Friday, July 26, 2019

कारगिल की जवानों को नमन

आज कारगिल विजय दिवस पर हम अपने उन बहादुर रण बांकुरों को याद करते हैं जो हमारी आन-बान और शान की रक्षा हेतु अपने प्राणों को बलिदान कर दिया और दुश्मन देश के अरमानों को अपने पैरों तले रौंद दिया. हे हमारे वीर सपूत आप जहाँ कहीं हो हम आपके श्री चरणों में शीष नवाते हैं.

जब कारगिल युद्ध हुआ वो साल 1999 का था जब मेरी उम्र मात्र 12 साल की थी. देश और पाकिस्तान के बीच हो रहे युद्ध की ज्यादा जानकारी तो नहीं तो पर हाँ अपने बड़ों के साथ युद्ध की बात पर मैं भी रोमांचित हो उठता था. मेरे चाचा दीपू जो की आज उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत हैं और मनोज भैया जो गाजीपुर के निवासी थे. वो दोनों घर पर हीं बात करते थे कि युद्ध हो रहा है दीपू अगर हम बड़े होते तो हम भी युद्ध में लड़ने चलते, उनको मारते, आज हमारे इतने जवान शहीद हुए, उनके इतने हुये। ये सब बातें अब मुझे याद आती हैं कि क्या जूनून था देश का उन दिनों सेना के प्रति लोग सेना के लिए अपना सर्वस्व दांव पर लगाने के लिए हर वक्त तैयार रहते थे. मेरे याद्दाश्त के अनुसार कारगिल युद्ध अट्ठारह या उन्नीस दिन चला था. हो सकता है कि मेरे आंकड़ें गलत भी हों. गाँव में मेरे घर टीवी और रेडियों दोनों होते थे. हम सब सुबह 6 बजे की न्यूज़ बुलेटिन फिर सुबह 8 बजे उसके बाद 10 बजे की बुलेटिन सुनते थे और फिर बैठ कर आकड़ों का मिलान करते थे. हमारे जवान गोलियों का सामना ऐसे करते थे मानो माँ अपने आँचल से फूल उनके तरफ उनकी स्वागत में उछाल रही हो. हमारे शेर दुश्मन के गोलियों और तोपों से निडर होकर आगे बढ़ते गए और दुश्मनों के सीने में पीतल उतारते गए. हमारे हीरो आगे बढ़े शहीद हुए पर पीछे मुड़कर नहीं देखा और दुश्मन सेना को उलटे पाँव भागने को मजबूर कर दिए. उस समय जो मेरे बड़े थे वो बात-बात पर जज्बाती हो जाया करते थे. युद्ध के दौरान हीं नचिकेता के पाकिस्तान कब्जे और कैप्टन सौरभ कालिया के वीभत्स शरीर की खबर भी मिली थी. जिसको लेकर लोगों में पाकिस्तान के प्रति बहुत नाराजगी थी. अटल जी की साथ उस समय देश का हर बच्चा-बच्चा था और हर देशवासी बस अपनी जीत होते हए देखना चाहता था जिसे हमारे जवानों ने पूरा करके दिखाया। हमें अपने उन सपूतों पर गर्व है जिन्होंने हिमालय की छोटी पर खड़े होकर पाकिस्तान के सीने पर तिरंगा गाड़ा था. ऐसे वीर जवानों को जन्मों-जनम तक नमन. कारगिल की लड़ाई लड़ने वाले हजारों वीर आज भी सेना में रहकर देश की सेवा कर रहें है.  

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