Wednesday, October 23, 2019

हरियाणा, महाराष्ट्र के चुनाव सम्पन्न, आतंकी हमला टला

वक्त-बेवक्त पाकिस्तान का खतरा हमारे देश पर आ हीं जाता है और वो तब आता है जब देश के किसी हिस्से में चुनाव अपने शुरुआती समय में होता है. तब से खतरा बढ़ता जाता है और धीरे-धीरे महज मतदान से बमुश्किल एक या दो दिन पहले देश की सुरक्षा पर गंभीर खतरा छा जाता है. पाकिस्तान हैवी हथियारों से हमारे क्षेत्र में बम बारूद बरसाता है और हम फिर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जबाब देते हैं और पाक अधिकृत कश्मीर में चार, छः पाक जवानों की पोस्ट गिरा देते हैं. उसमें १०-बीस आतंकी जहन्नुम में पहुंचा दिए जाते है. ये सब मीडिया और सरकारी प्रवक्ताओं की जुबान होती है. यही हाल २१ अक्टूबर को सम्पन्न हुए महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव से पहले भी देखने को मिला। जहां कुछ आतंकी देश में घुस आये थे. पाक सेना की पीओके में कई पोस्टें तबाह कर दी गयी जिसमें पाक के कई जवान और आतंकी मारे गए. 

परन्तु एक बात समझ नहीं आती कि जैसे हीं चुनाव सम्पन्न हो जाता है. वैसे हीं सीमा पर सबकुछ सामान्य क्यों हो जाता है ? क्या कभी आपने ध्यान दिया ? क्या आपको नहीं लगता कि सत्ता मीडिया द्वारा अपने पक्ष में प्रचार करवाती है ? उदाहरण के तौर पर मैं एक मशहूर हिंदी समाचार पत्र की कटिंग मैं इस लेख के साथ संलग्न करूंगा. जवानों के शौर्य पर कोई क्षमता नहीं है. उनके द्वारा किये गए बहादुरी के कार्य पर अटूट श्रद्धा है. उनके द्वारा बोला गया हर वाक्य सत्य और पवित्र है. परन्तु जब सत्ता उनके शौर्य पर राजनितिक रोटियां सेकने लगे जब थोड़ी आपत्ति जरूर होती है और आपत्ति होनी भी चाहिए. क्योंकि हमारे जवान हमारी भारत भूमि की रक्षा हेतु सर वक्त तैयार रहते हैं न कि किसी चुनावी रैली में अपने नाम के सम्बोधन के लिए.

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