राहुल गांधी ने 2019 लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी आगे बढ़ कर ली है और अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। राहुल गांधी के इस्तीफे के फैसले से कांग्रेस के करोड़ों कार्यकर्ता बहुत दुःखी होंगे और दूसरी तरफ वो अपने नेता पर गर्व भी महसूस कर रहे होंगे कि उनका नेता देश की मूल्यों की रक्षा करने के लिए सदैव आगे बढ़कर लड़ाई लड़ी। अब देखना यह है कि राहुल गांधी का इस्तीफे का फैसला उनके चेहरे को कितना चमका पाता है। ऐसा नहीं है कि राहुल गांधी ने लड़ाई नहीं लड़ी, लड़ाई तो लड़ी पर धर्म और सेना की राजनीति के आगे हार गए। वैसे राहुल गांधी को जानने वाले बताते हैं कि राहुल एक बहुत ही बेहतरीन इंसान हैं, लेकिन देश को इंसान की नहीं बड़बोले चौकीदार की आवश्यकता थी। मेरा भी ब्यक्तिगत तौर पर अपना मानना है कि राहुल गांधी एक नेक दिल इंसान हैं। हां गांधी नाम उनके साथ जुड़े रहने की वजह से बीजेपी को टारगेट बनाने में आसान हो जाता था पर राहुल के इस एक बड़े फैसले से जनता के बीच निश्चित तौर पर एक नया संदेश जाएगा। जो राहुल की छवि को निखारने का काम करेगा। मैं देख रहा हूं कि किस तरह देश के गोदी मीडिया के कुछ पत्रकार अब भी राहुल के इस्तीफे में खोट निकाल रहें हैं। यह देखकर बहुत ताज्जुब होता है कि पत्रकार किसी भी समस्या के लिए नेहरू और गांधी परिवार से सवाल पूछता है न कि सत्ता से।
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