Thursday, August 22, 2019

राजनितिक बदले की भावना में चिदंबरम गिरफ्तार

चिदंबरम की गिरफ्तारी को हल्के में लेने वाले ये शायद भूल रहें हैं कि जो कल चिदंबरम के साथ हुआ कल वही उन लोगों के साथ भी हो सकता है. जो आज की ब्यवस्था के कर्ता-धर्ता हैं. क्योंकि न्याय का पक्ष तो बराबर होता है ? परन्तु जो काम न्याय का चोला ओढ़कर किया जाता है वो बदले की भावना के रूप में परिलक्षित होता है. सरकार के खिलाफ बोलने की सजा चिदंबरम जी को मिल रही है. देश का हर आदमी जानता है कि चिदंबरम जी पर लगाया जाने वाला आरोप राजनीति से प्रेरित है. हंसी आज की गोदी मीडिया पर आती है जो "चिदंबरम फरार" है का हेड लाइन चला रही है. गोदी मीडिया आज के दौर में सत्ता के सामने दण्डवत हो चुकी है. आप इलेक्ट्रानिक या प्रिंट मीडिया का कोई भी चैनल या पृष्ठ बदलकर या उठाकर देख लें तो आपको उसमें बस सरकार का स्तुतिगान और चिदंबरम तथा कांग्रेस की वीभत्स शब्दों में निंदा की गयी है. ऐसा कैसे हो सकता है कि मीडिया या सत्ता वर्ग बिना FIR में नाम आये चिदंबरम या किसी को दोषी अथवा भगोड़ा घोषित कर दे. मैं रात से हीं तथाकथित पत्रकार जो अपने आपको राजनितिक विश्लेषक मानते हैं "उनका कहना है कि चिदंबरम को एक पूर्व मंत्री की हैसियत से नहीं एक आम नागरिक की हैसियत से देखना चाहिए". तो मैं उन तथाकथित मूर्ख मंडली से एक सवाल करता हूँ कि फिर चिदंबरम को लेकर आप टीवी शो किस लिए कर रहें है. क्या आप चिदंबरम को आप नागरिक मानते हैं ? क्या आपने कभी किसी नागरिक के लिए टीवी शो किया है ?. नहीं. यहीं दोगलापन इन सत्ता द्वारा सम्पादित किये जाने वाले पत्रकार चिंटुओं में दिखाई देता है.

चिदंबरम की गिरफ्तारी भूमिका - 2007 के एक केस में चिदंबरम को गिरफ्तार करने के लिए भूमिका किस तरह बनाई गयी है. उसका आंकलन करने पर हमारे सामने सब कुछ साफ़ हो जाएगा. इंद्राणी मुखर्जी जो की पीटर मुखर्जी की पत्नी है और अपनी सगी बेटी की हत्या के आरोप में जेल में एक साल से ज्यादा वक्त से जेल में बंद हैं. उन्हीं की कम्पनी का नाम INX मीडिया था और उसी को विदेशी निवेश के मामले में इंद्राणी मुखर्जी की गवाही के आधार पर कल रात को गिरफ्तार कर किया था. क्या इंद्राणी मुखर्जी की माध्यम से सरकार ने चिदंबरम को फ़साने के लिए कोई डील की है ? किसी कैदी की बातों पर सुबूत के तौर पर माना जा सकता है, यह आप जन के लिए सोचने की बात है.

बीजेपी एक वाशिंग मशीन - बीजेपी आज की ऐसी वाशिंग मशीन बन गई है जिसमें जब तक हेमंत विश्व शर्मा असम कांग्रेस के मंत्री थे तो देश के सबसे बड़े घोटाले बाज थे, मुकुल रॉय जो डेढ़ साल पहले तक TMC में थे तो शारदा घोटाले के सबसे बड़े आरोपी थे, जब उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा आयी और पूरे पहाड़ का जीवन अस्त-ब्यस्त था तब सरकार ने पुनर्गठन के लिए "स्पेशल पैकेज" दिया था तब बहुगुणा कांग्रेस के मुख्यमंत्री थे और मोदी समेत सारे बीजेपी नेता उन्हें भ्र्ष्टाचारी नंबर एक बताते थे इन सभी के खिलाफ CBI (तोता) जांच कर रही थी. नारायण राणे को जब कांग्रेस में थे तो गिरफ्तार करने के लिए सरकार ने पुलिस भेजी थी और वो जैसे हीं भाजपा में शामिल होते वाशिंग मशीन में धूल जाते हैं. अब जब ये सारे नेता बीजेपी में आ गए है तो वो संघ रूपी वाशिंग मशीन से धुल कर साफ़-पाक हो चुके हैं. अब सीबीआई ने इनको पूछना-जांचना बंद कर दिया है. आप जन लोग मिलकर तय करें कि आप किस तरह का देश चाहते हैं ?  

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