हालात दिल्ली में अब बदल चुका है. संसद से सड़क तक अब तक 47 शहादतों के ऊपर राजनीति शुरू हो चुकी है. दिल्ली का चुनाव प्रचण्ड बहुमत से जितने के कारण केजरीवाल राजनैतिक रूप से सफलता तो प्राप्त की. परन्तु जब दंगों के वक्त उन्हें उस जनता के साथ खड़ा होने की जरूरत थी. उनके बीच सौहार्द बढ़ाने की जरूरत थी. उस मामले में शायद असफल जो गए. क्योंकि उन्हें अपने विधायकों के साथ क्षेत्र की जनता के बीच जाकर शान्ति स्थापित कर सकते थे. केजरीवाल जी ने बस फर्ज अदा करने की कोशिश की इसका अंदाजा आप इस बात से हीं लगा सकते हैं कि वो बस लेफ्टिनेंट गवर्नर और पुलिस के ऊपर ऊँगली उठाते रहे. रही बात बीजेपी की तो चुनाव के समय से हीं बिगड़े बोल बोलने वालों का समर्थन किया. तो उससे शांति की अपील करना बेमानी होगी. और कांग्रेस को तो दिल्ली की जनता ने सिरे से नकार दिया. फिर भी कांग्रेस दिल्ली के हिंसा प्रभावित लोगों की आवाज संसद से सड़क तक उठा रही है.
आज शाम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष श्री राहुल गांधी ब्रिजपुरी के दंगाग्रस्त इलाकों का जायजा लेने के लिए गए थे. जिस स्कूल को जला दिया गया उस जगह गए और क्षेत्र के मस्जिद में भी गए. राजनिति में भाजपाई राहुल की सांत्वना यात्रा को ढकोसला करार देंगे, हिन्दू-मुसलमान करेंगे. ऐसे विकृत मानसिकता वाले पागल संघ और भाजपा में हीं देखने को मिलते हैं. राहुल गांधी के इस निर्णय का मैं ब्यक्तिगत तौर पर समर्थन करता हूँ. क्योंकि इस वक्त लोगों में विश्वास बहाल करना सबसे जरूरी है. और इस तरह का कार्य चाहे इस तरफ के हों या उस तरफ के हों. दोनों तरफ के शीर्ष नेता हीं कर सकते हैं. जिसका राहुल गांधी बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं. इसे अगर कांग्रेस की राजनीति कहें तो भी बुरा नहीं लगना चाहिए. कांग्रेस भी और पार्टियों की भांति एक राजनितिक पार्टी है. उसे भी देश के अंदर घटने वाली हर घटना पर राजनिति करने का अधिकार है. ये भाजपाई नेता जो एल जी के माध्यम से दिल्ली की जनता पर राज करते हैं. वो उनके दुःख में जाने की भी नहीं सोचे. जब राहुल गांधी पहुंचे तो उनकी यात्रा का असर भाजपा के नेताओं के चेहरों पर साफ़ तौर पर देखा जा रहा है. उनके जबान से बौखलाहट में अनाप-शनाप बोल रहें हैं.
भाजपा का एक बेवकूफ प्रवक्ता जो आज से महज दो साल पहले समाजवादी था और अब भाजपाई है. उसकी जबान इतनी गंदी ही चुकी है कि उसकी बातों को सुनना भी नागवार लगता है. बेवकूफ सत्ता में खुद है दिल्ली समेत देश के अधिकतर राज्यों में और इस्तीफा सोनिया गांधी से माँगता है. अगर सोनिया गांधी, दिग्विजय सिंह, अय्यर जैसे नेता जिम्मेदार है तो आप नामर्दों की तरफ क्यों बैठे हो ? ये दोगले ऐसे हीं जो अपनी जिम्मेदारी को किसी और के नाम से डालने की कोशिश करते हैं. आप उस पागल, मूर्ख बच्चे की बात को yootube या अन्य न्यूज़ चैनलों पर देख और सुन सकते हैं. ये संघी और भाजपाई हमेशा अपनी जिम्मेदारी से भागते हैं. वो चाहे दुर्दांत आतकवादियों की रिहाई हो, गुजरात दंगा, मुजफ्फरपुर दंगा या फरवरी महीने के अंतिम सप्ताह में घटित दिल्ली नरसंहार हो. देश की जनता को अमन चाहिए. जो सिर्फ शान्ति, प्रेम, सद्भाव से हीं हासिल हो सकती है.
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