Saturday, December 28, 2019

ओ पी भैया और दीपक का भैया सादर स्नेह

भैया प्रणाम !

छोटे हैं आवेश में आ गए होंगे. मुझे उनके इन शब्दों से कोई ग्लानि नहीं हैं. धीरे-धीरे सीख जाएंगे. आप जैसे अग्रज के सानिध्य से सब ठीक हो जाएगा. ऐसा मेरा विश्वास है भैया. इसे पढ़ने वाले जान लें कि मैं और बड़े भैया (दीपक जी) एक-दूसरे को नहीं जानते कि हम किस गाँव-क्षेत्र के निवासी हैं, हमारी विचारधारा भी अलग है. फिर भी हम अपनी अभिब्यक्ति को, अपनी आलोचनात्मक टिप्पणी को लिखते समय शब्दों और संस्कारों का विशेष ध्यान देते हैं. आदरणीय भैया के सानिध्य में रह कर मैं अपनी वाणी पर और ध्यान देता हूँ. 
दीपक भैया से अब काफी अच्छी जान-पहचान हो चुकी है. हम एक-दूसरे से काफी वाद विवाद भी करते हैं, परन्तु अपने संस्कारों को कभी नहीं खोते. भैया हमेशा हर छोटे को 'अनुज' के नाम से हीं सम्बोधित करते हैं और उनके द्वारा की हुई त्रुटियों को सुधारने के लिए स्नेहपूर्वक आग्रह करते हैं. भैया की टिप्पणी देख कर लगा कि आज आपके के बारे में दो शब्द लिखना चाहिए. जिसकी गुस्ताखी मैं यहां कर रहा हूँ. भैया किसी भी त्रुटि के लिए मैं आपसे क्षमा चाहता हूँ. 
दीपक भैया आपकी तरह हमारे एक ओम प्रकाश भैया (ओ पी वर्मा) हैं. जो आजकल दिल्ली सरकार में सहायक लेखाधिकारी (AAO) हैं. जो मूलतः छत्तीसगढ़ के निवासी हैं. वो भी अपने शब्दों के माध्यम से मुझे चिढ़ाते रहते हैं. उन्हें जब भी मुझे छेड़ना होता है तो कांग्रेस विरोध की एक खबर मेरे व्हाट्सअप्प पर डाल देते हैं. फिर हम दोनों शुरू हो जाते हैं. कई बार तो जब भाभी जी नहीं होती हैं और वो अकेले रहते हैं तो समय बिताने के लिए एक संदेश साझा करते हैं फिर मैं भी खाली बैठा होता हूँ तो दोनों लग जाते हैं. फिर ओ पी भैया कहते हैं "गिरि" मैं खाली बैठा था सोचा तेरे साथ समय काट लूँ. ओ पी भैया से भी मुझे नौकरी के शुरुआत के दिनों में काफी सहायता मिली है. जब मैं भैया से पहली बार दिल्ली में मिला था उस समय आप एक सरकार कार्यालय में 'केयर टेकर' के पद पर कार्यरत थे. भैया अब आप लोगों की अच्छाइयों के बारे में विस्तृत तौर पर बाद में लिखूंगा.

आप दोनों बड़े भाइयों को पुनः प्रणाम ! 

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