आधुनिक भारत राष्ट्र के निर्माता पंडित श्री नेहरू जी की आज 55 वीं पुण्यतिथि है. इस अवसर पर मैं देश के प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू जी को उनकी चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पति करता हूँ.
नेहरू होने का मतलब - मेरी नजर में नेहरू होने का मतलब त्याग और बलिदान की पराकष्ठा है. ऐसा मैं किसी तर्क के आधार पर नहीं बल्कि आजादी के आंदोलनों में उनके द्वारा किये गए कार्यों और उससे संबंधित तथ्य और सत्य के आधार पर कह रहा हूँ. नेहरू के पिता जी श्री मोतीलाल नेहरू जी एक बहुत हीं रूतबेदार वकील थे. नेहरू जी ने अपनी पूरी पढ़ाई लंदन में किया था. लंदन के या यूं कहें कि कुछ विश्वप्रसिद्ध विश्व विद्यालयों में से एक कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से लॉ की छात्र के रूप में पूरा किया था. नेहरू जी की कोई कमी नहीं थी. नेहरू जी चाहते तो अपने दम पर ऐशो-आराम की जिंदगी जी सकते थे पर उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योंकि उन्हें अपनी मातृ भूमि से प्यार था. इलाहाबाद की मिट्टी से प्यार था, संगम में बहती हुई कल-कल करती गंगा, यमुना, सरस्वती के अमृत समान जल से प्यार था. सभी लोग जानते हैं कि पंडित नेहरू जी का जन्म उत्तर-प्रदेश के इलाहबाद में सन 14 नवंबर 1889 को हुआ था. जवाहरलाल नेहरू पंडित मोतीलाल नेहरू और स्वरूप रानी के चार बच्चों में सबसे बड़े पुत्र थे. पंडित नेहरू की छवि को आज जो लोग धूमिल हैं और इनके जो वैचारिक गुरु जो श्री नेहरू जी के समकालीन थे. जब वो अंग्रेजों की यातनाओं से डरकर माफ़ी मांगते फिरते थे और उनकी गुलामी करने का वादा करते नहीं थकते वहीं पंडित नेहरू जी जेलों में उनकी यातनाओं का मुकाबले चट्टान से बुलंद हौसले के साथ करते थे. ऐसे लोगों को उनके पाखण्ड की झलक को सबके नजरों के सामने लाने की सख्त जरूरत है.
आजादी के आंदोलनों में पंडित नेहरू का किरदार - आजादी के आंदोलनों में पंडित नेहरू के किरदार को समझने के लिए थोड़ा हमें उनके पृष्ठभूमि के बारे में जानना बहुत जरूरी है. उसके कुछ लघु अंश ऊपर वाले भाग में अंकित करने की कोशिश की गई है. नेहरू जी अपनी पढ़ाई पूरी करके लंदन से भारत वापस आ चुके थे और कमला कौल जो की एक कश्मीरी ब्राह्मण थी उनसे 1916 में पंडित नेहरू जी का विवाह सम्पन्न हुआ. उसी दौरान लगभग 1919 में नेहरू जी और गाँधी जी एक साथ आये और आजादी की कल्पना के साथ एक साथ काम करना शुरू किया। चूँकि पंडित नेहरू जी उदार हृदय के ब्यक्ति थे तो गाँधी जी उन्हें ज्यादा पसंद करते थे. दोनों ने मिलकर साथ में असंख्य आजादी के दीवानों को साथ लेकर "स्वाधीनता" के नारे के साथ आगे बढ़े. इस दौरान आंदोलनों को कई बार झटका लगा. कुछ झटका ब्रिटिश हुकूमत से कुछ अपने देश में बैठे हुए गद्दारों से लगा. जो माफी की गुहार लगाते रहते थे. कई मुकदमों में नेहरू जी इस दौरान कुल 9 बार जेल भी गए थे और ब्रिटिश हुकूमत द्वारा दी हुई सजा को पूर्ण किया था. आज जो लोग नेहरू के आभा मंडल को धूमिल करना चाहते हैं वो ऐसा भी नहीं कर पाएंगे। क्योंकि वो जब आसमान से जमीन तक नजर डालेंगे तो उन्हें वहां-वहां नेहरू हीं दिखाई देंगे। चाहे भाभा अटॉमिक रिसर्च सेंटर, इसरो, डीआरडीओ, एम्स, आईआईटी या आज जहां देश खड़ा हैं वो नेहरू की दूरदर्शी सोच और वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम का परिणाम है.
नेहरू जी को योगदान को नकारकर इस देश की परिकल्पना नहीं की जा सकती। जो लोग ऐसा करते हैं वो देश के असंख्य आंदोलनकारियों का अपमान करते हैं. नेहरू जी आप इस देश के स्मृतियों में हमेशा-हमेशा के लिए रचे बसे हैं इस महान देश का कण-कण आपका कर्जदार हैं. पंडित नेहरू जी न सिर्फ एक अच्छे नेता और वक्ता थे बल्कि वो एक आला दर्जे के लेखक भी थे. उन्होंने अंग्रेजी में 'द डिस्कवरी ऑफ इंडिया', 'ग्लिमप्स ऑफ वर्ल्ड हिस्टरी' और बायोग्राफी 'टुवर्ड फ्रीडम' कई किताबें लिखी हैं. पंडित नेहरू जी के विशाल हृदय का अंदाजा और इस माटी से लगाव का अंदाजा उनके लिखे हुए वसीयत से आईने की तरफ साफ़ हो जाती है जो कुछ इस प्रकार है - मैं चाहता हूं कि मेरी मुट्ठीभर राख प्रयाग के संगम में बहा दी जाए जो हिन्दुस्तान के दामन को चूमते हुए समंदर में जा मिले, लेकिन मेरी राख का ज्यादा हिस्सा हवाई जहाज से ऊपर ले जाकर खेतों में बिखरा दिया जाए, वो खेत जहां हजारों मेहनतकश इंसान काम में लगे हैं, ताकि मेरे वजूद का हर जर्रा वतन की खाक में मिलकर एक हो जाए...
हे ! मन मैं कैसे मान लूँ
अब सब एक रंग होगा
हे ! मन मैं कैसे मान लूँ
अब एक बाग़ होगा
ना कोई गाँधी ना कोई नेहरू
अब इनका नामों निशां नहीं होगा
एक तरह के फूल होंगे
बाग़ भी एक हीं होगा
मैं कैसे मान लूँ
की ऐसा हीं अब होगा
यहां तो अनेक बाग़ हैं
उनके फूल विविध है
अब कैसे मान लूँ सब एक साथ है
नफरत का जहर घुल रहा है
हमारी बागों में
इस जहर को फ़ैलाने में
किसका दोष दूँ
हे ! मन मैं कैसे मान लूँ
सब एक संग होंगे।
"गिरि"
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