जैसा की सर्वविदित है कि लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व यानी लोकसभा चुनाव का आगाज चुनाव आयोग की तरफ से कर दिया गया है. देश की सभी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टियाँ अपने पूरे दम-खम के साथ चुनावी समर में जा कूदी है. इस समर में सभी दल देश के भविष्य का खाका लेकर जनता के बीच जाती है और उनसे अपने हक में और दूसरे के विरोध में मताधिकार का प्रयोग करने के लिए कहती हैं, इस पद्धति को कोई मेनिफेस्टो कहता है, कोई घोषणा-पत्र कहता है, दृष्टि-पत्र तथा कोई वचन-पत्र भी नाम देता है. इसी पत्र को आधार मानकर जनता अपने मत का प्रयोग अपने अनुसार करती है. 2 अप्रैल को देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने अपना घोषणा-पत्र देश की जनता के सामने रखा उसमें रोजगार से लेकर किसान तक और राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर आंतरिक सुरक्षा तक का जिक्र एक संतुलित आधार से किया है और मेरे अनुमान के मुताबिक़ यह एक संतुलित वचन-पत्र होता अगर इसमें कुछ अफवाह फैलाने वाली बातों का जिक्र नहीं किया गया होता जैसे -
- कश्मीर में धारा 35 A और धारा 370 के संदर्भ में
- AFSPA हटाने या उसकी समीक्षा करने के संदर्भ में
- राजद्रोह के सड़े हुए कानून को खत्म करने के संदर्भ में
इन्हीं कुछ मुख्य बिंदुओं को आधार बनाकर संघ/भाजपा अपने पुराने और घृणित अगेन पर काम करने लग गयी हैं और अपने झूठे प्रचार के माध्यम से कांग्रेस को आतंक परस्त और और आतंकियों का हमदर्द बताने में जुट गयी है और इस झूठी मुहिम में चौकीदार सबसे आगे खड़े दिखाई दे रहे हैं. जैसा कि सभी जानते हैं कि कांग्रेस कश्मीर में धारा 35 A और धारा 370 के साथ आज 70 सालों से खड़ी रही है तो उसे यहाँ शामिल करने की कोई आवश्यता नहीं थी. रही बात AFSPA की तो जिस बात को लेकर संघ/भाजपा कांग्रेस पर हमलावर है और सुरक्षा से खिलवाड़ करने का आरोप लगा रही है वह 2015 से उत्तर-पूर्व के राज्यों त्रिपुरा, मणिपुर, अरुणांचल, असम के कुछ जिलों से AFSPA को खुद हीं हटा लिया है तो इनका राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में तर्क देना बंदर के हाथ में उस्तरा देने जैसा लगता है. मैं मानता हूँ कि राजद्रोह की धारा 124 A की आज के समाज में कोई आवश्यकता नहीं है. क्योंकि इस धारा के माध्यम से राज्य सरकारें सवाल पूछने वाले को डरा रही हैं और राजद्रोह के नाम पर सवाल पूछने वाले लोगों को महीनों तक जेल में डाल रही है. वर्तमान परिदृश्य में राजद्रोह के शिकार हार्दिक पटेल, चंद्रशेखर रावण, गोंजाल्विस समेत तमाम युवा, पत्रकार और लेफ्ट समर्थित लेखकों को निशाना बनाया गया है. इसलिए एक बात को साफ़ कर देना चाहिए कि कांग्रेस के मेनिफेस्टों में राजद्रोह की धारा 124 A हटाने की बात की गयी है न कि राष्ट्रदोह की धारा 121 और अन्य.
मेरे विचार से कांग्रेस इन ध्रुवीकरण वाले मुद्दों को चुनाव के बाद अमल में ला सकती थी न कि घोषणा-पत्र में.
संघ/भाजपा का घोषणा-पत्र आज के दिनांक शाम ४ बजे तक नहीं आया है इसलिए इसलिए उनकी चर्चा करना निरर्थक है.
संघ/भाजपा का घोषणा-पत्र आज के दिनांक शाम ४ बजे तक नहीं आया है इसलिए इसलिए उनकी चर्चा करना निरर्थक है.
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