Saturday, August 31, 2019

सरकार से सवाल तो देशद्रोही कैसे

समाज में एक अजीब तरह का नशा है, जो सत्ता के अनुकूल है. देश के अंदरूनी मामलों पर जो भी आवाज उठा रहा है उसे फ़ौरन पाकिस्तान परस्त, देशद्रोही और न जानें किस-किस उपनामों से सम्मानित किया जा रहा है. अभी दो दिन पहले का एक मामला इलेक्ट्रॉनिक गोदी मीडिया में बहुत छाया रहा और उसकी वजह से देश के एक पुरानी पार्टी के राष्ट्रीय नेता को अपने बयानात पर सोशल मीडिया के माध्यम से सफाई तक जारी करनी पड़ी. वो मुद्दा था कश्मीर से संबंधित। जैसा कि सभी जागरूक देशवासी जानते हैं कि पिछले 26 दिनों से जम्मू-कश्मीर में क्या हो रहा है ? वहाँ की सवा करोड़ जनता को बंधक बनाकर उनके घर में हीं कैद कर दिया गया है, उनकी आवाज को कोई सुनने वाला नहीं है और वहां ऐसा कोई मौजूद भी नहीं हैं जिससे वो अपना दुःख-दर्द बता सके. क्योंकि जम्मू-कश्मीर की सरजमीं सेना की संगीनों तले है ? हमारी बहादुर सेना उनका पूरा साथ दे रही है और धैर्य के साथ अपने राष्ट्र के कर्तब्य का पालन भी कर रही है. लेकिन नेता, विधायक कहाँ हैं किसी को कुछ पता नहीं. हाँ बात दूसरी हो रही थी परन्तु संदर्भ कश्मीर हीं था. कश्मीर की इसी आंतरिक समस्या को लेकर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राहुल गाँधी जी ने एक ट्विटर पर एक ट्वीट किया था जिसको पकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में कोट किया था. इस बात को लेकर देश में गोदी मीडिया और संघ संगठन द्वारा एक अलग तरह का माहौल बनाने की कोशिश की जाने लगी मानो राहुल गाँधी पाकिस्तानी है. दो-दो केंद्रीय मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर और श्रीमती स्मृति जुबीन ईरानी ने प्रेस से कहा कि राहुल गाँधी पकिस्तान की भाषा बोल रहें है. देश का ये दुर्भाग्य कहा जाए या सौभाग्य जिस राहुल की दादी ने पाकिस्तान के टुकड़ें करते हुए एक नए देश बांग्लादेश का निर्माण किया, जिस राहुल गाँधी के नाना श्री नेहरू जी देश के स्वंत्रता आंदोलन में दशक भर से ज्यादा सलाखों के पीछे अपनी जिंदगी बिताई पर हार नहीं मानी. आज उसी राहुल गाँधी को पाकिस्तान परस्त के रूप प्रचारित किया जा रहा है. जबकि अंग्रेजो से माफी मांगने वाले सावरकर के संगठन के लोग संघ/बीजेपी वाले आज देशभक्त बन रहे हैं.      
अगर ऐसा हीं चलता रहा तो सरकार तो निरंकुश हो जायेगी. कोई कुछ भी प्रश्न उठाएगा और उसे देश के अस्मिता से जोड़ दिया जाएगा और प्रश्न पूछने वाले को देशद्रोही बोला जाएगा तो ये देश किधर जाएगा ? आज देश में सरकार से कोई सवाल पूछो तो वो तुरंत देश की अस्मिता से जोड़ देते हैं और जबाब देने से दूर भागने की कोशिश करते है अर्थात सरल भाषा में कहें तो बेशर्मी से जिम्मेदारी से दूर भागते हैं. देश की अर्थब्यवस्था गर्त में जा चुकी है पर सवाल करो तो देश के साथ गद्दारी होगा. ऐसा माहौल बना दिया गया है. समाज में जिसको बात करने का ढंग नहीं है वो भी कश्मीर पर खूब ज्ञान पेल रहा है. जैसे कि धारा 370 इनसे पूछ कर लगाई या हटाई गयी है.     

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