अशोक गहलोत के कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद राजस्थान का मुख्यमंत्री कौन ? यह सवाल राजस्थान समेत देश के राजनीतिक फिजाओं में तैर रहा है। एक तरफ पायलट के समर्थक विधायक पुरजोर तरीके से पायलट के समर्थन में आवाज बुलंद कर रहे हैं। तो दूसरी तरफ गहलोत गुट ने भी अपने ढ़ीले कल-पूर्जों को कस कर पायलट को रोकने की कोशिश कर रहा है। अब वक्त बताएगा कि राजस्थान में कांग्रेस के मुख्यमंत्री का सेहरा किसके सिर पर बंधेगा ? क्या पायलट उड़ान भर पायेंगे ? या उन्हें जादूगर अपने कौशल से पटखनी दे देंगे। यह देखना काफी दिलचस्प होगा।
आपको याद होगा कि पिछले साल सचिन पायलट अपने १८ समर्थक विधायकों के साथ गहलोत सरकार के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया था और महीने भर से ज्यादा दिन तक गहलोत खेमा और पायलट खेमा अपने-२ समर्थक विधायकों के साथ बाड़ेबंदी में रहे थे। अब वही वाकया पायलट के उड़ान भरने में रोड़ा बन रहा है। एक तरह से पायलट के बगावत के बाद राजस्थान की सत्ता कांग्रेस के हाथ से फिसल चुकी थी। लेकिन गहलोत ने अपनी जादूगरी से न सिर्फ वो राजनैतिक संकट टाला बल्कि अपनी सरकार बचाने में भी कामयाब रहे। आज जब पायलट के सिर पर ताजपोशी का एक अवसर बन रहा है। उसमें उनका पुराना कृत्य उनकी ताजपोशी में आड़े आ रहा है।
मीडिया के माध्यम से खबरें आ रही हैं कि पायलट के नाम पर कांग्रेस के ज्यादातर तो विधायक सहमत नहीं हैं। वे विधायक पायलट और उनके द्वारा किए गए पाप पार्टी को याद दिला रहे हैं। जो मौजूं भी है। जब पूरे देश में बीजेपी/संघ जनता द्वारा चुनी हुई सरकारों को अस्थिर कर रही थी। उस दौर में पायलट ने कांग्रेस के इतिहास में सबसे बड़ा पाप किया। कहा तो यहां तक जाता है कि पायलट भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने के लिए तैयार थे। लेकिन जादूगर के कौशल के आगे पायलट समर्थकों को घुटने पड़े। क्योंकि भाजपा से गठबंधन करने लायक विधायक पायलट नहीं तोड़ पाए। आज जब भी कांग्रेस आलाकमान पायलट की ताजपोशी के बारे में सोचेगा तो उसे एक साल पहले हुए विश्वासघात को भी याद करना होगा।
अभी की मीडिया हेडलाइन्स चल रही है कि राजस्थान कांग्रेस में सचिन पायलट के नाम पर बहुत बड़ी बगावत हो गई है और ९० से ज्यादा विधायक लामबंद होकर विधानसभा अध्यक्ष डा. सी पी जोशी को अनिश्चित काल के लिए अपना इस्तीफा सौंप दिया हैं । यह कांग्रेस नेतृत्व के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। एक तरह से अशोक गहलोत ने सीधे - २ गांधी परिवार को चुनौती देते हुए एक संदेश भेजा है। शायद अब गहलोत जी की उतनी इज्जत आलाकमान की नजरों में ना हो जितनी अब से पहले तक थी। हर किसी राजनीतिक ब्यक्ति को यह पता था कि अशोक गहलोत सचिन पायलट को रोकने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। क्योंकि गहलोत ने पायलट के विद्रोह के बाद बड़ी मुश्किल से अपनी सरकार बचाई थी। उस सरकार को अब वे विद्रोही गुट के हाथों में जाते देखना नहीं चाह रहे। गहलोत वैचारिक रूप से खांटी कांग्रेसी रहे हैं। उनके इस राजनीतिक जीवन को और मौजूदा विवशताओ को भी कांग्रेस आलाकमान नजर अंदाज नहीं कर सकता।
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