राजनैतिक पार्टियों की तरफ से २०१९ लोक सभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है बस चुनाव आयोग के आधिकारिक तौर पर एलान करने की जरूरत है. सभी पार्टियां चुनावी तैयारियों में अपने-अपने अस्तबल के साथ उत्तर चुकी है. चुनाव में खर्च होने वाले अकूत धन और सामान में उड़ने वाले उड़न खटोले की एडवांस में बुकिंग कराई जा चुकी है. आगामी चुनाव के असर से टीवी चंल भी अछूते नहीं रहे हैं. चना वाले भी अलग-अलग तरह से जनता की नब्ज टटोलने की कोशिश में लगे हुए हैं. इस चुनाव में होने वाले कुछ संभावित घटनाओं का आंकलन करने की कोशिश कर रहा हूँ. मेरा अनुमान गलत भी हो सकता है.
टीवी सर्वे के अनुसार जनता की सोच-
हाल के दो दिनों के अंदर देश के दो बड़े हिंदी चैनल ABP न्यूज़ और आज तक ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर आगामी लोकसभा के संदर्भ में दो अलग-अलग सर्वे किये थे और दोनों का परिणाम लगभग आस-पास था.
इंडिया टूडे और कार्वी के अनुसार - देश के प्रसिद्द मीडिया ग्रुप का एक सर्वाधिक देखा जाने वाला हिंदी चैनल "आज तक" पर इण्डिया टूडे और कार्वी का सर्वे परिणाम प्रसारित किया गया. इस सर्वे को अगर आधार माना जाये तो अगली लोकसभा त्रिशंकु होने जा रही है. इस सर्वे से जुड़ें साथियों ने जनता से कई सवाल पूछे थे जिनमें से मैं कुछ सवालों का और उसके परिणाम का जिक्र करना चाहूंगा.
पहला सवाल - प्रधानमंत्री पद के लिए सर्वाधिक पसंद का चेहरा किसका है ?
जबाब - नरेंद्र मोदी जो की वर्तमान में प्रधानमंत्री भी है उन्हें 46% जनता ने अपनी पसंद बताया.
दूसरा सवाल - प्रधानमंत्री पद के लिए दूसरी पसंद कौन है ?
जबाब - राहुल गांधी 34%
तीसरा सवाल - सारे विपक्ष अगर एक हो कर चुनाव लड़ें तो विपक्ष की तरफ से कौन प्रधानमंत्री का बेहतर विकल्प होगा ?
जबाब - राहुल गांधी 51%
ऐसे कुछ प्रमुख सवाल थे जिनका जबाब जनता से इस सर्वे करने वाली एजेंसी को मिला। जब इन्होने पूरे देश से एकत्रित किये हुए अपने डाटा का एक साथ मिलान किया तो उसका परिणाम अपेक्षित हीं निकला और वो था कि बीजेपी (NDA) को 35% वोट और कांग्रेस (UPA) को 33% मत प्राप्त होने की उम्मीद है. जब इसे सीटों में इन्होने बदला तो NDA के खाते में 237 और UPA के खाते में 166 सीट आने का अनुमान हैं. इसमें जहां बीजेपी और उसके सहयोगियों को 99 सीट का नुकसान उठाना पड़ रहा है वहीं कांग्रेस और उसके सहयोगियों को 100 से ज्यादा सीट का फायदा हो रह है.
इस स्तिथि में त्रिशंकु सरकार के आसार है और यदि SP, BSP, TMC और PDP, Congress (UPA) के साथ आ जाती हैं तो Congress गठबंधन की सरकार आसानी से बन सकती है और यही अगर BJP की तरफ चली जाती हैं तो NDA की सरकार आसानी से बन जायेगी.
राहुल गाँधी -
राहुल गांधी का ग्राफ अब तेजी से मोदी के मुकाबले में बढ़ रहा है ये तीन हिन्दी भाषी राज्यों के जितने के बाद और बढ़ा है मुझे याद है जब 6 महीने पहले इसी एजेंसी का सर्वे आया था तब राहुल गाँधी मोदी के मुकाबले 26% के आस-पास थे पर आज 34% के साथ मोदी को टक्कर दे रहें हैं. चुनाव आते-आते और परिवर्तन होगा. मेरा निजी तौर पर मानना है कि विपक्षी दल राहुल गाँधी को अपना नेता स्वीकार कर लेंगे उसकी वजह भी है. वजह ये है कि कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर आएगी और उसकी सीटें भी ज्यादा होंगी.
नरेंद्र मोदी -
जाहिर तौर पर मोदी जी एक बेहतरीन वक्ता है उनकी एक अकाट्य छवि भी है, पर अब उस छवि का असर दरकने लगा है 2017 के मध्य तक मोदी सरकार की पॉपुलैरिटी 80% तक थी जो आज 52% के आस-पास घूम रही है. 2017 के मध्य तक मोदी जी पॉपुलैरिटी राहुल के मुकाबले 56% से भी ऊपर जो कल यानी 25 जनवरी 2019 को हुए सर्वे में घटकर 46% तक आ गयी है और राहुल की बढ़ रही है. मोदी जी की पूर्व की चुनावी घोषणाएं ही उन पर अब भारी पड़ने लगी है. आने वाला वक्त भाजपा के लिए बहुत कठिन रहने वाला है. हो सकता है कि भाजपा का लगातार दो बार सरकार बनाने का सपना अधूरा ही रहे और इतिहास हो जाये.
निष्कर्ष-
सर्वे से जो बातें निकलकर सामने आ रही हैं वो सरकार के पेशानियों पर बल देने के लिए काफी है. मोदी का चेहरा दमदार तो है पर काम का नहीं है वो चूक रहे है उसकी सबकी बड़ी वजह ये है कि 2014 के चुनावों में इन्होने जन भावनाओं को चरम तक उभार दिया था वो चाहे राम मंदिर का मुद्दा हो या किसान, जवान, नौजवान। हर किसी को मोदी जी ने बहुत ऊँचे सपने दिखाए थे जिन्हें जमीन पर पूरा करने में असफल रहें है. जनता अब रोष में है और जो सर्वे में दिख रहा है वही जमीन पर भी दिकने वाला है. विपक्ष और मजबूत होगा सत्ता पक्ष की पकड़ और ढीली होगी.
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