मध्य प्रदेश में जब से महाराज के नाम से विख्यात ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पलटी मारते हुए कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए हैं. तब से मध्य प्रदेश में राजनैतिक रूप से उथल-पुथल मचा हुआ है. राज्यपाल ने कल मुख्यमंत्री कमलनाथ को आज यानी 16 मार्च को 'फ्लोर टेस्ट' कराने को कहा था, जिस पर कमलनाथ ने 'कोरोना' और बेंगलुरू में बैठे सिंधिया खेमें के विधायकों को अपना मुद्दा बनाया. आज विधान सभा में राज्यपाल महोदय का अभिभाषण हुआ. फिर हंगामें के बाद 'कोरोना' के नाम पर 26 मार्च तक सदन को स्पीकर ने स्थगित कर दिया. फिर दोनों पार्टी के लोग जोर आजमाइश करने लगे. बीजेपी ने अपने विधायकों की परेड राज्य पाल आफिस तक परेड करा दिया. बीजेपी के एक्टिव होने का असर ये हुआ कि शाम होते-होते 5 बजे तक महामहिम ने कल तक बहुमत साबित करने के लिए दुबारा कमलनाथ जी को पत्र लिखा. जबकि बीजेपी सुबह हीं इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जा चुकी है. और अब सुनने में आ रहा है कि कांग्रेस भी इसी मामले में सरकार के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है.
देखिये बीजेपी आज जो कह रही है वो 1947 से अब तक किये गए कांग्रेस के कार्यों के पीछे छुप रही है. पर याद रखना होगा कि जो बीजेपी आज कर रही है वो निश्चित तौर पर आने वाले भविष्य में बीजेपी को भी भोगना पड़ेगा. मतलब कांग्रेस की केंद्र में जब सरकार होगी. तब बीजेपी आज की हीं तरह चिल्लायेगी और कुछ नहीं कर पायेगी. आज कांग्रेस की सरकार को जिस तोड़-फोड़ के माध्यम से गोवा, मणिपुर, अरुणांचल के बाद कर्नाटक और अब मध्य प्रदेश सरकार को जिस तरह से गिराया जा रहा है. वो देश के राजनीति के लिए शुभ संकेत नहीं हैं. कांग्रेस जब भी केंद्र की सत्ता में आएगी बीजेपी को भी इसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा.
अब निश्चित तौर पर लग रहा है कि कमलनाथ की सरकार मध्य प्रदेश की सत्ता को नहीं बचा पाएगी. परन्तु इसका जो असर होगा वो दशकों तक भारतीय राजनीति में देखने को मिलेगा. इसका असर ये होगा कि एक तरह जिसकी केंद्र में सत्ता होगी वो निर्लज्जता के साथ अपने विरोधी की राज्य सत्ता को महज कुछ राजयसभा सीटों के लिए हथिया लेगा. और विपक्षी पार्टियां बस संविधान की दुहाई देती रह जाएंगी. निश्चित तौर पर कांग्रेस ने जो किया उसी रास्ते पर बीजेपी दौड़ रही है. तो बीजेपी का भी हस्र आज नहीं तो 5 साल बाद कांग्रेस की तरह होगा. अगर कांग्रेस एक बार दिल्ली की सत्ता में आ गयी तो न जाने कितने ऐसे सिंधिया पानी भरते मिलेंगे. बीजेपी को भी ये समझ जाना चाहिए कि दल-बदलू नेता किसी के ख़ास नहीं होते। वो सावन के अंधे की तरह होते हैं. उन्हें हर जगह हरियाली नजर आती है.
कांग्रेस के समर्थकों को निराश होने की जरूरत नहीं हैं. उन्हें मेहनत करने की जरूरत है. अब जनता खुद समझने लगी है और कांग्रेस के साथ जुड़ने लगी है. हाल में हुए चुनाव को देखें तो हरियाणा से लेकर झारखण्ड, मुम्बई तक जनता कांग्रेस के साथ जुड़ रही है. कार्यकर्ताओं को ये समझने की आवश्यकता है कि आपकी मेहनत रंग ला रही है. आप निराश मत होइए एक सिंधिया गया है. आप हर कार्यकर्ता में एक सिंधिया बसता है. जो भी कांग्रेस के विधायक इस समय कांग्रेस के साथ वो सच्चे कांग्रेसी है. बाकी तो सिंधिया निकले. कांग्रेस की तरफ से दिग्विजय सिंह बड़ी हीं खामोशी के साथ अपना काम कर रहें हैं. कुछ न कुछ खेल तो कांग्रेस भी अंदरखाने खेल रही है. कांग्रेस के जितने भी बड़े नेता हैं. जैसे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, जीतू पटवारी, पी सी शर्मा सब बड़ी खामोशी से अपना काम कर रहें हैं. उनकी मेहनत 'फ्लोर-टेस्ट' के वक्त दिख जाएगा.
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