जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आता जा रहा है वैसे-वैसे चुनावी बयानों में तल्खियां बढ़ती जा रही है. क्योंकि असल खेल तो वोट का है. इस वोट के खेल में सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़े फर्जी तरिके से फैला दिए जाते हैं. नसों नामक एक संस्था हैं जो बेरोजगारी के आंकड़ों पर नजर रखती थी खैर इस सरकार ने उसके प्रकाशन पर रोक लगा दी है उसका कहना है कि इसमें ३६ प्रतिशत कंपनियों का कोई पता हीं नहीं है जिनके अंशदान का जीडीपी जिक्र है पर इस पर सवाल कौन करेगा और जबाब देने की जहमत कौन उठाएगा. अब आखिर के दो चरण का चुनाव बच रहा है तो जुबानों से जहर के बुझे हुए तीर हर तरफ से छोड़े जा रहे हैं और कुछ चाटुकार लोग उसके समर्थन में नारे लगा हर हैं तो कुछ दूसरी तरफ की चाटुकारिता करने में ब्यस्त हैं. ब्यस्त दोनों तरफ वाले हैं. एक तरफ से "चौकीदार चोर है" का नारा निकल रहा है तो उसका जबाब फिल्म कालिया की तरफ आ रहा है कि "तुम्हारा बाप चोर है" . अब इसमें चोर कौन है जनता २३ मई को बता देगी और जिसका बाप चोर है उसकी बात की जाय तो वो अब इस दुनिया में नहीं हैं
यह चुनाव गायब विकास के नाम से शुरू हुआ था और आज तुम्हारा बाप चोर है तक का अपना सफर बिना किसी कठिनाई पार कर चुका है. ताज्जुब की बात ये है कि इस चुनाव में भक्तों को "भगवान राम की याद कम आयी और पकिस्तान की ज्यादा". पाकिस्तान का जिक्र हमारे चुनाव में इतनी बार हुआ है जितना खुद पाकिस्तानी अपने इस बदहाल मुल्क का नाम नहीं लेते होंगे. आज भगवान राम को भी बहुत कष्ट हो रहा होगा कि राम भक्त तो अब पाकिस्तान भक्त हो गए है. अब इसे विडंबना कहें या भक्तों की मजबूरी. जो कभी राम के नाम पर वोट मांगते थे वो आज पाकिस्तान के नाम पर वोट मांग रहे हैं. शायद शास्त्रों में इसी तरह के बदलाव को सृष्टि का बदलाव नाम दिया गया है. फिर भी हम देशवासी हिम्मत नहीं हारे हैं क्योंकि हमारा सहारा तो एक मात्र प्रभु श्री राम हीं हैं. पाकिस्तान को बस चुनाव के लिए प्रवेश हुआ है चुनाव बाद हम उसे लात मार सीमा से बाहर फेक देंगे फिर लव-जिहाद, धर्म के नाम पर हिंसा, रसोई को खंगालना, गाय के नाम पर लोगों को पीटना, वगैरह-वगैरह। हम समय के साथ बदलने वाले लोग है और इसी के साथ जय श्री राम का नारा बुलंद करते हुए कामना करते हैं कि अगली सरकार सबके भविष्य का ख्याल रखने वाली होगी.
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