हमला
हम बात की शुरुआत दूसरी खबर से करना चाहते हैं. सुबह जैसीं हीं सो कर उठा और 8 बजे के आस-पास जैसे हीं टीवी सेट ऑन किया और न्यूज़ चैनल का चयन किया. मेरी आँखे खुली की खुली रह गयी. ब्रेकिंग न्यूज़ के तौर पर एक खबर बार-बार चल रही थी और वो थी ईरान का ईराक की भूमि पर अमेरिकी गठबंधन सेना के बेस पर मिसाइलों से हमला करना. ये खबर पूरे विश्व के लिए बहुत बड़ी थी. हमारे भारत के लिए भी. जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया वैसे-वैसे तस्वीर और साफ़ होती गयी तथा नुकसान की तस्वीर भी साफ़ होती रही. ईरानी सरकार ने भारतीय समयानुसार लगभग साढ़े 11 बजे मीडिया को बताया कि ईराक के तीन बेस अल असद और इरबिल तथा ताजी पर 22 बैलेस्टिक मिसाइलों से हमला किया. जिसमें 80 सैन्य बलों के मारे जाने की पुष्टि हुई. ताजी को छोड़कर दोनों हमलों की पुष्टि अमेरिकी प्रशासन द्वारा की जा सकी है.
अगर दोनों देश के बीच मचा घमासान जल्द नहीं सुधरता है तो उसका असर मध्य एशिया में बहुत बुरा पड़ेगा. आर्थिक, राजनैतिक और कूटनीतिक तौर पर विश्व समुदाय के सामने बहुत कठिन चुनौतियां होंगी. अभी से हीं किसी भी अनहोनी को भांपते हुए चीन, सिंगापुर समेत कुछ देशों ने ईरान की सीमा से होकर गुजरने वाली हवाई क्षेत्र से अपने जहाज़ों का उड़ान कुछ अवधि के लिए रोक दिया है.
ईरान-अमेरिका में जंग के हालात कैसे बने ?
3 जनवरी को ईरान के सबसे बड़े सैन्य कमांडर जनरल कुर्द फ़ोर्स के मुखिया कासिम सुलेमानी को इराक के बगदाद में अमेरिकी ड्रोन हमले मार गिराया गया था. जिसमें सुलेमानी के अलावा नंबर दो को सैन्य अधिकारी समेत 6 और लोग मारे गए थे और मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ सुलेमानी के जनाजे में 10 लाख से ज्यादा लोग इकट्ठा हुए थे. उसी का बदला लेने के लिए ईरान ने अमेरिकी फ़ौज के ठिकानों पर हमला किया. अमेरिका और ईरान की तरफ से दोनों देशों को एक दूसरे के प्रति धमकी भरे शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है. अब विश्व समुदाय की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि दोनों देशों को एक साथ बिठाकर बात-चीत के माध्यम से इस गतिरोध का हल निकाले और विश्व में शांति स्थापित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करे.
जेएनयू में हुई हिंसा पर छात्रों को समर्थन देने पहुंची दिपिका पादुकोण
दिपिका पादुकोण की 'छपाक' नाम से एक फिल्म आने वाली है. जो मुख्यतः तेज़ाब पीड़िता के ऊपर बनाई गयी है. पिछले दिनों कुछ नकाब पोशों ने जेएनयू में घुसकर बड़े पैमाने पर हिंसा की थी. जिसमें दो दर्जन से छात्र गंभीर रूप से घायल हुए थे और छात्र गुंडों की गिरफ्तारी के लिए आंदोलन कर रहे थे. उसी दौरान देर शाम खबर मिली कि आंदोलनकारी छात्रों को अपना समर्थन देने के लिए दीपिका भी वहाँ पहुंची है. जिसके बाद बीजेपी सहित भक्त आर्मी काफी उद्वेलित हो गयी. दीपिका को देशद्रोही बताने और उनकी फिल्म बायकाट करने का सोशल मीडिया पर एक माहौल बनाया जा रहा. परन्तु भक्त आर्मी से भूल रही है कि 'अगर भक्तों के देखने, न देखने से कोई फिल्म हिट या फ्लाप होती. तो मोदी जी की बायोपिक कभी फ्लाप नहीं होती.' लेकिन ट्रेंड चलाकर भक्त अपना मन बहलाने के लिए स्वतंत्र हैं. जेएनयू के समर्थन में अब बहुत सी हस्तियां सामने आ रहीं हैं. जो एक भविष्य के भारत के लिए अच्छा संकेत माना जा सकता है.
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