न्यूज़ नेशन नामक एक टीवी चैनल के पत्रकार दीपक चौरसिया को दो दिन पहले प्रधानमंत्री महोदय ने एक साक्षात्कार दिया था. उस साक्षात्कार के दौरान प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ने कुछ ऐतिहासिक झूठ बोले है जिनका मैंने तथ्यों के साथ अध्ययन किया तो पाया की उनके द्वारा काही गयी बात सरासर झूठी हैं उसमें लेस मात्र की सच्चाई नहीं है. उस साक्षत्कार में मोदी जी कहते हैं कि " मैंने पहली बार डिजिटल कैमरे का उपयोग किया था 1987-88 उस समय बहुत कम लोगो के पास ई-मेल रहता था. मेरे यहां बीरम गॉव तहसील में आडवाणी जी की सभा थी तो डिजिटल कैमरे से मैंने उनकी फोटो ली वो कैमरा बड़ा था (हाथ से कैमरे की साइज बताते हैं ) और उस फोटो को मैंने दिल्ली ट्रांसमिट की और दूसरे दिन आडवाणी जी की कलर फोटो छपी तो वो आडवाणी जी बहुत सरप्राइज हुए कि दूसरे दिन मेरी कलर फोटो कैसे छपी". तो आज मैं प्रधानमंत्री जी कहे हुए और सरकारी दस्तावेज में दर्ज हुए आंकड़ों का मिलान करने की कोशिश करूंगा. जिससे दूध का दूध और पानी का पानी साफ़ हो जाय -
आज की मेरी पड़ताल मोदी जी के ई-मेल पर फोटो अटैचमेंट और भारत में ई-मेल सेवा शुरू कब हुई उससे होगी। कुछ तथ्य मिले हैं जिन्हें मैं आपके सामने रखने की कोशिश कर रहा हूँ -
31 मार्च 1986 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री राजीव गाँधीव जी ने VSNL (विदेश संचार निगम लिमिटेड) का गठन किया.
2 अक्टूबर (गांधी जयंती ) 1991 को VSNL ने ई-मेल लांच किया उस समय नरसिम्हा राव देश के प्रधान मंत्री थे.
24 मई 1992 तक भारत में मात्र 100 ई-मेल खाता धारक थे, जिनमें मुंबई में 50 तो दिल्ली में 25 और कुछ चुनिंदा संस्थान जैसे भाभा अटॉमिक रिसर्च सेंटर, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस शामिल थे.
स्रोत : 24 फरवरी 1992 Times Of India (रिपोर्टर के नाम की जगह स्टाफ रिपोर्टर लिखा है).
किसी भी मेल के साथ पहला अटैचमेंट मार्च 1992 में प्रयोग किया गया जो एक तस्वीर थी और भेजने वाले का नाम नथानिया बोरेंस्टाइल था. जो अमेरिकी नागरिक था.
इंटरनेट सेवा 15 अगस्त 1995 को VSNL ने लांच किया.
जब नेट और अटैचमेंट की बात हो हीं रही है तो इससे हट कर एक और बात कर लिया जाय कि जब मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल किया तो उस समय वो पहला ब्यक्ति कौन था जिसने मोबाइल काल किया और किसको किया ये भी जान लेना उतना हीं जरूरी जितना की मोदी जी का फोटो अटैचमेंट भेजना.
अगस्त 1995 में पहला मोबाइल फ़ोन काल पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री श्री ज्योति बसु जी ने तब के संचार मंत्री श्री पंडित सुखराम को किया था.
इन दावों के बाद आपको यकीन हो जाना चाहिए कि देश के प्रधानमंत्री महोदय केवल बदजुबानी करते है और वो बदजुबानी अब तो रडार की उचाई तक पहुंच गयी है. बकौल मोदी जी "सर्जिकल स्ट्राइक के दिन अफसरों के खा था कि मौसम खराब है, बारिश हो रही है तो हम स्ट्राइक का दिन बदल देते हैं तो महान वैज्ञानिक श्री नरेंद्र कहते हैं कि नहीं आसमान में बादल है, मौसम खराब है आज अगर हम स्ट्राइक करते हैं तो हमारे लिए अच्छा होगा क्योकि बदली होने की वजह से हमारे विमान को पाकिस्तानी राडार पकड़ नहीं पायेगा". साहेब ने तो रक्षा विज्ञान और इसरो तक को हिला कर रख दिया है अपने इस अनोखे तकनीक के माध्यम से.
इन तथ्यों का पड़ताल करने से पता चलता है कि 1987-88 में ई-मेल भेजने का मोदी जी का दावा गलत साबित होता है.
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