आज जनसंघ के संस्थापक श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का पुण्य तिथि है। मुखर्जी जी की तथाकथित सबसे बड़ी उपलब्धि कश्मीर में धारा 370 को लेकर लड़ाई लड़ते हुए 23 जून को अस्पताल में रहस्यमयी मृत्यु रही है। मुखर्जी जी ने कश्मीर में धारा 370 को देश में एक नई बहस छेड़ने का काम किया था, परन्तु दूर्भाग्य वश उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु में साजिश का आरोप संघ/भाजपा ने अनगिनत बार लगाया पर अटल जी के छः साल और मोदी जी के पांच वर्षों के दौरान एक बार भी सरकार ने जांच क्यों नहीं कराई ? संघ और भाजपा मुखर्जी जी के प्रति इतनी उदासीन कैसे हो गई ? अब तक एक अदद जांच तक नहीं करवा सकी या संघ और भाजपा इस मुद्दे को केवल जिन्दा रखने की कोशिश कर रहे हैं। बात चाहे जो हो संघ और भाजपा को कश्मीर के नाम पर उन्माद फैलाकर सत्ता चाहिए था जो उन्होंने हासिल कर लिया है। मुखर्जी जी बीजेपी के मेंटर हैं जो धारा 370 के घोर विरोधी थे और वहीं बीजेपी महज सत्यता भोग के लिए धारा 370 की घोर हितैषी पार्टी पीडीपी के मुफ्ती साहब और महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में कश्मीर में लगभग तीन सालों तक सत्ता भोग किया और 370 को मजबूत करने का काम किया परन्तु जैसे हीं आम चुनाव होने का समय आया तो सरकार छोड़ भगोड़ा हो लिए। इनके कृत्यों पर आज मुखर्जी जी की आत्मा कहीं बैठी रो रही होगी। मुखर्जी जी ने 13 भी को बिना परमिट कश्मीर जाने का प्रण किए और दिल्ली स्टेशन से लोकल ट्रेन में अनेक लोगों के साथ सवार होकर कश्मीर के लिए निकले थे। पठानकोट तक तो इनकी यात्रा बेरोकटोक चली परन्तु जैसे हीं इन्होंने रीवा नदी को पार कर आगे बढ़ने की कोशिश की वैसे ही उन्हें पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया।
जैसा कि धारा 370 के संदर्भ में बात की जाए तो यह कश्मीर के भारत में विलय के दौरान किए गए कुछ मुख्य शर्तों में से एक है। धारा 370 की वजह से आजादी के कुछ वर्षों तक भारत संविधान के केवल कुछ कानून कश्मीर में लागू होते थे। उनमें वित्त, गृह, विदेश एवं रक्षा विभाग प्रमुख थे। परन्तु आज के समय में भारत सरकार द्वारा किसी राज्य को भारतीय संविधान के अनुसार कार्य करने के लिए 96 मानक तय किए थे जिसमें से आज कश्मीर में 94 मानकों पर कार्य किया जा रहा है।
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