Tuesday, June 18, 2019

चमकी से 130 बच्चों की मौत नितिश जी दिल्ली में ब्यस्त

बिहार में 130 बच्चों की मौत के बाद हालात काबू से बाहर हो चला है. ये सरकारें कब तक अपने रवैये को बदलेंगी शायद इस सवाल का जबाब भगवान् के पास भी नहीं होगा। 2016-17 में गोरखपुर के एक सरकारी अस्पताल में कुछ इसी तरह की भयावह घटना घटी थी तब उस समय जै पार्टी आज सत्ता में है वो उस समय विपक्ष में थी तब इसने बहुत हल्ला काटा था पर आज जब सत्ता में है तो मुंह को सिल लिया है। 2019 में फिर से बहुत से बच्चों के मरने की खबर आयी पर अबकी बार भी सरकार मौन साधे रखी। बहरहाल हम बिहार की स्थिति पर वापस आते हैं क्योंकि बिहार में चमकी नामक बुखार ने ताण्डव मचा रखा है और डबल इंजन की सरकार कहीं भी दिखाई नहीं दे रही है। अब प्रश्न उठता है कि ऐसी डबल इंजन सरकार का करता फायदा जो माताओं और बहनों की गोद सुनी होने से रोकने में बुरी तरह असफल रही हो। शर्म की बात ये है कि 109 बच्चों के मरने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री महोदय को आज घटना के 10 दिन बाद अस्पताल पहुंचने का मौका मिला और मृतकों के परिजनों से मिले। अस्पताल पहुंचने पर आत्मा कुमार का लोगों ने जोरदार विरोध किया और मुर्दाबाद के नारे को विरोध स्वरूप बुलंद किया। अब आपके मन में होगा कि नितिश जी 10 दिन तक कहां थे तो उसका जबाव में है कि नितिश जी दिल्ली में अपनी पार्टी के राजनीतिक कार्यक्रम में मशगूल थे। इसलिए नितिश जी ने इस दरम्यान मृतकों के परिजनों से मिलना मुनासिब नहीं समझा। हद तो तब हो गई जब एक तरफ बच्चों की मौत हो रही थी तो वहीं दूसरी तरफ बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंडल पाण्डेय जी विश्व कप के स्कोर जानने में ब्यस्त थे न कि बच्चों की जान बचाने को लेकर कोई योजना बनाने में। मुख्यमंत्री महोदय आते और मीडिया के सवालों का जबाव दिये बिना चुपचाप खिसक लिए फिर मुख्य सचिव वादों का पुलिंदा लेकर बाहर आते हैं और बहुत बड़ा वादा करते हुए कहते हैं कि हम इस अस्पताल को आने वाले समय में 1500 बिस्तर वाला बनायेंगे पर महोदय ये नहीं बताते कि इतना संसाधन लायेंगे कहां से। इतने डाक्टर कहां से लायेंगे ? वो भी तब जब हर मेडिकल कालेज में सीटों की संख्या लगातार सिमित किया जा रहा हो। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि 2014 में जब इसी तरह की बीमारी से सैकड़ों बच्चे मरे थे तब भी नितिश जी और तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन जी ने लगभग यही वादा किया था और उसका क्रियान्वयन कितना हुआ आप सहज रूप से इस घटना के बाद समझ सकते हैं। 

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