बिपिन नंदलाल गिरि
माननीय प्रियंका गांधी जी को AICC महासचिव बनाये जाने पर ढेरों बधाई। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने समय-समय पर प्रियंका गाँधी को सक्रिय राजनीति में बार- बार कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से करते रहें हैं जो आज २३ जनवरी २०१९ को नए साल के पहले महीने में नेतृत्व ने अपने कार्यकर्ताओं को ये ख़ास तोहफा दिया है जिससे सभी कांग्रेसी नेताओं में ख़ुशी है और उनकी प्रतिक्रया सोशल मीडिया पर देखने को मिल रही है. प्रियंका जी को इसी के साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) प्रभार का जिम्मा भी दिया गया है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बार-बार ये कहा है कि प्रियंका जी में हम स्व. इंदिरा जी की झलक देखते हैं जो कांग्रेस के उत्साह का एक प्रमुख कारण भी इस फैसले के पीछे हो सकता है. प्रियंका गांधी एक महिला भी हैं और एक सम्मानित परिवार से भी आती हैं इसका भी फायदा कांग्रेस चार महीने बाद होने वाले चुनाव में मिल सकता है. पूर्वांचल की राजनीति जहां तक मैं समझता हूँ बड़े चेहरे के इर्द-गिर्द घूमती है और वो फैक्टर भी कांग्रेस के पक्ष में जा रहा है.
अब देखना ये है कि प्रियंका गाँधी अमेठी से चुनाव लड़ती हैं या नहीं, पूरे देश में प्रचार के लिए निकलती हैं या खुद को पूर्वी उत्तर प्रदेश तक हीं सिमित रखती है. अब तक प्रियंका जी ने अमेठी और राय बरेली की लोक सभा सीटों में पर्दे के पीछे से अपनी माँ और भाई राहुल गाँधी जी की हर चुनाव में मदद करती रही हैं, अपनी माँ के पक्ष में चनाव प्रचार करने के लिए कर्नाटक के बेल्लारी तक पहुंची थी. कांग्रेस नेतृत्व देर से हीं सही पर अपने कार्यकर्ताओं के लिए एक तोहफा आगामी चुनाव से पहले दे हीं दिया है. मैं पिछले सवा घंटे से देख रहा हूँ कि हर प्रमुख टीवी न्यूज़ चैनल पर बस एक हीं बात चल रही है वो है प्रियंका गांधी। मीडिया में भी इस बात को लेकर एक उत्सुकता है क्योंकि इस तरह के फैसले की उम्मीद किसी को नहीं थी चाहे कार्यकर्ता हो या मीडिया के लोग. "राहुल जी ने आज अमेठी में कहा कि हम प्रियंका और ज्योतिरादित्य जैसे युवाओं के माध्यम से प्रदेश को बदलने वाला होगा, निजी तौर पर मेरे लिए ये ख़ुशी की बात है कि मेरी बहन प्रियंका अब मेरे साथ करेगी, वो बहुत कर्मठ है."
कांग्रेस पार्टी में जो प्रियंका को जानते हैं उन्हें पता है कि वो कितनी कुशल चुनावी मैनेजर और बेहतरीन आर्टिटेक्ट हैं जो पर्दे के पीछे से अब तक चुनाव को मैनेज करती रही हैं. १९९८ में सोनिया गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस में काफी सक्रिय हो गयी थी. उससे पहले भी जब कभी उनके पिता राजीव गाँधी जी अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी में आते थे तो उनके साथ प्रियंका भी आती थी. प्रियंका के बारे में एक बात कही जाती है कि वो एक कुशल रणनीतिकार हैं जो अब तक अमेठी और राय बरेली संसदीय सीट तक ही सिमित थी. लेकिन अब लगता है कि कांग्रेस ने उनकी सेवा देश भर में लेने का मन बना लिया है और हो भी क्यों नहीं जब आपके पास अच्छे लोग हैं तो उनकी सेवा लेना जरूरी है. इसमें कोई बुराई मुझे नजर नहीं आती.
