दो दिन पहले रायसीना हिल्स की जगमगाती रोशनी में 17 वीं लोकसभा के मंत्री और प्रधानमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह भब्यता के साथ सम्पन्न हुआ. इस समारोह में ऑफिशियल तौर पर 6500 अतिथियों को आमंत्रित किया गया था. जिनमें तमाम गणमान्य हस्तियां मौजूद थी. फिल्म और कला जगत के नामी-गिरामी हस्तियों के साथ-साथ सरकार के चहेते और देश के प्रमुख उद्योगपतियों में से एक अनिल अम्बानी जी भी अग्रिम पंक्ति में विराजमान थे. इन के अलावा सभी प्रमुख राजनितिक दलों के नेता भी शामिल रहे ममता बनर्जी और कुछ कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों को छोड़ कर. खैर कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी इस आलिशान समारोह का हिस्सा थे.
अबकी बार कुछ मंत्रालयों में नए चेहरे भी देखने को मिल रहे हैं और उसमें सबसे बड़ा नाम भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का है. जिन्होंने अपने कौशल के दम और मोदी के चेहरे के दम पर 2014 से भी विराट जीत हासिल की. इन सब के बीच एक चौकाने वाला फैसला लिया गया कि गृह मंत्रालय श्री राजनाथ सिंह जी का कद घटाकर अमित जी शाह को दे दिया गया. ऐसा किस परिस्थिति में सम्भव हुआ ? इसका कोई खुलासा नहीं हुआ. क्योंकि राजनाथ जी ने अपने पहले कार्यकाल में कश्मीर की कुछ दर्दनाक हादसों को छोड़ दें तो पाएंगे कि गृहमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल शानदार रहा है. बहरहाल अब उनके पास रक्षा मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय है. जिसमें भी काम करने के असीमित संभावनाएं हैं. निर्मला जी को रक्षा से उठाकर वित्त मंत्रालय दे दिया गया है जो कि पिछली सरकार में अरुण जेटली जी के पास था. जेटली जी स्वास्थ्य कारणों से इस कैबिनेट में नहीं है. वैसे जेटली जी बहुत अच्छे वक्ता है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। इस कैबिनेट विस्तार में बीजेपी की सहयोगी पार्टियों को भी आंशिक रूप से शामिल से किया गया है. एक मात्र सहयोगी पार्टी जदयू ने इस आंशिक भागीदारी को स्वीकार नहीं की है.
सरकार के शपथ लेने के अगले हीं दिन दो खबर देश के सामने आयी और वो दोनों सत्ता के लिए डराने वाली है. पहली खबर ये थी कि 45 सालों में सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर इन 5 सालों में रहा है. जिसमें शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 7 % को भी पार कर गयी है और दूसरी बुरी खबर ये रही कि वित्तीय वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में देश की अर्थब्यवस्था 5.8 % तक आ गयी जो पिछले दस सालों में सबसे कम आंका गया है. इससे पहले 2012-2013 वित्तीय वर्ष में देश की अर्थब्यवस्था अपने न्यूनत स्तर 6.4 रही थी. अब आप समझ हीं गए होंगे कि आने वाला समय समय सरकार के लिए चुनौतियों से भरा रहने वाला है. खैर बेरोजगारी की बात तो विपक्ष 2019 के आम चुनाव में भी खूब प्रचारित किया था तब सरकार ने इसे मिथ्या करार दिया था और मानने से इंकार कर दिया था पर अब मान लिया है. क्योंकिअब उन्हें भी लगने लगा है कि आने वाले निकट भविष्य में तमाम चुनौतियों से से लड़ना होगा और उससे पार पाना होगा।
No comments:
Post a Comment