Saturday, October 12, 2019

चीनी सामान का बहिष्कार कब से

जैसे-जैसे दीवाली का त्योंहार नजदीक आ रहा है. वैसे-वैसे मन में एक अजीब कशमकस सी मची हुई है कि कुछ राष्ट्रवादी संगठनों जैसे विहिप, बजरंग दल, हिन्दू रक्षा मंच, आरएसएस, भारतीय मजदूर संघ जैसे परम पराक्रमी बयान वीरों से सुसज्जित संगठनों के द्वारा कब एलान किया जाएगा कि चीनी सामानों का बहिष्कार किया जाना चाहिए. मेरा दिल ये सोचकर बैठा जा रहा है कि ये वीर अब तक किस कोठरी में छुपे पड़ें हैं. जबकि चीनी राष्ट्रपति तमिलनाडू में हमारे संघ की पाठशाला से निकले और स्वदेशी के सबसे बड़े झंडाबरदार के शिष्य श्रीमान मोदी जी के साथ 'महाबलीपुरम' में बैठकर ब्यापार बढ़ाने की बात पर जोर दे रहा है और श्रीमान प्रधानमंत्री महोदय उसकी हामी में हामी भरते जा रहे हैं.

चीनी सामानों का बहिष्कार करने की अलख जगाने वाले वीरों अब तक आप शांत क्यों बैठे हैं ? आपकी क्या मजबूरी है ? जो आप चीनी सामानों के बहिष्कार का ऐलान करने में देरी कर रहें हैं. क्या आप इन्तजार करना चाहते हैं कि 'शिन पिंग' अपने देश चाइना पहुंच जाए. तब हम उसकी बखिया उखेड़ेंगे या संघ समर्थित अत्यंत पराक्रमी संगठनों ने इस बार ये फैसला किया है कि चीन निर्मित सामानों को भारतीय बाजार में आसानी से बेचने दिया जाए. क्योंकि देश में मंदी घनघोर रूप ले चुकी है, बेरोजगारी सुरसा डायन की तरह अत्यंत विकराल रूप धारण कर चुकी है. ऐसे में सरकार के समर्थन में चुप रहना हीं इन संगठनों के लिए फायदेमंद होगा.
स्वदेशी से याद आया ! आज कल बाबा रामदेव कहाँ हैं ? जो नजर हीं नहीं आ रहें है. भारतीय बाजार में चीनी सामानों का बहिष्कार करने के मामले में बाबा जी लम्पटों के "ब्राण्ड एम्बेस्डर" हुआ करते थे. आजकल उनकी आवाज बहुत शांत हीं कहीं कुछ सुनाई नहीं दे रहा. हो भी क्यों नहीं उनका भी तो 'पतंजलि' का धंधा पिट गया है. अब बाबा बोले तो बोले किस मुंह से. मुझे पूरा यकीन है बाबा जी स्वदेशी अपनाने के लिए बोलेंगे जरूर पर वक्त भी बाबा का होगा और जबान भी बाबा की होगी.

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