अब प्रियंका गांधी के कांग्रेस में आधिकारिक प्रवेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाये जाने से २०१९ लोक सभा की चुनावी रणभूमि पूर्वांचल हीं होने वाला है. इसके पीछे कारण ये है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्य योगी नाथ की सीट गोरखपुर, प्रधान मंत्री की सीट वाराणसी, उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या की सीट फूलपुर ये सब प्रदेश की चर्चित सीटें हैं. ये आश्चर्य नहीं होना चाहिए जब प्रियंका फूलपुर से चुनाव लड़ लें. फूलपुर भारत के पहले प्रधानमंत्री स्व. श्री जवाहर लाल नेहरू की की कर्मस्थली रही है और इलाहबाद का आनंद भवन नेहरू का निवास रहा है और आजादी के महत्वपूर्ण आंदोलनों का गवाह है. सब मिला जलाकर कांग्रेस के लिए चर्चा में बने रहने का एक सार्थक जबाब मिल गया है. मेरा भी मानना है कि कांग्रेस इस बार उत्तर प्रदेश में अच्छा करेगी.
आज राहुल ने वाकई बहुत बड़ा और चौकाने वाला फैसला किया है जो दो धारी भी हो सकता है उसका कांग्रेस को फायदा भी मिल सकता है और नुकसान भी. विपक्ष खासकर बीजेपी अब कांग्रेस पर और जोर-शोर से परिवाद का आरोप लगाएगी, इस बात से कांग्रेस को निपटना होगा क्योंकि राबर्ट वाड्रा के बहाने विपक्ष कांग्रेस पर हमले और तेज करेगा. इसका जबाब कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और नेताओं द्वारा कैसे दिया जाता है ये अब देखने वाली बात है. कांग्रेस के एक फैसले से दो जगह फायदा होने वाला है पहला ये की पार्टी के पुराने सवर्ण वोटर कांग्रेस की तरफ बीजेपी से वापस आ सकता है और दूसरा ये है कि प्रियंका गांधी महिला हैं तो उनका भी समर्थन कांग्रेस को भारी मात्रा में मिल सकता है.
वरिष्ठ पत्रकार NDTV के पूर्व राजनितिक सम्पादक, वर्तमान में लोकबंधु के राजनितिक सम्पादक श्री शेष नारायण सिंह के अनुसार "मैं तो दिल्ली में रहकर भाजपा की मित्रों के चेहरे को साफ़-साफ़ पढ़ रहा हूँ कि ये बेचैन हैं इसका मतलब प्रियंका गाँधी का आना कांग्रेस के लिए कारगर हो रहा है.
वरिष्ठ पत्रकार NDTV के पूर्व राजनितिक सम्पादक, वर्तमान में लोकबंधु के राजनितिक सम्पादक श्री शेष नारायण सिंह के अनुसार "मैं तो दिल्ली में रहकर भाजपा की मित्रों के चेहरे को साफ़-साफ़ पढ़ रहा हूँ कि ये बेचैन हैं इसका मतलब प्रियंका गाँधी का आना कांग्रेस के लिए कारगर हो रहा है.
कांग्रेस ने आज एक और परिवर्तन उत्तर प्रदेश में किया प्रियंका जी को पूर्वी यु पी और एक युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभार दिया. ज्योतिरादित्य सिंधिया एक राजपूत हैं जो राज घराने से संबंध रखते है. इनका पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान और इनके गृह राज्य मध्य प्रदेश के सवर्ण वोटरों पर भी असर पड़ सकता है. इसी गुणा गणित के साथ इन दोनों को लोक सभा सीट के संदर्भ में देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश लाया गया है.
चुनाव के बाद प्रियंका गांधी के संगठनात्मक काम और उनके करिश्मे का आंकलन किया जायेगा। चुनाव तक बस अनुमान लगाया जाएगा लेकिन कांग्रेस ने अपना तुरूप का पत्ता चल कर एक बहस तो जरूर छेड़ दी है और ये चर्चा जितनी देर तक चलेगी वो कांग्रेस के लिए उतनी लाभकारी होगी.
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