Wednesday, October 16, 2019

राम जन्म भूमि विवाद पर सुनवाई का अन्तिम दिन

इसमें कोई शक नहीं कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम देश के आदर्श नहीं है. हमने और  हमारे जैसे करोड़ों लोगों ने हमेशा राम को भगवान माना है. पर क्या ये जरूरी था कि राम जी के नाम को भी विवादित बना दिया जाय. बहरहाल अब प्रतीत होता है कि लगभग डेढ़ सौ साल बाद एक बहुत हीं पुराने और और विश्व भर में चर्चित राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के मुद्दे का पटाक्षेप होने का वक्त नजदीक आता दिख रहा है. अंग्रेजों के जमाने से शुरू हुआ यह मामला आजादी के बाद भी चलता रहा. एक लम्बे ट्रायल के बाद २००९-१० में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने २.७७ एकड़ विवादित जमाने को तीन हिस्सों में बाँट दिया. जिसमें दो हिस्सा हिन्दू पक्ष तो एक हिस्सा मुस्लिम पक्ष को दिया. उसके बाद दोनों पक्ष अपनी असन्तुष्टिता को प्रदर्शित करते हुए सर्वोच्च अदालत में उच्च अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर की. जिस पर रोज सुनवाई होने और अंतिम नतीजे तक पहुंचने में लगभग ९ साल का समय बीत गया. 
अंत में वो दिन आ हीं गया जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीस श्री रंजन गोगोई ने अपने नेतृत्व में ५ सीनियर जजों की एक बेंच गठित की. जिसकी अगुवाई वो खुद कर रहें है. जिनमें न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति बोबडे, न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर, न्यायमूर्ति चंद्रचूण समेत पांच जज शामिल हैं. यह सुनवाई आज ४२ वें दिन लगातार चल रही है. रविवार के अवकाश को छोड़कर ये बहस रोज चलती रही. जो आज अपने अंतिम परिणाम की तरफ बढ़ती दिख रही है. आज अंतिम दिन की सुनवाई शाम ५ बजे खत्म हो जायेगी। इसके बाद माननीय जजों को १ महीने का वक्त अपने फैसले को अंतिम रूप देने और लिखने का समय रह जाएगा. लेकिन एक बात तो सत्य है कि आज 16 अक्टूबर को इस सुनवाई का पटाक्षेप होना संभावित दिख रहा है.
गोदी मीडिया में मैं सुबह से देख रहा हूँ कि राम राज्य, राम मंदिर और अन्य तरह के नाम से प्रोग्राम चला रहें हैं. मानों वो देश के नागरिकों की भावनाओं को भड़का रहें है. उसी का एक छोटा सा उदाहरण मैं आपके सामने रखने की कोशिश कर रहा हूँ. जो इस तरह है. मैं आज तक हिंदी न्यूज़ चैनल को देख रहा था. वहां पर एक सीनियर एंकर रोहित सरदाना है. जिस अयोध्या में बैठकर ये बैठक कर वहां संघ और साधु संत तथा कुछ मुस्लिम लोगों को बैठाकर को सवाल जबाब कर रहे थे. उस दरम्यान कांग्रेस पार्टी का कोई नेता या प्रवक्ता वहाँ नहीं बैठा था. परन्तु किसी पैनलिस्ट ने कहा कि ये देश को हिन्दू तालिबान बनाना चाहते हैं. उसकी बात को लेकर ये चीखने लगे कि ये कांग्रेस का बयान है, परन्तु जो जिस बात को कांग्रेस की बात बता रहे थे वहां पर तो कांग्रेस का कोई आदमी था हीं नहीं। तो आप सोचिये ये कांग्रेस को बदनाम करने के लिए भाजपा/संघ के एजेंट की तरह काम नहीं कर रहें थे ?  ऐसा क्यों प्रतीत हो रहा है आप अपनी जिम्मेदारी से भाग रहें हैं ?

जय सियाराम 

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